माई सिटी रिपोर्ट
करनाल। पूर्व सांसद कांग्रेस नेता बृजेंद्र सिंह की छह माह से चल रही सद्भाव यात्रा शुक्रवार को करनाल पहुंची। इसमें कांग्रेस की कलह खुलकर सामने आई। यात्रा में कुछ पूर्व दिग्गज तो नजर आए लेकिन मौजूदा पदाधिकारियों ने दूरी बनाए रखी।
रामनगर से शुरू हुई यात्रा में पूर्व विधानसभा स्पीकर कुलदीप शर्मा, पूर्व विधायक शमशेर सिंह गोगी के साथ कुछ कांग्रेसी कार्यकर्ता शामिल हुए। शहरी और ग्रामीण जिला अध्यक्ष यात्रा में शामिल नहीं हुए। बृजेंद्र सिंह की इस यात्रा में राहुल गांधी के भी शामिल होने का दावा किया गया था। वह अब तक यात्रा में शामिल नहीं हो पाए हैं।
जिला बार एसोसिएशन में बृजेंद्र सिंह मीडिया से भी मुखातिब हुए। उन्होंने कहा कि चार प्रदेशों में चल रहे चुनाव और उनकी तैयारियों की वजह से राहुल गांधी व्यस्त हैं। सात तारीख के बाद उनके कार्यालय से यात्रा में शामिल होने का संदेश आ सकता है। जिले से दोनों जिला अध्यक्षों के शामिल न होने की बात पर उन्होंने कहा कि उन्होंने संपर्क तो किया था। अब क्या वजह रही इस बारे में वह कुछ नहीं कहना चाहते।
बृजेंद्र सिंह ने पार्टी संगठन, राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग और प्रदेश की राजनीति पर बात रखी। कहा कि कुछ लोगाें की वजह से पार्टी में अनुशासनहीनता है, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कुलदीप शर्मा के बयान का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव में अगर अधिकृत एजेंट प्रदेश से बाहर के होते तो शायद आज के समय में चल रही ये तू तू मैं मैं भी नहीं होती। आप नेता राघव चड्ढ़ा पर उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि शायद उन्हें बीजेपी में जाने की सलाह दी जा रही हो।
पार्टी को कमजोर करने की कोशिश में कुछ लोग : बृजेंद्र सिंहबृजेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 का चुनाव लहर का चुनाव था। बीजेपी को जीत मिली। वर्ष 2016 से हालात योजनाबद्ध तरीके से बिगाड़े गए। कांग्रेस का संगठन कमजोर था और आंतरिक गुटबाजी भी थी। अब पार्टी संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है लेकिन कुछ लोग कमजोर करने की कोशिश में हैं। बृजेंद्र सिंह ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर भारत पर पड़ा है। यात्रा का उद्देश्य केवल राजनीतिक प्रदर्शन नहीं बल्कि जनसंपर्क को मजबूत करना और संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करना है। सद्भाव यात्रा के करनाल पहुंचने पर वाल्मीकि समाज ने स्वागत किया। भारत ढिल्लों ने भगवान वाल्मीकि का चित्र भेंट किया।