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लौट गया विकास का डेढ़ करोड़

Tue, 08 Jul 2014 12:32 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो, करनाल
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विकास के लिए पैसा न आए अलग बात है, लेकिन लाखों रुपया बिना इस्तेमाल किए वापस लौट जाए। इसे तो सरकारी मशीनरी की निष्क्रियता ही कहा जाएगा। करनाल में ग्रामीण और शहर में विकास के लिए आया एक करोड़ 41 लाख 45 हजार रुपया लैप्स हो गया है।
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यानी इतनी बड़ी राशि विकास पर खर्च होने के बजाय वापस सरकार को चली गई है। इस राशि से ज्यादातर गांवों में गलियां बननी थी। पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति वर्ग के लिए चौपालें और कम्यूनिटी सेंटर बनने थे, लेकिन नहीं बने। यह सारी राशि जिला प्लान के तहत प्रशासन को मिली थी।

जिला प्रशासन को  सामान्य श्रेणी में 415.60 लाख और एससीएसपी के तहत 178.54 लाख रुपये मिले थे। इनमें से सामान्य श्रेणी में 374.54 लाख और एससीएसपी के तहत 124.17 लाख रुपये इस्तेमाल किए गए। बाकी राशि लैप्स
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हो गई।

इलेक्ट्रिक क्रिमेटोरियम की योजना फेल
प्रशासन ने शहर में किसी श्मशान घाट में इलेक्ट्रिक क्रिमेटोरियम (बिजली चालित दाह संस्कार करने वाली मशीन) स्थापित करने की योजना बनाई थी। इसके लिए 25 लाख रुपया का बजट पारित हुआ और नगर निगम के पास आ भी गया, लेकिन किसी भी श्मशान घाट की ओर से हामी नहीं भरी गई, इसके चलते यह 25 लाख रुपये रिफंड हो गए।  

इनका नहीं हो सका काम
असंध में शहीद स्मारक की चहारदीवारी के लिए डेढ़ लाख रुपये, इंद्री में गुरुद्वारे से शिव मंदिर तालाब तक नाले के लिए चार लाख रुपये, करनाल के रामनगर में कम्यूनिटी सेंटर का निर्माण पूरा करने के लिए पांच लाख रुपये, इंद्री में सड़क के लिए साढ़े दस लाख रुपये, सालवन गांव में सैंसी मोहल्ला में कम्यूनिटी सेंटर के लिए पांच लाख रुपये, अरड़ाना में श्मशान घाट की चहारदीवारी के लिए पांच लाख रुपये, पबाना हसनपुर में हरिजन चौपाल के लिए चार लाख रुपये, गुढ़ा में हरिजन चौपाल के सामने पार्क के लिए पांच लाख रुपये, अराईपुरा में हरिजन चौपाल के लिए पांच लाख रुपये, बीर रैहतखाना में हरिजन चौपाल के लिए तीन लाख रुपये, मनोहरपुर में पंचायत घर के लिए छह लाख रुपये, उडाना में हरिजन चौपाल के लिए तीन लाख रुपये, मंजूरा में सीसी गली के लिए छह लाख रुपये, तरावड़ी में सड़कों के लिए दस लाख रुपये सहित कई गांवों की गलियों के लिए आया पैसा वापस लौट गया है।

आया पैसा इस्तेमाल तो हो
आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट राजेश शर्मा ने आरटीआई के जरिए यह जानकारी हासिल की। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के लिए जो फंड भेजती है, जिला प्रशासन उसका सही तरीके से इस्तेमाल करे तो लोगों को मूलभूत दिक्कतों से जूझना नहीं पड़ेगा। प्रशासन की जवाबदेही तय हो ताकि हर साल करोड़ों का फंड लैप्स न हो।
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