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अब ट्रांसफर से नहीं डरते, चाहे पाकिस्तान भेज दो

Mon, 12 Sep 2016 12:45 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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डॉक्टरों का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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सीएम कैंप ऑफिस के बाहर पुलिस की ओर से बेरिकेड्स लगाने को लेकर एससीएमएस के डॉक्टर्स और पुलिस के बीच रविवार को झड़प हो गई। मामला तू तड़ाक तक भी पहुंच गया। इस दौरान करीब आधे घंटे तक डॉक्टरों और डीएसपी के बीच कहासुनी हुई। एक तरफ पुलिस ने जाम लगाने के आरोप में केस दर्ज करने की बात कही तो डॉक्टरों ने भी सीधे जवाब देते हुए कहा कि जाम पुलिस ने लगा रखा है। डॉक्टर्स बोले, वे क्लास वन ऑफिसर हैं, कोई ऐरे गैरे नहीं हैं। हम न तो जाम लगाते हैं और न ही लगवाते हैं, इसलिए हमारे साथ ऐसा व्यवहार न किया जाए। डॉक्टर बेरिकेड्स खुलवाने पर अड़े रहे तो पुलिस ने साफ कहा कि वे किसी भी सूरत में बेरिकेड्स नहीं हटाएंगे। हालात को देखते हुए डाक्टर सड़क पर ही धरना देने बैठ गए। बाद में एडीसी डॉ. प्रियंका सोनी मौके पर पहुंची और उनका ज्ञापन लिया। इसके बाद ही डॉक्टर शांत हुए और वहां से निकल लिए।  
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दरअसल, रविवार को बैठक के बाद 2.30 बजे प्रदर्शन करते हुए सीएम कैंप ऑफिस तक पहुंचे। यहां पर पहले से ही भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और ठीक कैंप ऑफिस से पहले सड़क पर पुलिस बेरिकेड्स लगा दिए। जैसे ही डॉक्टर वहां पहुंचे तो कैंप ऑफिस से पहले ही रोक लिया गया। इस दौरान डॉक्टरों ने बेरिकेड हटाने को कहा तो पुलिस ने इनकार कर दिया और मौके पर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपने की बात कही। डॉक्टर्स एसोसिएशन ने पहले तो बेरिकेड को हटाने की बात कही, साथ ही यह भी कहा कि वे आईएएस को ही ज्ञापन देंगे न की तहसीलदार को।

इस बात को लेकर मौके पर मौजूद डीएसपी जितेंद्र गहलावत ने कहा कि सुरक्षा के चलते बेरिकेडस लगाए हैं और ज्ञापन के लिए प्रशासन की ओर से तहसीलदार की ड्यूटी लगाई गई है। इसलिए ज्ञापन इन्हीं को दिया। बातचीत के दौरान, एससीएमएस के प्रधान डा. जसबीर पंवार व महासचिव डा. राजेश शयोकंद और डा. ख्यालिया की डीएसपी व सिविल लाइन थाना प्रभारी मनोज कुमार के साथ बहस हो गई। डाक्टरों ने कहा कि वे क्लास वन आफिसर हैं, इसलिए आईएएस को ही ज्ञापन देंगे, वहीं डीएसपी ने कहा कि अगर जल्दी रास्ता खाली नहीं किया वे केस दर्ज करेंगे। इस पर डाक्टरों ने कहा कि प्रदर्शन के लिए उनके पास परमिशन है, जबकि डीएसपी ने कहा कि इसके लिए कोई परमिशन नहीं दी गई थी।
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मामला इतना बढ़ गया कि डीएसपी ने कहा कि जाम लगाने के आरोप में वे केस दर्ज करेंगे, इस पर डाक्टर भी अड़ गए और कहा कि जाम पुलिस ने लगा रखा है, हमने नहीं। गुस्साए डाक्टर वहीं पर धरना देकर बैठ गए। मामला बढ़ता देख पूरे मामले की जानकारी डीसी को दी गई। बाद में एडीसी डॉ. प्रियंका सोनी को मौके पर ज्ञापन लेने के लिए भेजा गया। इससे पहले, डाक्टरों ने प्रदेश सरकार, पुलिस और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

सरकार नहीं, अफरशाही के खिलाफ निकाली भड़ास
एचसीएमएस एसोसिएशन के राज्यस्तरीय सम्मेलन में डॉक्टरों का सरकार के प्रति कम बल्कि अफसरशाही के प्रति गुस्सा ज्यादा हावी रहा। ज्यादातर वक्ताओं ने कहा कि सीएम ने भी मांगों पर सहमति जता दी और स्वास्थ्य मंत्री ने भी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी फाइल को दबाए बैठे हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस प्रदेश में न तो मुख्यमंत्री की चलती है और न ही स्वास्थ्य मंत्री की, इसलिए हमें सरकार पर गुस्सा नहीं है, क्योंकि प्रदेश में सरकार तो है ही नहीं, ये अफसर ही चला रहे हैं। एचसीएमएस के नेताओं ने साफ कहा कि इन आईएएस लाबी का इलाज भी उन्हें आता है।

