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चकबंदी पीड़ित किसानों ने किया चंडीगढ़ कूच, पुलिस ने रोका, तकरार

Tue, 27 Sep 2016 12:55 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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किसानों का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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चकबंदी का दंश झेल रहे घरौंडा के पांच गांव कालरम, अराईपुरा, भरतपुर, लालुपुरा और अमृतपुरकलां के पीड़ित किसानों ने सोमवार को जिला प्रशासन और रोहतक कमिश्नर की ओर से फैसला नहीं आने के विरोध में परिवारों के साथ सीएम आवास चंडीगढ़ के लिए कूच किया। ट्रैक्टर ट्रालियों में सवार महिला और बच्चों समेत आए किसानों को करनाल में पुलिस ने रोक लिया। इस दौरान करीब तीन घंटे पुलिस व किसानों में तकरार चलती रही।
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आखिर सीएम के ओएसडी भूपेश्वर दयाल के आश्वासन के बाद ही शाम चार बजे ग्रामीण वापस गांवों की ओर लौटे। ओएसडी ने आश्वासन दिया है कि ग्रामीणों की 11 सदस्यीय कमेटी को करनाल में सीएम से मिलवाया जाएगा। चकबंदी पीड़ित संयोजक प्रदीप कालरम ने बताया कि अगर सीएम से मिलकर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो फिर वह चंडीगढ़ में ही डेरा डालेंगे। उधर, ग्रामीणों के ट्रैक्टर ट्रालियों के चलते जीटी रोड पर करीब ढाई घंटे यातायात बाधित रहा। हालांकि, पुलिस ने ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया था।

सोमवार सुबह पांचों गांवों के सैकड़ों किसान परिवारों ने महिलाओं और बच्चों समेत कालरम गांव मेें इकट्ठे होकर लगभग 42 ट्रैक्टर-ट्रालियों में सवार होकर सीएम आवास चंडीगढ़ की ओर कूच करने लगे। जीटी रोड से होते हुए जैसे ही ग्रामीण करनाल पहुंचे तो निर्मल कुटिया व आईटीआई चौक के बीच में ही ग्रामीणों को पुलिस ने रोक लिया। शहर में जाट भवन के नजदीक जीटी रोड पर पुलिस ने ट्रैक्टरों के आगे गाड़ी खड़ी करके किसानों को मंगलवार को सीएम मनोहर लाल के करनाल आने की बात कहकर यहीं पर रोक दिया। प्रशासन द्वारा किसानों को जाट धर्मशाला में रूकने की बात भी कही गई, लेकिन किसानों ने जिला सचिवालय में रूकने की बात कही।
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पुलिस ने किसानों को सचिवालय में जाने से रोका तो पीड़ितों ने जीटी रोड पर ही अपना डेरा जमा लिया और विरोध प्रकट किया। इस दौरान काफी देर तक पुलिस और ग्रामीणों में तकरार होती रही। किसान चंडीगढ़ जाने को लेकर अड़े रहे तो प्रशासन किसानों को रोकने में लगा रहा। बाद में तहसीलदार श्याम लाल और एसडीएम योगेश कुमार ने पीड़ितों को सीएम से मिलवाने का आश्वासन दिया तो किसान फिरा भी नहीं माने। इसके बाद एसडीएम योगेश कुमार ने चकबंदी पीड़ित संयोजक प्रदीप कालरम की सीएम ओएसडी भूपेश्वर दयाल से फोन पर बाद करवाई। करीब चार बजे ओएसडी से बात होने के बाद ही किसान वापस गांव लौटे। इस दौरान मैनपाल राणा, हेम सिंह राणा, जयपाल शर्मा, ईश्वर जोगी, सतपाल मराठा, जलसिंह राणा, माईचंद, रतन सैणी, रूहला सिंह अमृतपुरखुर्द, राजबल राणा भरतपुर, अकल सिंह, नकली सिंह, महीपाल सिंह, जगदीश चंद्र सैनी, नरेश पंडित अमृतपुरकलां सहित अन्य लोग भी परिवारों सहित मौजूद रहे।

