कनाडा को छोड़ अपने देश में वापस घर करनाल आकर नितिन ललित ने वेस्ट प्लास्टिक से गमलों का कारोबार खड़ा किया। ‘गमला’ ऐसे तो ये नाम छोटा लगता है, पर ये गमला दूसरे गमलों की अपेक्षा 75 फीसदी कम पानी लेता है। घटते जलस्तर को देखते हुए ये प्रोडक्ट युवाओं को रोजगार देने के साथ-साथ भविष्य के लिए जल संचय में भी सहयोग करेगा। इसके बाद अब अल्फा लेंटन के नाम से नया गमला तैयार किया गया है, जिसके नीचे लाइट और उसके ऊपर प्लांट है। लाइट के लिए इसमें सोलर पैनल फिट करने का प्रावधान भी है। नवंबर में पूना में फूलों व पौधों की एक विशाल प्रदर्शनी में उसने गमलों और पौधों को देखते हुए प्रशस्ति पत्र भी मिला है।
बता दें कि वर्ष 2007 में कनाडा जाकर ऑटो मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग में स्पेसलाइजेशन की और इसी फील्ड में काम करना शुरू किया। वर्ष 2016 तक कनाडा में प्रवास किया। तक उसे मालूम हुआ कि भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विजनरी सरकार है। विजनरी सरकार में स्टार्टअप, स्किल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे सुअवसर अपनाने के व्यापक रास्ते थे, लेकिन विचार आया कि अपने देश में प्रकृति की अनमोल नेमत पानी की इतनी बर्बादी है, जिसका अनुमान लगाना भी कठिन है। यदि इसे नहीं बचाया गया, तो आने वाले पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय हो सकता है। इसी विचार से गमलों को तैयार किया
ऐसे तैयार किया गमले में पौधा
वेस्ट प्लास्टिक को रिसाइकिल कर उसकी डिजाइन युक्त शीट तैयार की गई। इसे मोड़कर अलग-अलग आकार के गमले बनाए जाने का प्रयोग किया। गमले की सतह पर एक अन्य डिजाइन में जल संचय के लिए छोटा वाटर रिजरवायर यानी तश्तरीनुमा जलाशय फिट किया गया। नारियल का बुरादा, चावल मिल की ऐश और वर्मिंग कंपोस्ट के मिश्रण से तैयार खाद को गमले में डालकर उसमें पौधे लगाए गए और सामान्य गमलों में डाले जाने वाले पानी की तुलना में एक चौथाई पानी ही डाला गया। धीरे-धीरे पौधे ने जड़ो के जरिए पानी लेकर अपनी ग्रोथ शुरू की और कुछ समय बीत जाने के बाद एक स्वस्थ पौधा आंखों के सामने था। अब उनकी यहां एल्फा एडवांटक एलएलपी नाम से कंपनी है।
चार डिजाइनों में अलग-अलग साइज के गमले
नर्सरी में गमले 4 इंच से लेकर 25-30 इंच तक अलग-अलग साइजों में हैं। 10 इंच के गमले की बात करें, तो उसमें 6-7 इंच की क्षमता तक कंपोस्ट, 2 से ढाई इंच में मात्र 1 लीटर पानी और फिर उसके ऊपर पौधा, यह है एक तैयार गमला। अब यहां हॉरीजेंटल, वर्टिकल, पॉकेट व बुके जैसे डिजाइनों में गमले मौजूद हैं।
नर्सरी में 25 प्रजातियाें के पौधे
नर्सरी में पौधों की 25 से अधिक प्रजातियां हैं, जिनमें हिमाचल की एक प्रजाति रॉक रोज तथा सैंसीवेरिया, कैकटस, कोलियस, एवरग्रीन, पाम, एलोविरा, फाईकस व बांस जैसे पौधे शामिल हैं।