माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। हरियाणा सरकार की ओर से इलेक्ट्राॅनिक कांटे से खरीद करने के आदेश के बावजूद मंडियों में पुराने कांटे ही प्रयोग हो रहे हैं। भाकियू कार्यकर्ताओं ने इसके विरोध में मंगलवार को करनाल मार्केट कमेटी पर धरना दिया। तीन गेट पर तालाबंदी कर दी। इससे करीब 3 घंटे तक मंडी में आवागमन बंद रहा। मंडी प्रशासन ने 5-10 दिन में इलेक्ट्राॅनिक कांटे शुरू कराने का आश्वासन दिया तो किसानों ने ताले खोले।
हरियाणा सरकार और किसान चाहते हैं कि मंडियों में धान खरीद इलेक्ट्राॅनिक कांटे से हो लेकिन आढ़ती व उनके मजदूर इसमें आनाकानी कर रहे हैं। भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान के साथ मंगलवार को सुबह 11 बजे किसानों के साथ करनाल अनाज मंडी पहुंचे और मार्केट कमेटी कार्यालय गेट पर धरना शुरू कर दिया। विरोध प्रदर्शन करने लेकिन जब कोई मंडी अधिकारी मौके पर नहीं आया तो नाराज किसानों ने मंडी के तीन मुख्य गेट पर ताले लगा दिए, जिससे मंडी में आवागमन बाधित हो गया।
जानकारी पर मंडी सचिव आशा गोंदर व मंडी विपणन निरीक्षक ईश्वर सिंह राणा ने पहले करनाल अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान सुरिंद्र त्यागी व उनकी टीम के साथ बातचीत की। इसके बाद किसानों के धरने पर आए और किसानों से बात की। मंडी विपणन निरीक्षक ने किसानों को इलेक्ट्रॉनिक कांटे लगवाने का आश्वासन दिया। दोपहर करीब तीन बजे किसानों ने गेट से ताले खोले। महताब कादियान, सुरिंद्र सागवान, दिलावर सिंह, धनेत्तर राणा, जोगिंद्र झिंडा, विनोद राणा, जोगिंद्र बस्तली, रामफल नरवाल आदि प्रदर्शन में शामिल रहे।
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किसान को पूरा भाव न मिले तो भाकियू करेगी भरपाई
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने एलान किया कि किसी भी अनाज मंडी में किसानों को यदि 2,389 रुपये से कम भाव मिल रहा है तो वह संगठन को बताएं। भाकियू उन किसानों को भरपाई करेगी। किसानों को एमएसपी का पूरा भाव दिलाएगी। -
अब तक 4.33 लाख क्विंटल की खरीद, बारिश से दिक्कत
- जिले में मंगलवार को एक लाख 28 हजार 820 क्विंटल धान की खरीद हुई। अब तक की कुल खरीद चार लाख 33 हजार 400 क्विंटल हो गई है। इसमें से अब तक 24 हजार 810 क्विंटल धान का उठाना कराया जा सका है, जबकि खरीदा गया 4 लाख 8 हजार 590 क्विंटल धान मंडियों में ही पड़ा है। मंगलवार को दोपहर 2 बजे करीब अचानक शुरू हुई बारिश से खलबली मच गई। किसानों ने आढ़तियों से तिरपाल आदि लेकर सूखने के लिए फैले धान पर डालना शुरू किया। आढ़तियों ने भी श्रमिकों को तिरपाल डालने में लगाया। फैले धान को एकत्र कराया गया। बारिश हल्की ही हुई, जिसके कारण कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।