डीसी बलराज सिंह ने लघु सचिवालय परिसर से कृषि विभाग की ओर से दो प्रचार
गाड़ियों को झंडी दिखाकर रवाना किया। यह प्रचार गाड़ियां जिला के
गांव-गांव पहुंचकर किसानों को गेहूं के बचे अवशेषों को न जलाने व साठी धान
नहीं लगाने के बारे में जागरूक करेंगी।
डीसी ने कहा कि धान नर्सरी की
बिजाई 15 मई से पहले व धान की रोपाई 15 जून से पहले करना अवैध है। इससे
भूमिगत जल स्तर में भारी गिरावट होती है। प्रदेश सरकार ने साठी धान लगाने
पर कानूनी प्रतिबंध लगाया हुआ है तथा कानून का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ
एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।
जिसके तहत किसान पर 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर
प्रति माह की दर से जुर्माना लगाने का प्रावधान है। उन्होंने किसानों से
अपील करते हुए कहा कि धान की सीधी बिजाई करके जल संरक्षण को बढ़ावा दें, इस
विधि के अपनाने से किसान 30 प्रतिशत जल की बचत कर सकते है।
उन्होंने
किसानों को खेतों में गेहूं के अवशेष नहीं जलाने के लिए भी प्रेरित किया।
अवशेष जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है व भूमि की ऊपरी सतह पर
पाए जाने वाले मित्र कीट जैसे मकड़ी, केंचुआ, मधुमक्खी आदि मर जाते हैं व
ऊपरी सतह गर्म हो जाने के कारण बीज का जमाव भी कम होता है।
उन्होंने बताया
कि अवशेष जलाने पर भी पूर्णत: प्रतिबंध है। जो किसान आदेशों की अवहेलना
करेगा उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 व वायु एवं प्रदूषण
अधिनियम 1981 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डीसी ने किसानों का
आह्वान किया कि अब खेत खाली है, वह कृषि अधिकारियों से संपर्क करके अपने
खेत की मिट्टी की जांच करवाएं ताकि रिपोर्ट के अनुसार ही खेत में खाद डाली
जा सकें।
इस अवसर पर कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. पवन शर्मा, एसडीओ डॉ. शीश
पाल, इंद्री के ब्लाक कृषि अधिकारी राजेंद्र तोमर, डॉ. अश्विनी कुमार, डॉ.
राकेश अग्रवाल, डॉ. सुरेंद्र कुमार भी मौजूद रहे।