राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) करनाल को नया निदेशक मिल गया है। कार्यकारी निदेशक डा. आरआरबी सिंह के स्थान पर बुधवार को डा. मनमोहन सिंह चौहान ने निदेशक का पदभार संभाला। इस दौरान बातचीत में डा. चौहान ने कहा कि डेयरी क्षेत्र के लिए शोध को और बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही नयी तकनीकों को पशुपालकों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि पशुपालकों और किसानों की आमदनी बढ़ सके। इसके अलावा, दूध की उपलब्धता और शुद्धता पर भी काम किया जाएगा। बता दें कि डॉ. चौहान के पास एनिमल बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लंबा शोध अनुभव है और वो एक प्रसिद्ध एनिमल जैव-प्रौद्योगिकीविद हैं। उन्होंने नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट, करनाल में विश्व की पहली भैंस क्लोन बछड़ा विकसित किया था। डॉ. चौहान इससे पहले आईसीएआर-केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम, मथुरा में निदेशक के रूप में कार्यरत थे।
डा. चौहान वर्ष 1986 में एमएससी पीएचडी हैं। उनको उत्कृष्ठ कार्यों को लेकर कई अवार्ड मिल चुके हैं। इनमें 2015 का रफी अहमद किदवई अवार्ड, आईसीएआर बेस्ट टीम अवार्ड इन एनीमल साइंसेज-2014, राव बहादुर विश्वनाथ अवार्ड 2016-17 समेत करीब 18 अवार्डों से नवाजे जा चुके हैं।
क्लोन बनाने से मिली थी ख्याति
डा. मनमोहन चौहान एनडीआरआई में ही वैज्ञानिक रहे हैं। 2010 में उन्हें भैंस का पहला क्लोन तैयार करने पर विश्व में ख्याति मिली थी। उन्होंने एनडीआरआई में क्लोन से गरीमा, गरीमा-2 तैयार की थी। क्लोन से तैयार गरीमा करिश्मा और महिमा को जन्म दे चुकी है। इसके अलावा, कटड़ों की बात करें तो डा. चौहान ने श्रेष्ठ, श्रवण, रजत आदि क्लोन तैयार किए हैं।