- छह रुपये प्रति किलो की लागत से कर रहे पैदावार
- मार्केट में तीन से चार रुपये में बिक रहा आलू, लगातार तीसरे साल में भी नुकसान
- कोल्ड स्टोर में रखने के दो रुपये प्रति किलो अलग से देने होंगे
- प्रदेश भर में 33427 हेक्टेयर में 913380 मीट्रिक टन आलू उत्पादक किसानों पर मंदी का की मार
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। डिमांड कम और सप्लाई ज्यादा होने के साथ कोल्ड स्टोर के खर्च ने आलू के रेट गिरा दिए हैं। किसान खेत में पांच से छह रुपये प्रति किलो की लागत से उगने वाला आलू अब बाजार में एक से दो रुपये प्रति किलो में बेचने को मजबूर हैं। ये हालात तीन साल से लगातार बनते आ रहे हैं। इससे प्रदेश भर में 33427 हेक्टेयर में 913380 मीट्रिक टन आलू उत्पादक किसानों पर मंदी का संकट बना हुआ है।
हालांकि किसानों का संकट देख खरीद का करार करने वाली कपंनियों ने अपना वादा निभाने की बात कही है। वे अब वापस किसानों से 80 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से आलू खरीदेंगी। जबकि कुछ दिन पहले कंपनी का कहना था कि वे केवल 40 क्विंटल आलू ही खरीदेंगी। दूसरी ओर अब जब तक यहां के आलू कोल्ड स्टोरेज में नहीं जाते तब तक इनका रेट मंदा होने के आसार बने रहेेंगे। कोल्ड स्टोर में जाने के बाद आलू के रेट बढ़ने की संभावना है।
नई सब्जी मंडी में आढ़ती कश्मीरी लाल ने बताया कि मंडी में आलू का रेट 130 रुपये से लेकर 150 रुपये प्रति कट्टे की दर से बिक रहा है। एक कट्टे में करीब 50 किलो आलू होता है। यानी आलू तीन से चार रुपये प्रति किलो थोक का रेट है। पिछले दिनों बबैन और पिपली मंडी में 30 रुपये कट्टा तक आलू बिका था। इससे किसान से लेकर आढ़ती तक नुकसान झेल रहे हैं। जबकि किसान की लागत पांच से छह रुपये प्रति किलो तक जा रही है।
कोल्ड स्टोर में रखने में भी असमंजस
आढ़ती बताते हैं कि अगर आलू को कोल्ड स्टोर में रखा तो इसका किराया 170 रुपये प्रति कट्टा होता है। जबकि 20 रुपये से लेकर 30 रुपये कट्टे के हिसाब से ट्रांसपोर्ट लग जाती है। यानी 200 रुपये प्रति कट्टा महंगा होगा। अगर किराए के बाद भी आलू का रेट नहीं बढ़ा तो किसानों और आढ़तियों के लिए बहुत बड़ा नुकसान का सौदा होगा। इस वजह से अब तब किसान और आढ़ती कोल्ड स्टोर में आलू रखने में संकोच कर रहे हैं।
जींद में 1198 हेक्टेयर में 29328 मीट्रिक टन आलू का उत्पादन
प्रदेश भर में 33427 हेक्टेयर जमीन पर 913380 मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हो रहा है। इनमें सबसे ज्यादा आलू का उत्पादन कुरुक्षेत्र में 13772 हेक्टेयर में 365690 मीट्रिक टन का है जबकि दूसरे नंबर पर यमुनानगर में 6010 हेक्टेयर में 162500 मीट्रिक टन है। करनाल में तीसरे नंबर पर आलू का उत्पादन 3500 हेक्टेयर में 144300 मीट्रिक टन में हो रहा है। इसके बाद अंबाला में 3236 हेक्टेयर में 72436 मीट्रिक टन है। पानीपत में 1400 हेक्टेयर में 30040 मीट्रिक टन तो जींद में 1198 हेक्टेयर में 29328 मीट्रिक टन आलू का उत्पादन है। मेवात में आलू उत्पादन शून्य है। बाकी जिलों में 61 से लेकर 871 हेक्टेयर में ही आलू उगाए जा रहे हैं।
आलू की डिमांड बहुत कम थी। इसी वजह से इस पर कंपनी की ओर से विचार किया गया कि आलू आधा खरीद लें। जब डिमांड बढ़ेगी तो ज्यादा आलू खरीद लिया जाएगा लेकिन किसानों की हालत को देखते हुए कंपनी ने अपने करार के अनुसार ही पूरा 80 क्विंटल की दर से आलू खरीदने का फैसला किया है। ये फैसला पूरे हरियाणा के आलू उत्पादक किसानों के हित में लिया गया है।
- गुरनाम सिंह, मैनेजर, गुड रिच कंपनी
अब आलू की डिमांड कम और सप्लाई ज्यादा होने से आलू के दाम गिरे हैं। एक बार आलू कोल्ड स्टोर में पहुंचना शुरू हो गया तो उम्मीद है कि रेट बढ़ने लगेंगे।
- डॉ. प्रदीप सिंह, एमएचयू