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भाग्य हमारे हाथों की लकीरों में नहीं : बीके ओंकार चंद

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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। ब्रह्माकुमारीज कुंजपुरा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में माउंट आबू से पहुंचे मोटिवेशनल वक्ता प्रो. बीके ओंकार चंद ने कहा कि भाग्य हमारे हाथों की लकीरों में नहीं, हमारे कर्मों में है। जीवन में सफल होने के लिए एक ही मंत्र याद रखना, अपने फायदे से पहले दूसरे का फायदा सोचना है। जो कुछ मेरे साथ हो रहा है वह मेरे ही कर्मो का हिसाब-किताब है। क्योंकि जैसे मेरे कर्म होते हैं वैसा ही मेरा भाग्य बनता है।
हम याद रखें मेरे वर्तमान के कर्म अभी का भाग्य भी लिख रहे हैं तो आगे का भाग्य भी बना रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम यह बात पक्का कर ले यदि हमारे कर्म श्रेष्ठ होंगे तो हमारे साथ बढ़िया से बढ़िया ही होगा। हमें ईट का जवाब पत्थर से नहीं देना है, ईट का जवाब हमें फूल से देना है। दूसरे का कर्म हमारे भाग्य को नहीं बिगाड़ सकता केवल मेरा कर्म ही मेरा भाग्य बनाता है।
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हम खुद अपने भाग्य को लिखते हैं। यदि हमारे जीवन में कोई समस्या व परेशानियां आ रही हैं तो उसका कारण दूसरा व्यक्ति नहीं बल्कि मेरे द्वारा पूर्व में किए गए कर्म ही हैं जो अब सामने आ रहे हैं।
इसलिए अपने भाग्य के लिए दूसरों को दोष नहीं देना है बल्कि अपने कर्मोँ को सही करना है। हम ध्यान रखें कि घर में दुआओं के साथ ही धन आना चाहिए। हम कितना धन कमा रहे हैं ये महत्वपूर्ण नहीं है पर कैसे कमा रहे हैं यह जरूर महत्व रखता है। अगर गलत तरीके से कमाया गया धन घर परिवार में आएगा तो वह उस घर के भाग्य को बिगाड़ देगा। धन से भी ज्यादा महत्व दुआएं कमाने का है क्योंकि अगर दुआएं साथ हों तो बड़ी से बड़ी बात भी ऐसे ठीक हो जाती है जैसे कुछ हुआ ही ना हो।
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इस अवसर पर बी के निर्मल बहन ने कहा कि सब लोग यही कहते हैं कि खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाना है। यह कहना गलत है। न हम खाली हाथ आए थे और न हम खाली हाथ जाएंगे। कर्म की बैलेंस शीट ही साथ जाएगी। हमेशा ध्यान में रखना है कि अब अगर इस भाग्य में कुछ बदलाव करना है, कुछ ठीक करना है तो अंगुली किसके पास जानी है अपनी तरफ।
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