करनाल। कुंजपुरा केंद्र से 68 लाख रुपये के गेहूं गबन के आरोपी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक अशोक शर्मा को पुलिस ने शाहबाद से गिरफ्तार किया है। गबन का मामला सामने आने के बाद कुंजपुरा थाना पुलिस ने 6 सितंबर को आरोपी निरीक्षक के खिलाफ केस दर्ज किया था। तब से आरोपी घर से भागा हुआ था, मंगलवार को पुलिस ने उसे दबोच लिया। कुंजपुरा थाना के प्रभारी विक्रांत ने बताया कि आरोपी को बुधवार को अदालत में पेश किया जाएगा।
अप्रैल और मई, 2025 में खरीदे गए गेहूं के स्टॉक कुंजपुरा केंद्र पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक अशोक शर्मा ने यहां रखे बैगों के वजन में गड़बड़ी करते हुए विभाग से 68 लाख 61 हजार 358 रुपये का गबन किया था। निरीक्षक ने 50 किलोग्राम के बैगों की जगह 20 से 25 किलोग्राम के बैग भरकर स्टॉक दिखाया। शेष गेहूं को मार्केट में बेचकर मुनाफा कमा लिया। अप्रैल में गेहूं स्टॉक किया गया और 10 जून तक 68 लाख रुपये से अधिक की कीमत का करीब 2427 क्विंटल गेहूं मार्केट में बेच दिया गया। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब बैगों का वजन कम होने की शिकायत विभाग को मिली।
डीएफएससी अनिल कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की टीम ने केंद्र पर छापा मारा था उसके बाद ही यहां की गड़बड़ी उजागर हुई थी। मंत्री ने भी कुंजपुरा पहुंचकर मामले को देखा था। जांच में सामने आया कि गेहूं की खरीद के समय ही कम वजन के बैग स्टॉक में लगाए गए। बैगों में 10 से 15 किलोग्राम तक वजन कम था। जब यह चोरी पकड़ में आई तो जांच की गई, जिसमें 4902 बैग कम निकले। आरोपी को पहले ही निलंबित किया जा चुका था और अब गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
जांच कमेटी की रिपोर्ट से उजागर हुई गड़बड़ी
गेहूं गबन की जांच मुख्यालय की तरफ से गठित कमेटी ने की। इसमें अंबाला के डीएफएसओ जीतेश गोयल, कुरुक्षेत्र के एएफएसओ बृज मोहन, यमुनानगर के निरीक्षक राजीव सैनी, अंबाला के एचए संजीव के अलावा स्थानीय एएफएसओ और निरीक्षक शामिल रहे। 12 अगस्त को जांच शुरू हुई और पांच सितंबर को रिपोर्ट सौंपी गई। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि कुंजपुरा सेंटर पर खुले में रखे गेहूं के बैग आधे वजन के थे। यानी 50 किलो का बैग सिर्फ 25 किलो का निकला। कई बैग फटे हुए भी मिले, जिनसे गेहूं निकालकर बेच दिया गया।
वजन बढ़ाने के लिए करते थे पानी का छिड़काव
जांच में सामने आया कि जब सरकार को गेहूं की आपूर्ति दी जाती थी तो बैगों का वजन पूरा दिखाने के लिए गेहूं को पानी में भिगो दिया जाता था। इससे वजन बढ़ जाता और चोरी पकड़ी नहीं जाती। यह भी बात सामने आ रही है कि आरोपी ने विभाग को कुछ रकम जमा भी कराई थी हालांकि यह कितनी थी, इसकी जानकारी अधिकारियों की ओर से सार्वजनिक नहीं की जा रही है।
तरावड़ी में गेहूं खराब होने के मामले में कार्रवाई होना तय
पिछले दिनों सीएम फ्लाइंग ने डीएफएससी के तरावड़ी केंद्र (तीन राइस मिलों) में भंडारित गेहूं में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी पकड़ी थी। ये मामला एफसीआई की ओर से खराब गुणवत्ता वाला वाला गेहूं रिजेक्ट किए जाने के बाद खुला था। इस मामले में सीएम फ्लाइंग ने अपनी रिपोर्ट मुख्यालय भेजी है, यहां करीब छह लाख बैग की देखरेख नहीं की गई थी, करीब 20 से 22 हजार बैग ऐसे मिले थे, जिनका रिकॉर्ड ही नहीं मिला था। इस मामले में भी खाद्य आपूर्ति विभाग के निरीक्षक सहित कई अधिकारियों पर गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा है।