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फर्जीवाड़ा : अठारह हजार अमीरों को बना दिया गरीब

Fri, 30 May 2014 01:24 AM IST
अमर उजाला, करनाल
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जिले के अठारह हजार अमीर लोग कागजों में गरीब की सूची में मिले हैं। ये लोग अधिकारियों से मिलीभगत करके बीपीएल बन गए और सरकार की लगभग प्रत्येक योजना का लाभ उठाया। 100-100 गज के प्लॉट से लेकर रीयल इस्टेट में रियायती दामों पर मिलने वाले प्लॉट भी ले चुके हैं।
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लड़की की शादी पर मिलने वाले 31 हजार रुपये और लोन जैसी सुविधा को भी डकार गए हैं। यह खुलाया बीपीएल कार्ड धारकों के हुए सर्वे में हुआ है। वर्ष 2007 के बाद तीसरी बार हुए अंतिम सर्वे के अनुसार प्रशासन की लिस्ट में जिले में बीपीएल के 18 हजार 852 कार्ड फर्जी पाए गए हैं जिनमें अधिकतर कोठी वाले गरीब बने हुए हैं। इतने बड़ी संख्या में फर्जी कार्ड बनाने वालों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है।

नियमों को तक पर रखकर बीपीएल कार्ड बनाने में प्रदेश के करीब 1200 कर्मचारी संलिप्त मिले हैं। ऐेसे कर्मचारियों की पहचान के लिए मुख्य सचिव एससी चौधरी ने सभी विभागों के प्रधान सचिवों को एडीसी से रिपोर्ट लेकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद संलिप्त कर्मचारियों के होश उड़ गए हैं और वे बचाव के तरीके ढूंढने में लगे हैं।
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जिले में बीपीएल परिवारों की पात्रता का री-सर्वे करवाया गया जिसके तहत शहरी क्षेत्र में 36 हजार 880 बीपीएल में से 7056 परिवार अपात्र पाए गए।

ग्रामीण क्षेत्र में 52 हजार 277 में से 11 हजार 796 बीपीएल परिवार अपात्र पाए गए हैं। इनके कार्ड बनाने में किन-किन कर्मचारियों और अधिकारियों की ड्यूटी थी, उनकी भी रिपोर्ट बन चुकी है। इस कार्ड पर लोन लेकर रियायती दामों पर किस्त के मुताबिक रकम चुका सकते हैं। ब्याज नाममात्र होता है।

लिस्ट के मुताबिक रोका हुआ राशन
फर्जी बीपीएल मिलने पर तुरंत प्रभाव से खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने राशन रोक लिया है। एक बीपीएल कार्ड धारक को 32 किलो गेहूं, नौ लीटर केरोसिन मिलता है। 18 हजार 852 कार्डों का राशन रुकने से लाखों रुपये की बचत हुई है। बीपीएल पात्रों की मांग है कि फर्जी कार्ड धारकाें से ब्याज सहित राशन की रकम लेनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई अन्य ऐसा फर्जी काम न कर सकें।
नहीं हो पा रही रिकवरी
फर्जी बीपीएल धारकों से रिकवरी करने की जिम्मेदारी एडीसी ऑफिस से खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को मिली है। ऐसे लोग रिकवरी देने से साफ मना कर रहे हैं, जिससे अफसरों की परेशानी बढ़ गई है। ये लोग कहते हैं कि कोठी बनाने में कर्ज चढ़ गया है। लोन लेकर कोठी बनाई है। इस स्थिति में सरकार के करोड़ों रुपये डूबते नजर आ रहे हैं।
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