तहसीलदार को रहने दो, पटवारी को बुला लो
ज्ञापन देने को लेकर जैसे ही डॉक्टरों को पता कि तहसीलदार ज्ञापन लेने आए हैं तो उन्होंने मना कर दिया। डॉक्टरों ने पुलिस को कहा कि तहसीलदार तो बड़ा आफिसर होता है, पटवारी को बुला लीजिए उसे हम ज्ञापन देंगे। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि यह डाक्टरों का अपमान है और इसे सहन नहीं किया जाएगा। बाद में आनन-फानन में एडीसी को मौके पर बुलाया गया।

एसीएस ने रास्ता बदला जीटी रोड जाने के लिए
दोपहर तीन बजे सीएम कैंप आफिस के बाहर डॉक्टर नारेबाजी कर रहे थे, नहीं मेडिकल एजुकेशन एंड रिचर्स के एसीएस धनपत सिंह मेडिकल कालेज का दौरा करने के बाद वापस चंडीगढ़ जा रहे थे, लेकिन रास्ते में डाक्टर होने के कारण उन्होंने अचानक अपना रास्ता बदल लिया। हालांकि, जैसे ही डाक्टरों को पता चला तो उन्होंने पुलिस से अपील की कि वे ज्ञापन के लिए एसीएस को बुला लें।

छह माह पहले ज्वाइनिंग, आज रिजाइन पर किए साइन
मांगों को लेकर एसोसिएशन की ओर से सभागार में ही रिजाइन फार्म पर साइन कराए गए। इस दौरान डा. संदीप, डा. अमन आदि ने बताया कि कुछ महीने पहले ही ड्यूटी ज्वाइन की है, लेकिन खराब हालात होने के कारण वे इस फार्म पर साइन कर रहे हैं, ताकि मांगें पूरी हो सकें। इस दौरान काफी संख्या में महिला डाक्टरों समेत करीब 600 डाक्टरों ने रिजाइन फार्म पर हस्ताक्षर किए। एसोसिएसन ने जिलास्तर पर दो दिन में सभी डाक्टरों के रिजाइन फार्म भरवाने की जिम्मेदारी लगाई।

सीएम साहब हम लोगों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं
डॉ. शीलकांत ने मंच से कहा कि सीएम साहब वे मरीजों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। लोड ज्यादा होने के कारण ओपीडी में वे आदमी का चेहरा देखकर ही दवाई लिख देते हैं, उसकी मर्ज सुनने का तो वक्त ही नहीं है। इसलिए प्रदेश में ऐसा जुल्म मत होने दो और डाक्टरों की भर्ती करो। एक एक डाक्टर माह में 250 से ज्यादा आपरेशन कर रहे हैं, ओपीडी ओवरलोडेड हो गई, अस्पतालों में न दवाइयां हैं और न ही सुविधाएं, लेकिन लोग झगड़ा हमारे से करते हैं। प्रदेश के ट्रामा सेंटरों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि ये केवल शो पीस हैं, यहां पर न तो कोई स्पेशनलिस्ट डाक्टर है और न ही सुविधाएं, ऐसे कैसे कोई मरीज ट्रामा सेंटर में आकर बच पाएगा। वहीं, पीजीआई रोहतक का नया ट्रामा सेंटर चालू नहीं होने पर भी उन्होंने सरकार को कठघरे में खड़ा किया।

खट्टर और विज को क्या पता ट्रांसफर का दर्द
सम्मेलन के दौरान डाक्टरों ने प्रदेश सरकार व सीएम और स्वास्थ्य मंत्री पर जमकर तंग कसे। ट्रांसफर नीति पर डाक्टरों ने कहा कि सीएम मनोहर लाल और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज दोनों ही अविवाहित हैं, इसलिए उन्हें क्या पता कि कपल केस में अलग-अलग ट्रांसफर होने पर क्या-क्या परेशानी होती है। इनके पास न तो बहू और न ही बेटी। इसलिए ये केवल बेटी बचाने के दावे ही करते हैं, बचाने के लिए कुछ नहीं करते, बस ट्रांसफर ही करते हैं। डाक्टरों ने एक सुर में मांग की आनलाइन ट्रांसफर लिस्ट को रद्द किया जाए।

नेताओं और अफसरों के पेट और सिर दर्द होगा, दवा मत देना
एसोसिएसन के महासचिव डॉ. राजेश शयोकंद ने कहा कि डाक्टरों की एकता और आंदोलन से सरकार और अफसरों की नींद हराम हो जाएगी। आने वाले दिनों में इनके सिर और पेट में दर्द होगा, लेकिन आप लोगों को इनको दवा नहीं देनी है, कम से नींद की दवा तो नहीं देनी है, जो भी आए तो उसे उसके ही लहजे में जवाब देना कि यह बड़ा गंभीर मसला है इसके लिए मेरे सीनियर डाक्टरों से बात करनी होगी। इस पर जमकर तालियां बजी। उन्होंने कहा कि हम डाक्टर हैं, हर मर्ज का इलाज हमारे पास है, हम अब ट्रांसफर नहीं डरते, चाहे हमें पाकिस्तान भेज दो।
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