चार गांवों की चकबंदी के मामले में प्रशासन की जांच पर किसानों ने सवाल उठाए हैं। इसके विरोध में कालरम, भरतपुर, लालूपुरा, अराईपुरा के किसानों ने शनिवार को नया तरीका अपनाया और डीसी कार्यालय के बाहर गायत्री मंत्र का जाप किया।
इसके बाद किसानों ने डीसी के नाम तहसीलदार को ज्ञापन देकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। किसानों ने आरोप लगाया कि दबाव में आकर चार घंटे में ही मामले की जांच पूरी कर दी गई है। शनिवार को चकबंदी के दौरान जमीन को गंवाने वाले चारों गांवों के पीड़ित किसान उपायुक्त से मिलने पहुंचे। इनके साथ आईएसी के सदस्य भी मौजूद थे।
सबसे पहले किसानों ने डीसी कार्यालय के बाहर बैठकर चकबंदी करने वाले पटवारियों, कानूनगो और एसीओजो के खिलाफ विरोध जताते हुए गायत्री मंत्र का जाप किया। इसके बाद तहसीलदार को डीसी के नाम ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में किसानों ने जांच पर सवाल उठाए हैं।
किसानों ने बताया कि चार दिन पूर्व ही उन्होंने डीसी कार्यालय के बाहर अर्धनग्न प्रदर्शन करते हुए तुरंत जांच-पड़ताल की मांग की थी। साथ ही रामकुमार कानूनगो, दर्शन पटवारी, प्रदीप पटवारी, नफे सिंह पटवारी और दलबीर एसीओ को यहां से तुरंत प्रभाव से तबादले की मांग उठाई थी।
हैरानी की बात यह है कि चकबंदी अधिकारियों ने आनन-फानन चार घंटे में जांच कर पीड़ित किसानों के हाथों में रिपोर्ट थमा दी है। इसी रिपोर्ट के लिए किसान उपायुक्त के पास पहुंचे थे। किसान नरेंद्र और जोगेंद्र राणा ने बताया कि चारों गांवों को बर्बाद करने में इन्हीं चकबंदी अधिकारियों का नेताओं और भूमाफियों के साथ मिलकर पूरा हाथ रहा है।
इन्हीं अधिकारियों की ओर से जांच करना, वह भी कुछ समय में, पीड़ित किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने के समान है। किसान इन अधिकारियों की संपत्ति की जांच-पड़ताल करने की मांग कर रहे हैं। आईएसी सदस्य जेपी शेखपुरा ने कहा कि 16660 बीघे जमीन को अगर ये चकबंदी अधिकारी अपनी सच्ची मंशा से और परिश्रम के साथ बंटवारा करते तो आज किसानों की आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा मजबूत हो जाती।
दुर्भाग्य की बात है कि इन्हीं अधिकारियों ने वहां पर दूसरों के नाम अपनी-अपनी जमीन खरीद रखी हैं। अगर इस चकबंदी की दोबारा जांच की जाए तो बड़े-बड़े अधिकारी और नेता बेनकाब होंगे। शेखपुरा ने प्रशासन को दस दिन का अल्टीमेटम दिया है कि निष्पक्ष जांच कराई जाए अन्यथा उग्र प्रदर्शन होगा।
मौके पर मुख्य रूप से प्रदीप कुमार, नरेंद्र कुमार, प्रिंस, कृष्ण रोड़, महीपाल राणा, नकली राणा, अरुण राणा, ईश्वर जोगी, प्रकाश जोगी, रोशन डॉक्टर, जय सिंह रोड़, तेग सिंह राणा, जनक सिंह शर्मा, शिव नारायण शर्मा, स्पटर जोगी, हेमसिंह राणा, लाला राणा, शेर सिंह हरिजन, सुरेश हरिजन, बलवान हरिजन सहित अन्य उपस्थित थे।