संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। घुटनों के जोड़ों में गैप या ऑस्टियोऑर्थराइटिस की समस्या लोगों में तेजी से बढ़ती जा रही है।
घुटनों के जोड़ों में गैप आने का सबसे बड़ा कारण अधिक वजन, बढ़ती उम्र, चोट या किसी पुरानी बीमारी के कारण हड्डियों की कमजोरी हो सकता है।
जिन लोगों का वजन अधिक होता है, उनके घुटनों पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ता है, जिससे घुटनों के बीच में जो मूवमेंट के लिए कार्टिलेज होता है वह जल्दी घिसने लगता है और हड्डियां आपस में रगड़ खाने लगती हैं।
इसके अलावा, उम्र बढ़ने के साथ हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे घुटनों का संतुलन बिगड़ जाता है और दोनों हड्डियों के बीच का जोड़ टेढ़ा हो जाता है।
उन्होंने बताया कि युवाओं में भी यह समस्या ज्यादा बनी हुई है जिसमें कि कई बार किसी दुर्घटना, खेल-कूद या ज्यादा वर्कआउट के कारण युवाओं के घुटनों में चोट लग जाती है, जिससे यह समस्या उत्पन्न होती है। उन्होंने बताया कि इसमें ज्यादातर लोग किसी खेल से जुड़ा या जिम करने वाला व्यक्ति होता है। जिला नागरिक अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. कार्तिक के अनुसार ओपीडी में रोजाना करीब 300 मरीज ऐसी समस्या को लेकर पहुंचे रहे हैं जिनमें ज्यादातर महिलाएं और खेलकूद में भाग लेने वाले युवा शामिल हैं।
कई मरीज लंबे समय से इस परेशानी को झेलते रहते हैं, जब दर्द असहनीय हो जाता है तब ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। कई ऐसे मरीज भी आते हैं, जिन्हें सालों से यह समस्या थी। लेकिन इलाज नहीं करवाया। डॉ. कार्तिक बताते हैं कि घुटनों के जोड़ों में गैप की समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है। इसके पहले और दूसरे चरण में यदि मरीज समय रहते डॉक्टर से संपर्क कर ले तो एक्सरसाइज और सामान्य दवाओं से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। तीसरे चरण तक पहुंचने पर भी दवाइयों और थेरेपी से थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन चौथे चरण में समस्या पहुंच जाए तो मरीज पूरी तरह चलने-फिरने में असमर्थ हो जाता है और लाखों रुपये का ऑपरेशन करवा घुटने बदलवाना ही एकमात्र उपाय बचता है।
उन्होंने बताया कि मरीज अपने बजट के हिसाब से अलग-अलग धातुओं के घुटने डलवाने पर मजबूर हो रहे हैं। जिसमें टाइटैनियम धातु का घुटना बदलवाने पर करीब 70 से 80 हजार रुपये का खर्च, गोल्ड प्लेटिड घुटना बदलवाने पर एक लाख रुपये तक और स्टेनलेस स्टील का घुटना बदलवाने पर 30 से 40 हजार रुपये का खर्चा आता है। अगर प्राइवेट अस्पताल में मरीज ये ऑपरेशन करवाता है तो लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। डॉ. कार्तिक ने बताया कि चौथे चरण पर पहुंचने वाले मरीजों को घुटनों में साल में एक बार आर्टिफिशियल कॉलाजिन नामक 10 हजार रुपये तक का महंगा इंजेक्शन लगवाना पड़ता है, जो घुटनों में ग्रीस बनाने का काम करता है। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड वालों का इलाज मुफ्त किया जा रहा है जिसमें हर साल करीब 30 मरीज इस बीमारी के चौथे चरण में पहुंच ऑपरेशन करवाने आते हैं।