सीएम सिटी करनाल को फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने आदर्श जिले के रूप में चुना है। सरकार ने यह चुनाव एनजीटी के कहने पर किया। हालांकि यह सेलेक्शन किस आधार पर किया गया इसपर प्रश्न उठने लगा है। क्योंकि इस संबंध में न तो स्थानीय अधिकारियों के पास कोई आंकड़े हैं और न ही कृषि विभाग के पास कोई तथ्य। एनजीटी ने भी राज्य सरकार से इस चुनाव का आधार और उससे जुड़ा आंकड़ा मांगा है। इस संबंध में एनजीटी में अगली सुनवाई 23 जनवरी को होगी।
दरअसल, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पंजाब और हरियाणा सरकार को अपने राज्य से एक-एक ऐसे आदर्श जिले को चुनने का निर्देश दिया था, जिसमें सबसे कम फसल के अवशेषों को जलाया जाता हो। इस संबंध में सोमवार को जब एनजीटी ने सुनवाई की तो पंजाब ने पटियाला और हरियाणा ने करनाल को आदर्श जिले के रूप में एनजीटी के सामने रखा। हालांकि, जब एनजीटी ने इस चुनाव के संबंध में आंकड़े देने को कहा तो दोनों राज्य नहीं दे पाए। इसलिए एनजीटी ने इस चुनाव से संबंधित सभी आंकड़े रखने के लिए 23 जनवरी तक का समय दिया है।
नहीं है कोई एक्शन प्लान और आंकड़े
करनाल को किस आधार पर आदर्श जिले के रूप में चुना गया और फसल अवशेष जलाने पर कैसे रोक लगाई जाए इस संबंध में कृषि विभाग के पास कोई एक्शन प्लान नहीं है। करनाल में 1.72 लाख हेक्टेयर भूमि में धान और गेहूं के फसल की खेती होती है और फसलों के अवशेष खुलेआम जलाए जाते हैं। लेकिन इसके बाद भी करनाल को आदर्श जिले के रूप में चुना गया है।
जब फसल अवशेष जलाने पर रोक लगाने का एक्शन प्लान और आंकड़ों की जानकारी लेने के लिए कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर प्रदीप मील से बात की गई तो उन्होंने इस संबंध में किसी भी प्रकार का आंकड़ा होने से इंकार किया। डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि, अभी तक विभाग की तरफ से ऐसा कोई आंकड़ा नहीं एकत्रित किया गया है। वहीं, एक्शन प्लान के बारे में उन्होंने बताया कि अभी हम किसानों को जागरूक करके इसपर रोक लगाने की कोशिश कर रहे हैं, अगर ऊपर से कोई प्लान आता है तो उसे फॉलो किया जाएगा।