किसानों का कहना
पीड़ित किसानों का आरोप है कि प्रशासन के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और भू-माफियाओं द्वारा गलत तरीके से भूमि के रिकार्ड से छेड़छाड़ कर गरीब किसानों की जमीनों पर कब्जा किया गया है, जिससे किसान बेरोजगार हो गए हैं। किसानों का कहना है कि पूर्व उपायुक्त जे. गणेशन के नेतृत्व में पूरे मामले की जांच कई माह पहले करके रिपोर्ट रोहतक कमिश्नर को भेज दी गई थी। परंतु रोहतक कमिश्नर द्वारा कई माह बीतने के बाद भी कोई फैसला नहीं सुनाया गया, उन्हें हर बार केवल तारीख पे तारीख दी जा रही है। चकबंदी पीड़ितों के संयोजक प्रदीप कालरम ने बताया कि प्रशासन द्वारा तारीख का सिलसिला पिछले तीन-चार साल से चल रहा है।

किसानों को उम्मीद थी कि पूर्व डीसी जे गणेशन की रिपोर्ट को मद्देनजर रखते हुए कमिश्नर किसानों के हित में भ्रष्टाचार से की गई तकसीम को रद्द करेंगे और पुराने कब्जे बहाल करेंगे। लेकिन आखिरी तारीख 22 सितंबर को भी कमिश्नर नहीं आए और उन्हें आगामी तारीख 27 अक्तूबर दे दी गई। इसके विरोध स्वरूप किसानों ने 22 सितंबर को एसडीएम योगेश कुमार को मामले को लेकर 26 सितंबर सीएम आवास चंडीगढ़ कूच करने का ज्ञापन भी सौंपा था। प्रदीप ने बताया कि किसान अपनी जमीन पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासन द्वारा जानबूझकर मामले को लटकाया जा रहा है।

6 ट्रैक्टर-ट्रालियां पहुंची अंबाला
चकबंदी से पीड़ित किसानों के परिवारों ने 42 ट्रैक्टर ट्रालियों में महिलाओं और बच्चों सहित अपना सामान लेकर चंडीगढ़ की ओर कूच किया। इनमें से अलसुबह ही छह ट्रैक्टर ट्राली पहले आगे चले गए। जिन्हें आगे की व्यवस्था देखनी थी, जबकि 36 ट्रालियों के लोगों को पुलिस ने यहीं रोक लिया। बाद में ग्रामीणों ने उनको वापस आने के लिए कहा। लोगों को रात्रि पड़ाव अंबाला में करना था, मंगलवार सुबह सभी को चंडीगढ़ की ओर कूच करना था।

सर्विस रोड के बीच ही बैठ गई महिलाएं
चकबंदी से पीड़ित महिलाओं में भी काफी गुस्सा दिखाई दिया। जब पुलिस द्वारा पीड़ितों को रोका गया तो महिला सर्विस लेन के बीचोबीच सड़क पर ही बैठ गई। महिला कविता रानी, वीनिता, भरतो देवी, रोशनी, शकुंतला ने बताया कि बहुत इंतजार कर लिया प्रशासन का अब उनसे और बर्दाश्त नहीं होगा। अब वह सीएम से ही अपनी मांगों की गुहार लगाएंगी।

न्याय दो या मौत दे दो के लगाए नारे
ट्रैक्टर ट्रालियों में सवार पीड़ित किसानों ने निर्मल कुटिया पर रूककर जमकर नारे लगाए। महिलाओं और बूढ़ों ने खट्टर साहब-न्याय दो, न्याय नहीं तो मौत दे दो के नारे लगाए। वहीं लोगों ने एसपी और डीसी जिंदाबाद के नारे भी लगाए।
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ये हैं किसानों की मांगें
1. पूर्व उपायुक्त जे गणेशन की रिपोर्ट को मद्देनजर रखते हुए तकसीम को तुरंत रद्द किया जाये और किसानों द्वारा अपनी खरीदी हुई जमीन को वापस दिया जाये।
2. जिस अधिकारियों व लोगों ने रिकार्ड में कटिंग, ओवरराइटिंग, भ्रष्टाचार व फ्राड किया है, उन सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाये।
3. जब तक चकबंदी मामले का फैसला नहीं होता तब तक जो जमीन खाली पड़ी है उसको खेती करने के लिए किसानों को दिया जाए।
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