हरियाणा में सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों की प्रगति के लिए महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल व इसके क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्रों में हाइटेक ग्रीन हाउस तैयार किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर टमाटर, खीरा, शिमला मिर्च, रंगीन शिमला मिर्च इत्यादि विभिन्न सब्जियों की उच्च तकनीक से सॉयल लैस विधि से उच्च गुणवत्ता की पौध तैयार की जाएगी। तैयार पौध किसानों को प्रदान की जाएंगी। अच्छी गुणवत्ता की पौध होने से न केवल सब्जियों की उपज बढ़ेगी बल्कि किसानों की आमदन बढ़ने के साथ राज्य में उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
किसानों को अपने क्षेत्र में सब्जियों की पौध के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। बागवानी विश्वविद्यालय अंजनथली-करनाल, इसके क्षेत्रीय मशरूम केंद्र मुरथल व झज्जर जिले के रैया स्थित केंद्रों पर हाइटेक ग्रीन हाउस का निर्माण तेजी से चल रहा है। विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. समर सिंह का कहना है उच्च गुणवत्ता की पौध का असर सीधा उपज पर पड़ेगा। उपभोक्ता के लिए ताजी सब्जियों की कमी नहीं रहेगी।
बेहतरीन किस्मों-फलों पर अनुसंधान कार्य
बागवानी विश्वविद्यालय के अनुसंधान केंद्रों पर फलों के पैतृक वृक्ष स्थापित करने के बाद फलों की पौध किसानों को उपलब्ध करवाने की भी योजना है। अमरूद की हिसार सफेदा व हिसार सुरखा किस्म की हरियाणा में काफी मांग है। उसकी कमी को पूरा किया जा सकेगा। अनार के अलग-अलग किस्मों के क्लोन झज्जर के रैया स्थित विश्वविद्यालय के अनुसंधान केंद्र में लगाए गए हैं। यह करीब 16 क्लोन बेंगलूरू से लाए गए थे। हरियाणा की जलवायु के अनुसार स्क्रीनिंग की जा रही है। जो किस्म अच्छी चलेगी उसे बढ़ावा देंगे। इस पर अनुसंधान कार्य किया जाएगा। उसके परिणाम के अनुसार आगे निर्णय लिया जाए। बागवानी क्षेत्र में यह बड़ा कदम होगा। इसके अलावा यहां की आबोहवा अनुसार अनुसंधान केंद्रों पर विभिन्न फलों का भी अधिक जर्मप्लाजा किया जाएगा। देश व विदेशों से पौधे लाकर उनकी स्क्रीनिंग की जाएगी।
-निदेशक अनुसंधान, डा. रमेश कुमार गोयल, महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, अंजनथली-करनाल