- रोग प्रतिरोधक होने के साथ-साथ जलवायु अनुकूल हैं ये प्रजातियां
- इस वर्ष अब तक गेहूं व जौ की नई किस्मों की संख्या हुई 16
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। गेहूं और जौ की आठ नई प्रजातियां रिलीज कर दी गई हैं। ये प्रजातियां रोग प्रतिरोधक होने के साथ-साथ जलवायु अनुकूल भी हैं। अगस्त माह में भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) करनाल की अध्यक्षता में उदयपुर के महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में देशभर के गेहूं एवं जौ अनुसंधानकर्ताओं की कार्यशाला में एक जौ की किस्म सहित आठ नई किस्मों को रिलीज किया गया था, लेकिन संस्थान की सिफारिश पर इस पर फिर पुनरविचार किया गया है। इसके बाद आठ और नई किस्मों को चयनित (रिलीज) कर दिया गया है। इसमें एक जौ की किस्म भी शामिल है, एक किस्म का विस्तार भी कर दिया गया है। यानी कुल मिलाकर इस साल गेहूं की 16 नई किस्में देश के किसानों को समर्पित की गई हैं।
आईसीएआर-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) करनाल के निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने बुधवार को बताया कि एचडी- 3386, डब्ल्यूएच-1402, एचडी-3388, सीजी-1040, डीबीडब्ल्यू-327, एमपी-1378 व डीबीडब्ल्यू-359 और जौ की प्रजाति डीडब्ल्यूआरबी - 219 आदि किस्मों को उदयपुर में हुई कार्यशाला में इस साल चयनित किया गया था। कुछ प्रजातियों का क्षेत्र विस्तार भी किया गया था, लेकिन इसके बाद एक बार फिर उन्होंने कुछ और बेहतर प्रजातियों व जलवायु अनुकूलन प्रजातियों पर विचार करने के लिए पत्र लिखा था। जिस पर दोबारा विचारविमर्श कर आठ और नई प्रजातियां देश को समर्पित की गई हैं।
इनमें जीडब्ल्यू-547, डीबीडब्ल्यू-350, एमजी-1378, एचआई-1665, एनआईएडब्ल्यू-4028, यूएएस0478 और एचआई-8840 शामिल हैं, डीबीडब्ल्यू-377 का अगेती व उच्च उर्वरता दशा के लिए विमोचन किया गया है, जिसका क्षेत्र विस्तार भी किया गया है। साथ ही जौ की एक नई प्रजाति जीडब्ल्यू-327 भी चयनित कर ली है। निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि इनमें उत्तर पश्चिमी मैदानी भागों में सिंचित व समय से बुवाई के लिए गेहूं की एचडी 3386, सीमित सिंचाई के लिए डब्ल्यूएच 1402, जौ की डब्ल्यूआरबी 219 की पहचान की गई है।
उद्यमियों, एफपीओ को भी मिलेगा बीज
आईआईडब्ल्यूबीआर करनाल के निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि सभी कृषक उत्पाद संगठनों (एनओ) और पहली बार निजी बीज उत्पादकों को भी बीज दिया जाएगा। मध्य सितंबर माह में गेहूं की नवीनतम किस्मों जैसे डीबीडब्ल्यू 370 डीबीडब्ल्यू 371, सीबीडब्ल्यू 372 डीबीडब्ल्यू 316 एवं डीबीडब्ल्यू 55 का लाइसेंस देना शुरू किया जाएगा। शुरुआत में 25 सितंबर तक लाइसेंस लेने, अनुबंध करने वालों को चार क्विंटल बीज दिया जाएगा। इसके बाद लाइसेंस लेने व अनुबंध करने वालों को दो क्विंटल बीज दिया जाएगा।
किसानों के लिए 15 को खुलेगा पोर्टल
बीज लेने के लिए संस्थान का बीज पोर्टल 15 सितंबर 2023 को खुलेगा। किसान इस पोर्टल पर जाकर अपने आधार कार्ड की सहायता से पंजीकरण कर सकते हैं। इस बार किसान एक किस्म की बजाय दो किस्मों के बीच चुन सकते हैं। किसानों को 10 किग्रा बीज, 5 किग्रा बीज की पैकिंग में पहले आओ-पहले पाओ के सिद्धांत पर बीज दिया जाएगा।
इन किस्मों का बीज मिलेगा
प्रति पंजीकरण 10 किग्रा को पैकिंग में गेहूं की किस्म डीबीडब्ल्यू 187, डीबीडब्ल्यू 303, डीबीडब्ल्यू 222, डीबीडब्ल्यू 332, डीबीडब्ल्यू 296, डीडीडब्ल्यू 58 और एक जौं की किस्म डीडब्ल्यूआरबी 137 का बीज वितरित किया जाएगा। इसके अलावा पांच किलो की पैकिंग में डीबीडब्ल्यू 327, डीबीडब्ल्यू 370, डीबीडब्ल्यू 371 डीबीडब्ल्यू 372 व डीबीडब्ल्यू 316 का बीज किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। बीज का मूल्य 50 रुपये प्रति किलो ग्राम होगा।
वर्जन
नई गेहूं व जौ की किस्में रोग प्रतिरोधक होने के साथ साथ जलवायु परिवर्तन की अनुकूलता के साथ रिलीज की गई हैं। पोर्टल पर अधिसूचित किस्मों के अलावा नई किस्मों का बीज तैयार करना शुरू किया जाएगा जो अगले साल तक किसानों को दे दिया जाएगा। संस्थान ने जैविक खेती के साथ साथ प्राकृतिक खेती पर भी कार्य शुरू किया है। संस्थान के पास अभी बीज भंडारण की क्षमता 10 हजार क्विंटल है, जिसे 15 हजार क्विंटल करने की तैयारी है। करनाल, मेरठ, हिसार में जमीन ली है, एनडीआरआई के निदेशक को अभी और जमीन देने के लिए लिखा है, जिससे बीज उत्पादन बढ़ सके।
- डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, निदेशक, भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान केंद्र, करनाल