करवा चौथ की रात कई परिवारों ने पति की लंबी उम्र की दुआ के लिए व्रत की खुशी में आतिशबाजी की, लेकिन इनसे निकला धुआं कहीं हमारी सांसों की डोर ही छोटी न कर दे। शहर के अलग-अलग हिस्सों में चांद के दीदार के बाद महज एक घंटे की आतिशबाजी ही हुई। जिससे एयर क्वालिटी इंडैक्स का भी रिकॉर्ड टूट गया। साल में पहली बार बुधवार रात की आतिशबाजी से वीरवार सुबह का एक्यूआई 353 दर्ज किया गया। रात से सुबह तक भी हल्का स्मॉग छाया रहा। दिनभर नगर निगम की ओर से भी कई जगह पानी का छिड़काव किया गया। फिर भी वीरवार रात 8 बजे तक घटकर 334 तक ही एक्यूआई आया। विशेषज्ञों का मानना है कि करवे की रात हुई आतिशबाजी दिवाली की आतिशबाजी के बाद पैदा होने वाले हालात के खतरे का संकेत है। इसलिए संभलना जरूरी है।
रंगीन आतिशबाजी से जहरीले रसायन तत्व खराब करेंगे हालात
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार आतिशबाजी से वातावरण में कार्बन डाईआक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड, ओक्साइड्स ऑफ नाइट्रोजन, सल्फर डाईआक्साइड गैस की बढ़ोतरी होती है। जबकि रंगीन आतिशबाजी से और भी कई तरह के जहरीले रसायन पैदा होकर हवा में घुलते हैं। जिनका दुष्प्रभाव भयावह है। पराली जलने से भी कार्बन डाईआक्साइड का गुबार वातावरण में छा जाता है। इससे पीएम-2.5 व पीएम-10 साइज के पार्टीकल की सांद्रता वातावरण में बढ़ती है। इनके कण सांस के जरिये फेफड़ों में प्रवेश करने से कफ व वायरल जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ता है।
जानिये, कितना खतरनाक है 300 से ज्यादा एक्यूआई
एक्यूआई रैंक हेल्थ पर प्रभाव
0-50 अच्छा न्यूनतम प्रभाव
51-100 संतोषजनक संवेदनशील लोगों को सांस लेने में तकलीफ
301-400 बहुत खराब लंबे समय तक रहे तो सांस की बीमारी हो सकती है
401-500 भयावह स्वस्थ लोगों को प्रभावित करता है, बीमार लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
बुधवार का एक्यूआई भी 300 पार रहा और वीरवार को भी नया रिकॉर्ड दर्ज हुआ। प्रदूषण कम करने के हम सभी को प्रयास करने चाहिए। अन्यथा दिवाली के बाद स्थिति खराब होगी। आगजनी की घटनाओं पर हम भी निगाह रखे हैं।
-शैलेंद्र अरोड़ा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण विभाग करनाल