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खुशी से झूमे किसान, बांटे लड्डू, ढोल की थाप पर मनाया जश्न

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संवाद न्यूज एजेंसी
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घरौंडा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुरुनानक देव जी के प्रकाशोत्सव के मौके पर संबोधन में जैसे ही तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का एलान किया गया, किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। किसानों ने इसे संघर्ष की जीत बताते हुए कहीं आतिशबाजी की तो कहीं लड्डू बांटे। किसान नेताओं ने बसताड़ा टोल प्लाजा पर लड्डू बांटकर खुशी मनाई।
शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में किसान बसताड़ा टोल प्लाजा पर एकत्रित होने शुरू हो गए और 11 बजे तक सैकड़ों की तादाद में किसानों ने टोल पर एकत्रित होकर किसान एकता के नारे लगाए। किसानों ने इस फैसले को ज्यादा देर से लिया फैसला करार दिया। हालांकि किसान नेताओं के इस जीत को आधी जीत बताया।
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किसान नेता जगदीप औलख, जिलाध्यक्ष अजय राणा, अनिल कादियान, राजेंद्र आर्य आदि नेताओं का कहना है की लंबे संघर्ष के बाद किसानों की जीत अवश्य हुई है लेकिन किसान नेताओं को इस सरकार पर बिल्कुलभरोसा नहीं है। जब तक इन तीनों कानूनों को संसदीय शीतकालीन सत्र में पूरी तरह से रद्द नहीं किया जाता और किसानों को सरकार की तरफ से कोई लिखित में नहीं दिया जाता है, तब तक ये पूरी तरह से किसानों की जीत नहीं मानी जा सकती है।
किसान नेता बोले-इसके इलावा भी किसानों की और भी मांगें हैं, जो सरकार को पूरी करनी हैं। जैसे फसलों पर एमएसपी की गारंटी, आंदोलन के दौरान शहीद हुए करीब 700 किसानों को शहीद का दर्जा देने, मृतक किसानों के परिवारों को नौकरी व आर्थिक मुआवजा आदि शामिल हैं। जिनको सरकार को मानना ही होगा, तब जाकर किसानों को इस सरकार पर भरोसा होगा।
सयुंक्त मोर्चा के आदेश के बाद उठेगा धरना
घरौंडा। टोल प्लाजा पर पिछले एक साल से धरने पर बैठे किसान नेताओं ने कहा कि हालांकि सरकार ने कृषि कानून वापस लेने की घोषणा कर दी है, लेकिन टोल पर तब तक उनका धरना प्रदर्शन जारी रहेगा, जब तक संयुक्त किसान मोर्चा के बड़े नेताओं का आदेश प्राप्त नहीं हो जाता, क्योंकि दिल्ली बॉर्डर पर किसान नेताओं की बैठकों के दौर शुरू हो चुके हैं और अभी सरकार से और भी मांगें मनवानी हैं, ऐसे में सरकार पर अभी दबाव बनाना जरूरी है। संवाद
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कर्मचारियों ने की टोल की सफाई, किसानों ने रुकवाया
घरौंडा। बसताड़ा टोल अधिकारियों को जैसे ही कृषि कानून वापस लेने की सूचना मिली उन्होंने अपने कर्मचारियों को टोल बूथों की सफाई करवाने पर लगा दिया। टोल कर्मचारी जेसीबी द्वारा टोल पर रखे बड़े-बड़े पत्थरों को सीधा करने में जुट गए। जैसे ही टोल पर इसकी भनक किसानों को लगी तो वे टोल बूथों पर पहुंच गए और हंगामा शुरू कर दिया। किसान टोल अधिकारियों के कार्यालय तक पहुंच गए और चेतावनी दी कि जब तक किसान नहीं चाहेंगे, टोल चालू नहीं होगा, क्योंकि अभी कृषि कानून पूरी तरह वापस नहीं हुए हैं। बसताड़ा टोल प्लाजा पर पिछले एक साल से किसान धरना दे रहे हैं। किसानों ने टोल को तभी से फ्री करा रखा है। संवाद
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