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बिजली के लटकते तार बने पचास हजार लोगों के लिए खतरा

Tue, 03 Dec 2013 09:36 PM IST
करनाल
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करनाल के कई क्षेत्रों में बिजली के तार लोगों के जी का जंजाल बने हुए हैं। कई क्षेत्रों में तो हाई पावर तार मकानों की छतों के ऊपर से गुजर रहे हैं, जिन्हें कोई भी छू सकता है।
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कई मोहल्लों और गलियों में घरेलू बिजली सप्लाई की ढीले पड़े तार और इनके जाल भी लोगों की जान के लिए खतरा बन सकते हैं। शहर के लोगों की बात मानें तो कई बार विभागीय अधिकारियों को शिकायत की जा चुकी है लेकिन इसके बावजूद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही।

ऐसे हाल में शहर के पचास हजार से अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में लटकते तार परेशानी का सबब बने हुए हैं। गांव फूसगढ़ के पास विकास नगर, राजीवपुरम, गांव बूढ़ाखेड़ा के पास आरकेपुरम, शक्तिपुरम, बसंत बिहार समेत कई क्षेत्रों के पास और ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है।
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इनमें बिजली दौड़ने की आवाज के शोर से ही व्यक्ति भय खा जाता है। इसके अलावा कई स्थानों पर 11 हजार वोल्ट के तार भी मकानों से बिल्कुल सट कर गुजर रह हैं। घरेलू बिजली सप्लाई के केबलों के भी कई क्षेत्रों में जाल बने हुए है, जो लोगों के जी का जंजाल बने हुए हैं।

खास तौर पर अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में ये जाल बुरी तरह फैले हैं। बसंत बिहार, आरकेपुरम, विकास नगर, दुर्गा कॉलोनी, रामनगर, हांसी रोड के कई मोहल्लों में हालात ज्यादा खराब हैं। स्थिति इतनी खराब है कि कोई वाहन गलियाें में जाता है तो तार रास्ते में होने के कारण लोगों को बीच में ही सामान उतारना पड़ता है या फिर डंडे के साथ तार को हटाकर वाहन गुजारे जाते हैं।

ऐसे में कई बार स्पार्किंग तक हो जाती है। तारों के गुच्छों में चिंगारियां देखकर लोगों की जान मुठ्ठी में आ जाती है। राजेंद्र कुमार, नीरज कुमार, लक्ष्मण, प्रीतमदास, राजेश कुमार, सुखबीर सिंह समेत कई लोगों ने बताया कि हाईटेंशन तार का घरों के पास और ऊपर से गुजरना उन लोगों के लिए पूरा खतरा बना रहता है। इन कॉलोनियों में पचास हजार से अधिक की आबादी रहती है।

तरीके  से वायरिंग की जाती तो गली में तार क्रॉस करने की आवश्यकता नहीं पड़ती लेकिन यहां तो साफ देखा जा सकता है कि हर गली में तार क्रॉसिंग हो रही है, जो कभी भी जानलेवा साबित हो सकती है। कई बार लोग अधिकारियों के नोटिस में मामले ला चुके हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। अब नगर निगम बना है। क्षेत्र के पार्षदों को चाहिए कि वे जनहित के कार्य मेें लोगों की मदद की पहल अपनी ओर से करें।

निगम के तकनीकी अधिकारियों ने बताया कि हाईटेंशन तार वास्तव में बेहद खतरनाक हैं। बिजली निगम तार के नीचे कभी बिजली का कनेक्शन नहीं देता। लोगों को भी कभी हाईटेंशन तार के नीचे मकान नहीं बनाना चाहिए। हाईटेंशन में इतनी पावर होती है कि रात को तार के नीचे कोई वाहन खड़ा कर दिया तो उसकी बैटरी सुबह खत्म हुई मिलेगी।

बारिश के दौरान आसमान से बिजली चमकती है तो लाइन में पावर बढ़ जाती है। 11 हजार वोल्ट के तार नीचे होने के कारण भी इसके नीचे से जा रहे मकानों में कनेक्शन नहीं दिए जाते लेकिन कुछ स्थानों पर मकान बने हैं। लोगों को चाहिए कि वह ऐसे स्थानों से बचे। उन्हें खाली रहने दें ताकि भविष्य में कोई खतरा न हो।

शहर के बाहर हो हाईटेंशन तार
सामाजिक संस्था निफा के अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह पन्नू, सीनियर सिटीजन कमेटी के अध्यक्ष जेआर कालड़ा समेत कई लोगों ने बताया कि करीब 25 साल पूर्व हाईटेंशन तार पूरी तरह शहर के बाहर होते थे।

बढ़ती आबादी के साथ शहर का चारों ओर फैलाव हो गया। ऐसे तार लोगों के लिए सही में खतरा है। सरकार को चाहिए कि इनको आबादी क्षेत्र से दस किलोमीटर दूर से निकाले ताकि लोगों की जान को जोखिम नहीं हो। समस्या का समाधान होना चाहिए।

पार्षद बोले, निकलवाएंगे हल
नगर पार्षद बलविंदर सिंह और राकेश उर्फ भाग सिंह ने कहा कि मामला जनहित का है। गलियों में तार के जाल बिछे पडे़ हैं। इससे कई बार हादसे हो चुके हैं।

