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अनाज मंडी में साढ़े पांच करोड़ के फर्जी गेटपास काटे

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अनाज मंडी करनाल में मार्केट कमेटी ने प्रवेश द्वारों पर आठ निजी कर्मचारी रखकर बिना धान आए ही 5.42 करोड़ रुपये के 25,724 क्विंटल धान के ऑनलाइन फर्जी गेटपास काट दिए हैं। अमर उजाला में छपी फर्जी गेटपास जारी होने की आशंका की खबर के बाद आईएएस एसडीएम आयुष सिन्हा द्वारा की गई जांच में यह सामने आया है। एसडीएम के निर्देश पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के मंडी निरीक्षक की तहरीर पर सिटी थाने में करनाल अनाज मंडी के सचिव, आठ प्राइवेट कर्मचारी को नामजद कर धोखाधड़ी, साजिश रचने जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसमें 20 अज्ञात आढ़तियों के शामिल होने की बात भी कही जा रही है। इससे जिलेभर की अनाज मंडियों व आढ़तियों में खलबली मची है। क्योंकि फर्जी गेटपास के मामलों की जांच जिलेभर की सभी अनाज मंडियों में कराई जा रही है।
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तीन नवंबर को आईएएस एसडीएम आयुष सिन्हा ने देर शाम अनाज मंडी करनाल पहुंचकर फर्जी गेटपास जारी करने की जांच शुरू की थी। जिसमें देखा गया था कि रात में मंडी के कांटों पर धान लेकर तो कोई किसान सीसीटीवी में दिखाई नहीं दे रहा लेकिन सभी गेटों से ऑनलाइन गेटपास जारी किए गए हैं। जिससे प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध लगा तो जांच शुरू की गई। जिसमें पाया गया कि अनाज मंडी करनाल में बिना धान आए ही ऑनलाइन 294 गेटपास काट दिए गए हैं। जिन पर 28724 क्विंटल धान आना दर्शाया गया है। जांच की तो पता चला कि ई-खरीद पोर्टल की आईडी व पासवर्ड मार्केट कमेटी सचिव सुंदर सिंह कांबोज के पास ही था। उन्होंने गेट नंबर-1 पर प्राइवेट कर्मचारी विनोद व सन्नी, तुषार व बलवीर, गेट संख्या-3 प्रिंस व निखिल और अंकुश व अंकित को आईडी व पासवर्ड देकर ऑनलाइन गेटपास जारी करने के काम में लगाया था। सचिव व सभी आठ प्राइवेट कर्मियों ने सरकारी पोर्टल की आईडी व पासवर्ड का गलत इस्तेमाल किया। मंडी निरीक्षक समीर वशिष्ठ ने बताया कि फर्जी गेटपास पर धान खरीद के मामले में करीब 20 आढ़ती शामिल हैं। आशंका है कि बिना धान आए हैं कि किन्हीं और किसानों का धान दर्शाकर गेट पास जारी किए गए हैं।
जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक निशांत राठी ने बताया कि उप मंडल अधिकारी करनाल के आदेश पर मंडी निरीक्षक समीर वशिष्ठ ने मंडी सचिव सुंदर सिंह, आठ प्राइवेट कर्मियों व संबंधित आढ़तियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
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नाम जानने को देर रात तक बजते रहे फोन
एफआईआर में मार्केट कमेटी सचिव सुंदर सिंह व आठ अन्य प्राइवेट कर्मचारियों को तो नामजद किया है, लेकिन दूसरे कालम में संबंधित आढ़ती लिखा है। हालांकि मंडी निरीक्षक समीर वशिष्ठ ने बताया कि एफआईआर के साथ संलग्न जांच रिपोर्ट में 20 आढ़तियों के नाम हैं। लेकिन एफआईआर में आढ़तियों के नाम न होने के कारण मंडी के सभी आढ़तियों में खलबली मची है, किस किसका नाम है यह जानने को देर रात फोन बजते रहे। विभागीय अधिकारियों, मंडी प्रधान, मार्केट कमेटी अधिकारियों से भी लोग संपर्क साधते रहे।
मामला फर्जीगेट पास नहीं, एडजस्टमेंट का है
यह धोखाधड़ी या फर्जी गेटपास का मामला नहीं बल्कि एडजस्टमेंट का मामला है। उदाहरण के तौर पर किसी किसान के पास दस एकड़ का धान है, पोर्टल में दो एकड़ ही दर्ज किया गया, किसान पूरा धान लेकर आया तो उसका जो शेष आठ एकड़ का धान बचा, उसका एडजस्टमेंट हरियाणा या यूपी के अन्य किसानों के नाम पर करके उसका पूरा धान खरीदा जाता है, ताकि किसान को अपना धान मंडी से वापस न ले जाना पड़े। मामले की बारीकी से जांच होनी चाहिए।
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-रजनीश चौधरी, चेयरमैन हरियाणा अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन
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