आईआईडब्ल्यूबीआर के निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र हुए सेवानिवृत्त
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) करनाल के निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह सेवानिवृत्त हो गए हैं। उन्होंने जलवायु परिवर्तनशील सहित देश में बेहतर पैदावार देने वाली गेहूं की करीब 30 किस्मों में सहयोग अतुलनीय सहयोग दिया है। उनके कार्यकाल में संस्थान की अपनी सात नई किस्मों के साथ करीब 25 किस्मों को रिलीज किया गया है।
फिलहाल संस्थान का कार्यवाहक निदेशक डॉ.ओमबीर सिंह को बनाया गया है। संभावना है कि आगामी दो चार दिनों में संस्थान में स्थायी निदेशक की नियुक्ति हो जाएगी। डॉ.ज्ञानेंद्र सिंह ने यूं तो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) में बतौर वैज्ञानिक 1986 में ज्वाइन किया था। इसके बाद वह कई संस्थानों के कई बड़े पदों पर रहे। आईआईडब्ल्यूबीआर में उन्होंने लंबे समय तक सेवा दी। नवंबर 2022 को वह संस्थान के निदेशक बने।
इसके बाद दोनो सालों में देश में गेहूं की बंपर पैदावार हुई। 2023 में 10.6 मिलियन टन और अब 2024 में करीब 114 मिलिटन टन पैदावार की संभावना है, अभी अंतिम परिणाम आने शेष है। डॉ़.ज्ञानेंद्र सिंह ने 30 नई गेहूं की किस्मों को तैयार करने में अपना सहयोग दिया है।
उनके निदेशक रहते देश को करीब 25 नई गेहूं की किस्में मिली हैं, जिसमें सात किस्में तो आईआईडब्ल्यूबीआर करनाल की है। इसके अलावा उन्होंने संस्थागत और ढ़ांचागत कई कार्य किए हैं। कुछ नई किस्मों के शोध भी शुरू कराए हैं, कुछ शोध पूरे भी हो चुके हैं, जिनका परिणाम शीघ्र सामने आएगा। संस्थान के वैज्ञानिकों ने उन्हें भावपूर्ण विदाई दी।
इसके साथ ही संस्थान के कार्यवाहक निदेशक का कार्यभार जौ सुधार के प्रधान अन्वेषक डॉ.ओमबीर सिंह को दिया गया है। बताते हैं कि आईसीएआर में निदेशक पद के लिए साक्षात्कार हो चुका है। संभावना है कि डॉ. रतन तिवारी संस्थान के नए निदेशक हो सकते हैं।