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शहर के विकास को गति देंगे आठ निगेहबान, अफसर होंगे जवाबदेह

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। शिकायतों के गुणवत्तापरक निवारण के साथ-साथ शहर के विकास को गति देने के लिए निगमायुक्त नरेश नरवाल ने संयुक्त निगमायुक्त सहित विभिन्न शाखाओं के आठ प्रमुख अफसरों के मध्य शक्तियों का विभाजन करते हुए जिम्मेदारी तय कर दी है। वार्डों के विकास कार्यों, शिकायतों को सुनकर उनका निस्तारण करने के लिए नोडल अधिकारी बना दिए हैं। अधिकारियों को वित्तीय शक्तियां भी प्रदान की गई हैं। अब अफसरों को भी उनके कार्य व उत्तरदायित्व मालूम होंगे, साथ ही शहर के लोगों को भी यह पहले से पता होगा कि किस कार्य के लिए किस अफसर से मिलना है।
संयुक्त निगमायुक्त गगनदीप सिंह को राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन, पीएमएवाई, पीएम स्वनिधि, शहरी बीपीएल, मुख्यमंत्री शहरी निकाय स्वामित्व योजना और मुख्यमंत्री अंत्योदय रोजगार योजना का नोडल अधिकारी बनाया गया है। वे इन योजनाओं से संबंधित सब्सिडी व अनुदान भी जारी कर सकेंगे। स्थापना शाखा व बिल्डिंग ब्रांच के ओवरऑल इंचार्ज, भटकते पशुओं के प्रबंधन तथा पिंगली स्थित डेयरी कॉम्पलेक्स की कार्यवाही और प्रॉपर्टी टैक्स के नोडल अधिकारी भी होंगे।
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संबंधित अधिकारियों को बुला सकेंगे
अतिरिक्त निगमायुक्त धीरज कुमार वार्ड नंबर एक से आठ के नोडल अधिकारी होंगे। पार्षदों की मांगों का समाधान और शिकायतों का निवारण करेंगे। वे संबंधित अधिकारियों को बुला सकेंगे। उप निगमायुक्त (डीएमसी) अरुण कुमार जन्म एवं मृत्यु शाखा व विवाह पंजीकरण कार्य के नोडल अधिकारी होंगे। वार्ड 9 से 14 के नोडल अधिकारी के नाते इन वार्डों के पार्षदों की मांगें सुनेंगे। ट्रेड लाइसेंस दे सकेंगे, उनका प्रवर्तन कर सकेंगे। संपत्ति कर, अग्नि कर, विकास शुल्क और लाइसेंस फीस के लिए एनओसी जारी कर सकेंगे। विकास शुल्क की रिकवरी के लिए नोटिस जारी करने की शक्ति होगी, पिंगली डेयरी कॉम्पलेक्स के प्रभारी होंगे।
अनाधिकृत विज्ञापन भी हटा सकेंगे
कार्यकारी अधिकारी, मुख्य अभियंता, भिन्न-भिन्न कार्यकारी अभियंता, डीटीपी व स्वच्छता अधिकारी को भी शक्तियां दी की गई हैं। जिसमें ईओ को परिवार पहचान पत्र और वार्ड 15 से 20 के भी नोडल अधिकारी बनाया गया है। उन्हें म्यूनिसिपल पार्क और सामुदायिक केंद्रों की बुकिंग करने की अनुमति होगी। अनाधिकृत विज्ञापनों को भी हटा सकेंगे। संपत्ति कर, अग्नि कर व लाइसेंस फीस के लिए नो ड्यूज भी दे सकेंगे। निगमायुक्त की ओर से अन्य मामलों में प्राथमिकी भी दर्ज करा सकेंगे।
भौतिक निरीक्षण करने का अधिकारी
चीफ इंजीनियर को प्रशासकीय स्वीकृति, रेट अप्रूवल, वर्क ऑडर, एग्जीक्यूशन, बिल पास करना और खरीद में पेमेंट की स्वीकृति, छोटे-छोटे मरम्मत कार्य, भिन्न-भिन्न प्रकार के यंत्रों की मरम्मत के लिए प्रति मामला एक लाख रुपये की शक्ति दी गई है। मास के दौरान इसकी सीमा 5 लाख रुपये तक रहेगी। विकास कार्यों के लिए ठेकेदारों को सूचीबद्ध करना, फाइल पर रि-टेंडरिंग का कारण देना होगा। मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता को कुल विकास कार्यों के 10 प्रतिशत का भौतिक निरीक्षण करने का अधिकार होगा। कार्यकारी अभियंता व सहायक अभियंता अपने क्षेत्र में सभी विकास कार्यों का निरीक्षण कर सकेंगे।
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देंगे अप्रूवल
डीटीपी आवेदक का भवन नक्शा स्वीकृत करने के साथ ही सभी रिहायशी और वाणिज्यिक संपत्तियों का कंपलीशन व ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट भी जारी कर सकेंगे। अप्रूवल आयुक्त से मिलेगी। डीटीपी को इंप्रूवमेंट ट्रस्ट सहित अन्य प्लॉटों के स्थानांतरण और मोरगेज करने की अनुमति होगी, इसमें अप्रवूल संयुक्त निगमायुक्त की रहेगी। नगर निगम एरिया में मोबाइल टावर और केबल से जुड़े मामलों में प्रवर्तन कर सकेंगे। इसी तरह निगम के अन्य अधिकारियों को भी शक्तियां प्रदान करते हुए उनके कार्यों के लिए उत्तरदायित्व निर्धारित किया गया है।
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