करनाल। शहर में अब ट्रांसफार्मर के बजाय एक हजार केवी के सीएसएस (कॉम्पैक्ट सेकेंडरी सब स्टेशन) से बिजली आपूर्ति की जाएगी। इसके लिए आंबेडकर चौक से घंटाघर चौक तथा मुख्य बाजार से मीरा घाटी चौक तक आठ सीएसएस रखवाए जा चुके हैं।
करीब 10 किलोमीटर क्षेत्र में (एक्सएलपीई) एक सिंगल-स्ट्रैंडेड कॉपर कंडक्टर तार लग चुकी है। इस व्यवस्था से ट्रांसफार्मरों के बार-बार खराब होने की समस्या से छुटकारा मिलेगी और बिजली आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी। बिजली निगम की ओर से 36 करोड़ रुपये की लागत से शहर की बिजली लाइनों को भूमिगत करने का कार्य चल रहा है।
इसके लिए कर्ण पार्क, आंबेडकर चौक, घंटाघर चौक, पुरानी सब्जी मंडी, मुख्य बाजार व मीरा घाटी चौक के बीच के रास्ते में (प्लींथ) तैयार करके सीएसएस रखवाए जा चुके हैं। निगम की रिपोर्ट के अनुसार इस कार्य के लिए 90 प्रतिशत राशि खर्च की जा चुकी है। बकाया 10 प्रतिशत राशि जून माह के अंत तक खर्च कर परियोजना को धरातल पर लागू करने की योजना है।
एसडीओ ने बताया कि सीएसएस ट्रांसफार्मर से ज्यादा लोड उठाने की क्षमता रखते हैं। यह उपकरण बिजली के अधिक और कम वोल्टेज को नियंत्रित करने में सक्षम है।
इस परियोजना में आंबेडकर चौक से घंटाघर चौक, घंटाघर चौक से पुरानी सब्जी मंडी व कुंजपुरा रोड से जिला नागरिक अस्पताल तक, पुरानी सब्जी मंडी से मीरा घाटी चौक और वहां से मेरठ चौक तक की सभी खुली लाइनों को भूमिगत किया जाएगा। इस कार्य के लिए दिल्ली की गो पावर इलेक्ट्रिक कंपनी को टेंडर दिया गया है।
बारिश में लाइन नहीं होगी खराब : बाजार की मुख्य सड़कों पर खुली बिजली लाइन हटने से दुकानदारों व राहगीरों को तारों के जाल से निजात मिलेगी। वहीं बिजली निगम के कर्मचारियों को लाइन फाल्ट ढूंढ़ने में भी आसानी रहेगी। तारों के भूमिगत होने से आंधी व बारिश के मौसम में लाइन में खराबी आने की समस्या नहीं रहेगी। इस सुविधा से उपभोक्ताओं को बिजली के अघोषित कटों से राहत मिलेगी, क्योंकि खुली लाइन में ज्यादा फाल्ट आते हैं।
उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति निर्बाध व पूरी वोल्टेज मिलेगी। इस प्रोजेक्ट के तहत दो फीडर से बिजली आपूर्ति का विकल्प रहेगा। इसके लिए रिंगमेंन लगाए जाएंगे अगर कभी किसी फीडर से बिजली आपूर्ति में कोई बाधा आती है तो दूसरे फीडर से आपूर्ति की जा सकेगी। इससे उपभोक्ताओं को बिजली की खराबी की समस्या नहीं झेलनी पड़ेगी। संवाद