संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। बुढ़ापा पेंशन योजना की शुरूआत बुजुर्गों की आर्थिक सहायता के लिए की गई थी। इस योजना के तहत बुजुर्गों को तीन हजार रुपये की राशि प्रदान की जाती है। यही उनके बुढ़ापे का सहारा है। पेंशन लेने के लिए ही जिले के पेंशन विभाग में बुजुर्गाें को चक्कर काटने पड़ रहे हैं। बुजुर्गों का कहना है कि यहां के कर्मचारी उन्हें पेंशन देने के नाम पर यहां से वहां चक्कर कटवा रहे हैं। बुजुर्गों ने कहा कि उन्हें उनके हक का पैसा लेने के लिए भी परेशान किया जा रहा है।
केस 1
गांव रकनपुर से अपनी पेंशन के लिए आए 65 वर्षीय बुजुर्ग इशम सिंह ने बताया कि पेंशन उनकी पत्नी संतोष के नाम पर लगी हुई है। उनके आधार समेत अन्य पहचान पत्रों में उनका नाम इशम सिंह दर्ज है लेकिन वोटर कार्ड में इशमा नाम दर्ज कर दिया गया। इसी कारण उन्हें पेंशन नहीं मिल रही है। उन्होंने इस संबंध में एक एफिडेविट भी बनवाया है। पेंशन के संबंध में वे ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर के पास गए तो उन्होंने कहा कि पेंशन चालू है लेकिन फिर भी खाते में पैसे नहीं आ रहे हैं। वे चार महीने से विभाग के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए।
केस 2
नीलोखेड़ी की रहने वाली महिला लीला ने बताया कि विभाग के चक्कर काटते हुए उन्हें पांच महीने हो गए हैं। अभी तक उनकी पेंशन संबंधी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। लीला ने बताया कि उनका यूको बैंक में खाता है। उनकी पेंशन खाते में आ रही है लेकिन कुछ तकनीकी समस्या के कारण पेंशन उनके खाते से निकल नहीं पा रही है। उन्होंने कहा कि उनके पैरों में तकलीफ है और नीलोखेड़ी से बार-बर विभाग में आने पर समय और पैसा दोनों की बर्बादी होती है। विभाग के कर्मचारी उन्हें बार-बार कोई न कोई बहाना बनाकर टाल देते हैं।