करनाल। हरियाणा सिविल मेडिकल एसोसिएशन (एचसीएमएस) के बैनर तले शुक्रवार को जिलेभर के 160 डॉक्टर हड़ताल पर रहे। वहीं शुक्रवार को एनएचएम कर्मी भी अपनी चार दिवसीय हड़ताल पर चले गए। सिसे दूसरे दिन जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी घटकर आधी 966 रह गई। यहां मरीज बेहाल रहे। हालांकि कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी व इमरजेंसी पर अधिक असर नहीं पड़ा क्योंकि हड़ताल की पूर्व सूचना के कारण अधिकतर मरीज घर से कम ही निकले।
एचसीएमएस से संबंधित डॉक्टरों व एनएचएम कर्मियों की हड़ताल के कारण जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी पर दूसरे दिन काफी असर देखने को मिला। जहां सामान्य दिनों में नागरिक अस्पताल की ओपीडी 2100 से 2300 के बीच में रहती थीं वहां पर पहले दिन 1353 तो दूसरे दिन 966 की ओपीडी रह गई। इसके अलावा दूसरे दिन इमरजेंसी का कार्यभार पूर्व सीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार ने संभाला।
उनकी देखरेख में एमओ ने इमरजेंसी के आने वाले केसों को देखा। इसी दौरान ओपीडी में सर्पदंश से पीड़ित एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की को अपनी गोद व कंधे में उठाए हुए एक दंपती पहुंचा। ओपीडी में जाने के बाद उन्हें पता चला कि आज डॉक्टरों की हड़ताल है। किसी स्टाफ ने बताया कि आज ओपीडी में इसका इलाज ओपीडी व इमरजेंसी में नहीं होगा। ऐसे में दंपती नाबालिग बेटी को फिर से गोद में उठाकर ट्रामा सेंटर में भागे। गनीमत ये रही कि वहां पर डॉक्टर मौके पर बैठे हुए थे। इसके बाद उसका इलाज शुरू किया जा सका।
डॉक्टरों की हड़ताल को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार स्वयं नागरिक अस्पताल में पहुंचे और अपनी विशेषता अनुसार ईएनटी की ओपीडी की संभाली। वहीं पीएमओ डॉ. बलवान सिंह ने छाती रोग विशेषज्ञ की ओपीडी संभाली। दोनों ने अपनी-अपनी ओपीडी में आने वाले प्रत्येक मरीज की जांच की। वहीं अस्पताल का राउंड लेकर कंसलटेंट को ज्यादा से ज्यादा ओपीडी करने के निर्देश दिए। इसके अलावा आयुर्वेद डॉक्टर को एलोपैथ ओपीडी में बैठाया। जहां पर आयुर्वेद डॉक्टर ने आयुर्वेद ओपीडी के साथ-साथ एलौपैथ ओपीडी में आने वाले मरीजों को इलाज किया।
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ब्लड बैंक पर दिखा हड़ताल का असर
डॉक्टरों की हड़ताल का असर नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक पर देखने को मिला। जहां सामान्य दिनों में रोजाना 30-35 यूनिटों की खपत रहती थीं वहां हड़ताल के पहले दिन आठ और दूसरे दिन छह यूनिट रक्त जारी किया। इनमें मात्र एक-दो यूनिट को छोड़कर अन्य निजी अस्पतालों के डिमांड पर यूनिट जारी की गई। इसके अलावा नागरिक अस्पताल में पहुंच रहे अधिकतर मरीजों की दवाएं सिर्फ रिपीट की जा रही है। सिर्फ कंसलटेंटों द्वारा ही मरीज का मर्ज समझकर दवाइयां स्लीप पर लिखी जा रही है।
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लेबर रूम व ऑपरेशन रहे ठप
डॉक्टरों व एनएचएम कर्मियों की हड़ताल के कारण लेबर रूम व ऑपरेशन थियेटर ठप पड़े है। हड़ताल के पहले दिन पूरे दिन में मात्र दो डिलीवरी हुई वहीं दूसरी दिन एक भी डिलीवरी नहीं हो पाई। वहीं ओटी में पहले दिन दो ऑपरेशन होने थे लेकिन वे नहीं हो पाए। इसके अलावा दूसरे दिन हड़ताल के कारण किसी भी डॉक्टर द्वारा ओटी का शेड्यूल नहीं भेजा तो ऐसे में दूसरे दिन ओटी पूरी तरह से ठप रही।
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जांच नहीं, सिर्फ रिपीट हुई दवा
पक्काखेड़ा गांव निवासी बलबीर कौर ने बताया कि उसकी आंखों में दर्द रहता है। वह 100 रुपये खर्च कर नागरिक अस्पताल में पहुंची लेकिन यहां आकर पता चला कि ओपीडी में डॉक्टर नहीं है। उसने जैसे-तैसे करके पंजीकरण करवाया। जब ओपीडी में पहुंची तो डॉक्टर ने मशीनों से आंख की जांच किए बिना ही पर्ची पर दवा लिख दी।
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नहीं हुई घुटनों की जांच
असंध निवासी महिंद्र कौर ने बताया कि उसके कई दिनों से घुटनों में दर्द हो रहा था तो उसकी जांच कराने के लिए सुबह आठ बजे ही नागरिक अस्पताल आ गई थी लेकिन पंजीकरण कराने के बाद पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर है। ऐसे में उसे ओपीडी में बैठे हुए चार घंटे बीत चुके है। ऐसे में लग रहा है कि बिना इलाज किए ही घर जाना पड़ेगा।
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डॉक्टरों की प्रमुख मांगें
डॉक्टरों के लिए एक विशेषज्ञ कैडर का गठन। गतिशील सुनिश्चित कॅरिअर प्रगति (एसीपी) योजना लागू हो। एसएमओ की सीधी भर्ती पर तुरंत रोक लगाई जाए। पीजी के लिए बॉन्ड राशि एक करोड़ से 50 लाख किए जाने की मांग। ग्रामीण क्षेत्रों को दूरस्थ घोषित कर पीजी कोटा बहाल करने की मांग। डॉक्टरों के लिए पीजी कोटा। विशेषज्ञ के लिए अतिरिक्त इंसेटिव। डॉक्टर की 10 साल में प्रमोशन। जल्द पीजी पॉलिसी बनाने की मांग।