बसताड़ा टोल पर शनिवार सुबह करीब साढ़े दस बजे भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ की गाड़ी का भी किसानों ने विरोध किया। कुछ किसान पहले से ही वहां धरने पर बैठे थे। धनखड़ भाजपा की प्रदेश स्तरीय बैठक में भाग लेने करनाल आ रहे थे। तभी बसताड़ा टोल से गुजरते हुए किसानों ने गाड़ी रोकने की कोशिश करते हुए काले झंडे दिखाए। इस दौरान किसानों ने सरकार और पुलिस के खिलाफ भी नारेबाजी की। मगर पुलिस ने मौके पर स्थिति संभालते हुए धनखड़ की गाड़ी को तुरंत वहां से आगे निकाल दिया।
किसानों ने पत्थरों-कस्सी से किया पुलिस पर हमला
एडीजीपी कानून एवं व्यवस्था नवदीप सिंह विर्क ने कहा है कि किसानों ने पुलिस पर पत्थरों और कस्सी से हमला किया, जिसमें दस पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। नियमानुसार पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आत्मरक्षा में हल्का बल प्रयोग किया। शनिवार सुबह ही किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग को जबरदस्ती जाम कर दिया। करनाल शहर की तरफ भी जाने की कोशिश की। जब उन्हें रोकने की कोशिश की तो पुलिस पर हमला बोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त किसान मोर्चा के साथ हुई संधि का भी उल्लंघन किया है। टोहाना में मोर्चा ने कहा था कि कोई भी प्रदर्शन उग्र या हिंसात्मक नहीं होगा।
हाईवे जाम करेंगे, पत्थर मारेंगे तो कानून अपना काम करेगा: मनोहर
किसी के कार्यक्रम में व्यवधान डालना लोकतंत्र विरोधी कदम है। अगर किसानों को प्रदर्शन ही करना था तो शांतिपूर्वक करते, हमें कोई आपत्ति नहीं होती लेकिन पुलिस पर पत्थर मारेंगे या हाईवे जाम करेंगे तो कानून अपना काम करेगा। जाम के दौरान जिसका कसूर होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।- मनोहर लाल, मुख्यमंत्री हरियाणा
अन्नदाता का खून बहाना सरकार की आदत बन चुकी है। पहले सरकार जानबूझकर टकराव के हालात पैदा करती है और पुलिस अलोकतांत्रिक, अमानवीय और तानाशाही तरीके से किसानों पर हमले होते है। यह पहला मौका नहीं है, जब किसान लहूलुहान हुआ हो। - भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री
इस बर्बरता का खामियाजा भुगतेंगी सरकारें: चढ़ूनी
लोगों की परेशानी को देखते हुए किसानों ने जाम खोल दिया है। लेकिन पुलिस की बर्बरता का विरोध जारी रहेगा। दो दिन के भीतर प्रदेश स्तरीय बैठक होगी। जिसमें इस घटनाक्रम का विरोध करने संबंधी रणनीति तैयार की जाए। इस घटना का खामियाजा प्रदेश और केंद्र सरकार दोनों को भुगतना पडे़गा। - गुरनाम सिंह चढू़नी, प्रदेशाध्यक्ष भाकियू
विरोधी नेता किसानों को भी समझाएं: मेहता
कस्सी से पुलिस के जवानों पर जानलेवा हमला करने के बाद पुलिस लाठीचार्ज के लिए मजबूर हुई। विरोधी दलों के नेताओं को किसानों को भी समझाना चाहिए। प्रदर्शन करें, ये किसानों का लोकतांत्रिक अधिकार है, मगर संयम और शांति जरूरी है। - विनोद मेहता, मीडिया एडवाइजर टू सीएम