इस समस्या से निजात दिलाने के लिए वे निगम के संबंधित अधिकारियों से मिलकर कोई हल निकलवाने का प्रयास करेंगे।

लोगों की सुविधा के लिए निदान कराते हैं
हाईटेंशन तार को सहज नहीं बदला जा सकता है। निगम घरों के ऊपर से तार नहीं गुजारता है। इसके बावजूद जीवन बहुत अमूल्य है। किसी को परेशानी है तो वह निगम के अधिकारियों से मिलकर अपने खर्च पर इस समस्या का समाधान करवा सकता है।

एस्टीमेट बनवाना पड़ेगा। 11 हजार वोल्ट के तार के मामले में थोड़ा बहुत तो वे लोग पोल लगाकर और एंगल लगाकर भी समस्या को दूर कर देते हैं।

मेजर समस्या हो तो पैसा जमा कराना पड़ता है। गलियों में केबल के जाल बिछे होने की शिकायत कभी नहीं मिली। कोई शिकायत करेगा तो निगम इस समस्या का निदान कराएगा।
टीके महाजन, अधीक्षण अभियंता, बिजली वितरण निगम

एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से भटकते यात्री
नीलोखेड़ी में देश की आजादी के 63 साल बाद भी नीलोखेड़ी में एक्सप्रेस गाड़ियों का ठहराव नहीं हो पाया है। शहर के 25 हजार लोगों समेत खंड नीलोखेड़ी के दो लाख की आबादी को एकमात्र गाड़ी दादर एक्सप्रेस नसीब होती है।

क्षेत्र के लोगों के अनुसार एक्सप्रेस गाड़ियों के ठहराव के लिए रेल मंत्री लालू प्रसाद के जमाने से मांग करते आ रहे हैं लेकिन मांग पर रेल का ठहराव कराना तो दूर, रेल मंत्रालय की ओर से कोई जवाब तक नहीं दिया गया है। कुल मिलाकर मंत्रालय को भेजे आग्रह पत्र के बाद क्षेत्र के लोगों को निराशा ही मिली है।

दिल्ली से अंबाला रेलवे ट्रैक पर नीलोखेड़ी रेलवे स्टेशन का निर्माण वर्ष 1950 में किया गया था। यह कस्बा भारत सरकार के कई महत्वूपर्ण संस्थान होने के कारण विशेष है। इसके बावजूद रेल मंत्रालय को कोई परवाह नहीं है। वर्ष 1950 से लेकर अब तक समय बीतने के साथ साथ आसपास बने सभी रेलवे स्टेशनों पर नीलोखेड़ी से अधिक गाड़ियों के ठहराव होते हैं।

विभिन्न एक्सप्रेस व सुपरफास्ट ट्रेनों के ठहराव हो रहे हैं। 63 साल में वहां एकमात्र ट्रेन दादर एक्सप्रेस का ठहराव तय हुआ है। हालांकि क्षेत्रवासी अन्य महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव भी तय करने की मांग करते रहे हैं लेकिन अब तक कोई सार्थक परिणाम सामने नहीं आया।

दूसरे स्टेशनों से पकड़ते हैं गाड़ी
नीलोखेड़ी की बात करें तो यहां से बहुतकनीकी संस्थान के छात्र, एचआईआरडी, ईईआई व राजकीय प्रिंटिंग प्रेस आदि सरकारी कार्यालयों के कर्मचारियों समेत रोजाना सैकड़ों लोग ट्रेन में सफर करते हैं लेकिन उन्हें एक्सप्रेस का सफर सामान्यत: नसीब नहीं हो पाता है।

लोगों को दूरदराज की यात्रा के लिए एक्सप्रेस पकड़ने के लिए करनाल, अंबाला या कुरुक्षेत्र जाना पड़ता है।

रेल मंत्री को पत्र के बाद भी परिणाम शून्य
नीलोखेड़ी दैनिक रेलवे यात्री संघ, विकास मंच व बजरंग दल के पूर्व महासचिव प्रवीण मेहता ने बताया कि वर्ष 2008 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव व बाद में वरिष्ठ नागरिक एसोसिएशन ने मार्च 2011 को भी एक्सप्रेस के ठहराव के लिए पत्र लिखा था लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

उन लोगों को रेल मंत्रालय में नीलोखेड़ी के नाम पर अंधेरगर्दी नजर आ रही है। सांसद डॉ. अरविंद शर्मा ने भी कभी लोगों के पक्ष में ऐसा प्रयास नहीं किया।

मजबूरी में करते हैं बसों में यात्रा
स्थानीय निवासी रविंद्र गाबा, सुभाष, अशोक, दिनेश, राजीव व संगीता का कहना है बसों से महंगी यात्रा करने की मजबूरी दिल्ली और अंबाला की तरफ जाने वाली कम गाड़ियों के कारण लोगों को बसों में महंगी यात्रा करनी पड़ रही है।

सुबह आठ बजे के बाद दोपहर एक बजे के बीच दिल्ली जाने वाली एक भी रेलगाड़ी नहीं है। कुछ ऐसा हाल अंबाला जाने वाली ट्रेनों का भी है। सुबह 11:25 बजे के बाद शाम 6 बजे के बाद पैसेंजर ट्रेनें है।
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