लौटता मानसून किसानों पर कहर बरपा रहा है। शुक्रवार के बाद शनिवार को दूसरे दिन भी निरंतर हुई झमाझम बारिश ने किसानों के चेहरों पर मायूसी ला दी है। जिलेभर के कई क्षेत्रों में धान की फसल जमीन पर गिरने से किसानों को भारी नुकसान होने उठाना पड़ा है।
मौसम विभाग के मुताबिक रविवार के बाद भी बारिश लगातार हुई तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। बारिश से पूरे छह महीने की मेहनत पर पानी फिरने के आसार से इंकार नहीं किया जा सकता। दो दिन से हो रही बारिश ने किसानों को बहुत नुकसान पहुंचाया है।
धान जमीन पर बिछ गई है। इसके कारण बाली गिर जाएगी और झार कम हो जाएगा। इसके अलावा कटाई के समय भी दिक्कत झेलनी होगी। पिछले दो दिन से जिलेभर में कहीं अधिक तो कहीं कम बारिश हो रही है। कुछ स्थानों पर बारिश बिल्कुल भी नहीं हुई लेकिन करनाल और आसपास के गांवों में शुक्रवार दोपहर में भी झमाझम बारिश हुई थी।
निसिंग क्षेत्र में तो किसानों की हालत शुक्रवार की बारिश के बाद ही खराब हो गई थी। शनिवार को भी बारिश से सुबह करीब छह बजे ही अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया था। प्रारंभ में हल्की बारिश हुई लेकिन सुबह करीब आठ बजे से करीब 11 बजे तक झमाझम बारिश हुई।
मात्र दो-तीन मिनट ही बीच में बारिश रुकी। बारिश रुकने के दौरान भी एक पल के लिए आसमान से जमकर पानी बरसा। दिन में कई बार कहीं अधिक तो कहीं कम बारिश होने का सिलसिला जारी रहा। बारिश के दौरान चली तेज हवाओं के कारण धान की फसल खेत पर नीचे गिर गई।
इससे किसानों के लिए बड़ी मुसीबत हो गई। किसानों के पास कुदरत के सामने प्रार्थना करने के अलावा कोई चारा बाकी नहीं बचा है। गांव फाजिलपुर निवासी रघुबीर, गांव रंबा निवासी शमशेर सिंह, गांव औंगद निवासी राजकुमार, निसिंग निवासी रामसिंह के अनुसार बारिश के कारण उन लोगों को भारी नुकसान हो रहा है।
उन लोगों की सैकड़ों एकड़ भूमि पर खड़ी धान की फसल जमीन पर ढह गई गई। उन लोगों के अनुसार शुक्रवार को बारिश में गिरी धान की फसल संभवत: उठ जाती लेकिन शनिवार को हुई बारिश ने हालत और पतली कर दी। एक ओर जमीन गीली होने से धान के पौधों में खड़ा होने की शक्ति कमजोर पड़ गई।
दूसरी ओर धान बिछने के कारण पौधे भारी हो गए थे। इसके अलावा गिरी फसल पर बारिश हो गई। तीनों कारणों के कारण किसानों के चेहरों के रंग उड़ गए हैं। किसानों का कहना है कि अगले दो दिन बारिश और हो गई तो उन लोगों की मेहनत पूरी तरह चौपट हो जाएगी।
दो दिन निरंतर हुई बारिश से किसानों के लिए चारों ओर से परेशानी है। धान के पौधे नीचे गिरने से धान के पौधे का झार कम हो जाएगा। इसके अलावा पौधे जमीनी की मिट्टी में धंस जाएंगे। ऐसा होने से धान में नमी रहने की संभावना बनी रहेगी।
कटाई के दारान भी दिक्कत आएगी। जमीन पर गिरी धान की कटाई करने के लिए मजदूर महंगे भाव में मिलेंगे। कंबाइन से कटाई कराएंगे तो मिट्टी साथ जाएगी। ऐसे में किसान को चारों ओर से नुकसान हो रहा है। अब बारिश नहीं हो तो किसानों का बचाव संभव है।
अभी नुकसान वाली बारिश नहीं
