- शहर के हर प्रमुख मार्ग पर हादसों के निशान, लापरवाह अधिकारियों ने नहीं किए कोहरे में सुरक्षा इंतजाम
गगन तलवार
करनाल। कोहरे में हादसों को रोकने के लिए सड़कों पर सफेद पट्टी लगवाना तो दूर सड़क इंजीनियरिंग से जुड़े अधिकारियों ने सड़कों की हालत तक नहीं सुधारी। स्थिति यह है कि शहर के प्रत्येक प्रमुख मार्ग पर चौराहों के चबूतरे और डिवाइडर ध्वस्त पड़े हैं। इसके अलावा डिवाइडर में लगी ग्रिल और जरूरी संकेतक भी गिरे और टूटे हैं।
जो इस स्थिति का प्रमाण हैं कि यहां कई लोग हादसों का शिकार हो चुके हैं। लेकिन इन सड़कों से गुजरने वाले जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों का इस ओर ध्यान नहीं है। कई जगहों पर लोग हादसों के कारण गंभीर रूप से चोटिल भी हो चुके हैं।
सोमवार को अमर उजाला की टीम ने शहर के सभी प्रमुख मार्गों के अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग-44 और स्टेट हाइवे का निरीक्षण करके हालात का जायजा लिया। सभी मार्गों की मिलाकर करीब 90 जगह डिवाइडर टूटे हुए थे और 60 के करीब जगहों पर संकेतक वाहन की टक्कर लगने के कारण झुके या टेढ़े हो चुके हैं या फिर पूरी तरह से जमीन पर गिरे हैं। इनसे उलझने के कारण रात की बजाय दिन में भी कोई न कोई राहगीर हादसे का शिकार हो सकता है।
मौसम परिवर्तन के बाद अब दिन में भी कोहरा छाने लगा है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन्हें नहीं सुधारा गया तो लोग हादसों का शिकार होंगे। विदित हो कि गत वर्ष की तुलना में इस साल 486 सड़क हादसे हुए हैं। इनमें 198 लोग जान गंवा चुके हैं। वहीं पिछले वर्ष की बात करें तो 2023 में 572 सड़क हादसे हुए थे। इन हादसों में 231 लोगों की जान गई थी। इस खतरनाक आंकड़े के बाद भी अधिकारी सजग नहीं हैं।
चबूतरा पूरी तरह खंडित
सेक्टर-13 रोड से सेक्टर-14 की ओर जाने वाली सड़क पर अस्पताल के नजदीक चबूतरा ही खंडित हो चुका है। यह चबूतरा पूरी तरह से टूटा पड़ा है। इसके अलावा इस चौक पर कोई सफेद पट्टी व लाइटें भी नहीं हैं। ऐसे में यहां हादसा होने की संभावना ज्यादा रहती है। इस मार्ग से रोजाना प्रशासनिक अधिकारी भी गुजरते हैं, लेकिन चबूतरे की ओर किसी का ध्यान नहीं है। ऐसी ही स्थिति हांसी के चौराहे की देखी जा सकती है। इसके अलावा सेक्टर-32 रोड पर भी कई चबूतरे खंडित हैं।
डिवाइडर के कट पर संकेतक भी जरूरी
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ तेजपाल, शुभम और सड़क सुरक्षा समिति सदस्य संदीप लाठर का कहना है कि सड़कों के डिवाइडर सही स्थिति में होने चाहिए। जहां भी सड़क के दूसरी ओर जाने के लिए कट दिया हो, वहां पर संकेतक भी जरूर होना चाहिए। ताकि रात में दूर से दिखाई पड़े। लेकिन करनाल में मार्गों की स्थिति इसके विपरीत है। ऐसे डिवाइडर भी ब्लैक स्पॉट की तरह हैं, इन पर हादसे हो रहे हैं।
यहां टूटे हैं डिवाइडर
- रेलवे रोड पर पांच जगह डिवाइडर टूटे हैं। इनमें सबसे ज्यादा रेलवे स्टेशन के नजदीक, गुरु नानक खालसा कॉलेज के समीप, मछली मार्केट, कांबोज धर्मशाला के पास, वाल्मीकि चौक के नजदीक।
- नावल्टी रोड पर आठ जगह।
- पुरानी सब्जी मंडी रोड से सेक्टर-14 तक छह जगह।
- सेक्टर-12 से महात्मा गांधी चौक पांच जगह।
- श्रीमद्भागवत गीता द्वार से एनडीआरआई चौक तक पांच जगह।
- एनडीआरआई चौक से बस अड्डे तक चार जगह।
- एनडीआरआई चौक से आईटीआई चौक तक दो जगह।
- नेशनल हाईवे पर बलड़ी चौक से नमस्ते चौक तक नौ जगह।
- इंद्री रोड पर 12 जगह।
यहां गिरे पड़े हैं संकेतक
- अग्रसेन चौक के पास
- नेशनल हाईवे-44 पर पांच जगह।
- नेशनल हाईवे से मेरठ चौक तक दो जगह।
- काछवा फ्लाईओवर पर दो जगह।
- पश्चिमी यमुना नहर पर दो जगह।