संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। अब अस्पताल के सभी डॉक्टरों को ओपीडी पर्ची, लैब रिपोर्ट और दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन पर अपने हस्ताक्षर, नाम, पदनाम और पंजीकरण संख्या अनिवार्य रूप से लिखनी होगी। जिले के नागरिक अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग के नए दिशा-निर्देश लागू कर दिए गए हैं। इसके साथ दवाओं के जेनेरिक नाम बड़े और स्पष्ट अक्षरों में लिखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि मरीजों को दवा पहचानने में आसानी हो सके।
अस्पताल प्रशासन ने इस नई व्यवस्था को सख्ती से लागू कर दिया है। सभी चिकित्सकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि बिना हस्ताक्षर और नाम के कोई भी पर्ची या रिपोर्ट मरीज को न दी जाए। वरिष्ठ चिकित्सकों को इस व्यवस्था की निगरानी का दायित्व सौंपा गया है, ताकि इसका पूरी तरह पालन सुनिश्चित हो सके।
मरीजों के हित में अहम बदलाव
इस कदम से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। पहले कई बार रिपोर्टों या पर्चियों पर डॉक्टर का नाम स्पष्ट न होने के कारण मरीजों को इलाज की पुष्टि और दवाओं की पहचान में कठिनाई होती थी। अब हर दस्तावेज पर डॉक्टर की पहचान साफ रहेगी, जिससे चिकित्सा व्यवस्था पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।
हर मरीज को अब स्पष्ट जानकारी मिलेगी कि उसका इलाज कौन कर रहा है - डॉ. दीपक गोयल
नागरिक अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. दीपक गोयल ने बताया कि अस्पताल ने आदेशों का पालन शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा, अब प्रत्येक ओपीडी पर्ची, लैब रिपोर्ट और प्रिस्क्रिप्शन पर डॉक्टर का नाम, पदनाम और पंजीकरण संख्या दर्ज की जा रही है। इससे मरीजों को यह जानकारी स्पष्ट रहेगी कि उनका इलाज किस चिकित्सक ने किया है। साथ ही जेनेरिक नाम बड़े अक्षरों में लिखने से मरीजों को दवा पहचानने और कम कीमत वाली दवाएं चुनने में भी आसानी होगी
- डॉक्टर के हस्ताक्षर और रजिस्ट्रेशन नंबर क्यों जरूरी
डॉक्टर का नाम, पदनाम और पंजीकरण संख्या होने से मरीज को यह जानकारी मिलती है कि उसका इलाज किस योग्य चिकित्सक द्वारा किया गया है। इससे चिकित्सा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ती है और किसी त्रुटि की स्थिति में जवाबदेही तय हो पाती है।