माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। निर्माण कार्यों से उड़ती धूल, कूड़े में लगाई गई आग से धुआं शहर की हवा की सेहत बिगाड़ रहे हैं। मंगलवार को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 246 दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी के करीब है। हवा में पीएम-2.5 का स्तर बहुत बढ़ा हुआ है। पीएम-10 कणों का स्तर भी मानक से तीन गुना से अधिक है।
आसपास के अधिकांश शहरों की तुलना में शहर की हवा ज्यादा प्रदूषित है। मंगलवार को चंडीगढ़ का एक्यूआई 140, पंचकूला का 26, अंबाला का 200, कुरुक्षेत्र का 175, पानीपत का 229, कैथल का 144 दर्ज किया गया। इसका मुख्य कारण पीएम-2.5 और पीएम-10 कणों की संख्या का अधिक होना है। शहर में पीएम-2.5 की स्थिति 319 दर्ज की गई। रात 10 से सुबह 10 बजे तक सबसे खराब स्थिति रही। हवा में पीएम-2.5 कणों की संख्या 10 से अधिक नहीं होना चाहिए। पीएम-10 कणों की संख्या 179 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई।रात के 10 से सुबह के 11 बजे के बीच सबसे खराब स्थिति रही। पीएम-10 कण 50 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए। इन सूक्ष्म कणों का सीधा असर फेफड़ों पर पड़ता है। निगम क्षेत्र में निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और धुएं को इसका कारण माना जा रहा है। कूड़े में आग लगाने से वातावरण में धुएं के कण पहुंच रहे हैं।
निगम के उपाय नहीं दिख रहे
शहर में कई जगहों पर कूड़े में लगाई जा रही है। बड़े निर्माण कार्य भी बिना पर्याप्त व्यवस्था के किए जा रहे हैं। पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा। ग्रेप-3 के उपाय कागजों तक सीमित हैं। निगम की व्यवस्थाएं धरातल पर नहीं दिख रही हैं।
जिला नागरिक अस्पताल के डॉ. कुलबीर ने बताया कि लगातार खराब हो रही हवा के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत, खांसी, आंखों में जलन, दमा और एलर्जी की समस्या बढ़ गइ है। विशेष तौर पर बच्चों और बुजुर्गों में फेफड़ों से संबंधित समस्याएं आने लगी हैं।
-
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें लगातार जिले का दौरा कर रही हैं। जहां भी अनियमितताएं मिल रही है कार्रवाई की जा रही है। लोगों को भी ग्रेप-3 के नियमों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। -रणदीप सिंधू, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण विभाग