अभी तक कुछ खास बारिश नहीं हुई है। जमीन पर गिरी फसल का भी अभी कोई नुकसान नहीं है। अगले दो तीन दिन बारिश लगातार हो गई तो किसानों को भारी नुकसान हो सकता है लेकिन अभी तक कोई नुकसान नहीं है। हवा चलेगी तो धान की फसल सीधी हो जाएगी। 10-12 एमएम बारिश से धान का कुछ बिगड़ने वाला नहीं है।
सुरेश गहलावत, डीडीए, करनाल
बारिश से खिले लोगों के चेहरे
उधर, दो दिन से हो रही बारिश से लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिली है। गर्मी से जूझ रहे लोगों के चेहरे बारिश से खिल उठे। वहीं, मौसम में भी बदलाव आ गया है। उधर, मौसम विभाग के गणित पर नजर डाले तो मानसून लौट रहा है। रविवार 22 सितंबर तक बारिश की संभावना है।
इसके बाद 27 सितंबर को अंतिम बारिश हो सकती है। बारिश बहुत कम और बहुत अधिक भी हो सकती है। शानिवार को 10.0 एमएम बारिश होना रिकॉर्ड किया गया है। हवा की स्पीड 6.2 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। शुक्रवार को हुई बारिश के कारण करीब दस डिग्री तापमान टूटने के साथ शनिवार को अधिकतम 25.0 डिग्री दर्ज किया गया है।
न्यूनतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मौसम मेें नमी सुबह के समय 91 प्रतिशत और शाम के समय 90 प्रतिशत दर्ज किया गया। वाष्प दाब सुबह के समय 20.6 एमएम तथा शाम के समय 22.1 एमएम दर्ज किया गया।
इंद्री में सात एमएम बारिश से संकट
क्षेत्र में शनिवार को हुई भारी बारिश के कारण हजारों एकड़ फसल पूरी तरह जमीन पर गिर गई। इतना ही नहीं, जो अगेती धान मंडियों में पहुंची थी, वह भी पूरी तरह भीग गई। इस मौसम में हुई बारिश से किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। इस बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है।
एक ओर जहां धान जमीन पर गिर गई है, वहीं खेतों में पानी भर गया है। गांव सांतड़ी, धूमसी, बढेड़ी, गढ़ी बीरबल, मखाला, मखाली, शेरगढ़ नठौडी, हंसूमाजरा, चौगांवा, खानपुर सहित क्षेत्र के अन्य गांवों में शनिवार सुबह हुई बारिश और तेज हवाओं के कारण धान की पकी खड़ी फसल जमीन पर गिर गई।
इस बारिश से क्षेत्र के किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। क्षेत्र के किसान राजकुमार, रणदीप, नरेश, राजेश सरपंच, सेठपाल, कर्मसिंह, मेघराज, चमन लाल, फुल्लाराम ने बताया कि धान के साथ-साथ सब्जी, पशु चारा तथा अन्य फसलों को भी नुकसान हुआ है।
ज्यादातर किसानों ने जमीन ठेके पर ली हुई है। एक एकड़ पर धान उगाने के लिए 30 हजार रुपये तक का खर्चा आता है। गेहूं की फसल में भी किसानों को काफी नुकसान हुआ था। क्षेत्र में पिछले दिनों आई बाढ़ के कारण फसलें और सब्जियां तबाह हो गई थी और अब बारिश से पकी फसल खत्म हो चुकी है। किसानों ने बताया कि इस धान का दोबारा जमीन पर जमने का खतरा पैदा हो गया है।
नुकसान का आंकलन किया जाएगा
खंड कृषि अधिकारी राजेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि क्षेत्र में शुक्रवार रात से बारिश हो रही है। शनिवार सुबह तक सात एमएम से ज्यादा बारिश रिकार्ड की गई है। जिन खेतों में धान की फसल गिर गई है और जिन खेतों में पानी ठहर गया है, वहां ज्यादा नुकसान की आशंका है।
इस बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान धान की फसल को हुआ है। नुकसान का आंकलन किया जाएगा।