मंत्री जी, आप ईमानदारी की बात कर रहे हैं, हम आपकी बात मानते हैं, लेकिन पहले प्रदेश भर के डिपो होल्डर्स के बकाया कमीशन करीब 80 करोड़ रुपये तो दिला दो। भुगतान रोककर आप ईमानदारी की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? यह शब्द आल फेयर प्राइस शाप डीलर्स फेडरेशन हरियाणा के प्रतिनिधिमंडल ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के राज्यमंत्री कर्ण देव कांबोज को कहे। मंत्री ने आश्वासन दिया कि जल्द ही इस राशि का भुगतान कराया जाएगा।
दरअसल, राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में प्रदेश भर के डिपो होल्डर्स को आवश्यक वस्तुओं के बायोमेट्रिक मशीन से वितरण की प्रणाली के बारे में बताने के लिए सम्मेलन बुलाया गया था। कांबोज ने कहा कि इस समय डिपो होल्डर्स की छवि अच्छी नहीं है। प्रदेश सरकार इनकी छवि बदलने के लिए काम करेगी, ताकि वे भी समाज का हिस्सा बनकर रह सकें और गांव व समाज में गर्व के साथ रहें। कांबोज ने कहा कि बुरे रास्तों को छोड़कर अच्छे तरीके से कार्य करें और सरकार भी इसमें मदद करेगी, ताकि आमदनी बढ़ सके और भ्रष्टाचार न हो सके।
स्वागत करने आए, पढ़ दिया मांग पत्र
कार्यक्रम के दौरान, सबसे पहले मंत्री के स्वागत के लिए आल फेयर प्राइस शाप डीलर्स फेडरेशन हरियाणा के प्रधान धर्मपाल गुप्ता को मंच पर बुलाया गया। अधिकारियों व मंत्री के स्वागत के बाद गुप्ता ने मंच से ही कहा कि वे अपनी मांगें रखना चाहते हैं। अधिकारियों ने कहा कि मांग पत्र बाद में मंत्री को दे देना, लेकिन गुप्ता नहीं रुके और मांगें पढ़कर सुनाईं। गुप्ता के संबोधन के बीच डिपो होल्डर्स ने करीब दस बार तालियां बजाईं।
नहीं मिला काफी समय से कमीशन
डिपो प्रधान ने बताया कि प्रदेशभर में 9322 डिपो होल्डर हैं। लंबे समय से इनको कमीशन नहीं मिला है। अधिकारियों, मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई जा चुकी है। जनवरी से सितंबर, 2016 तक कोई कमीशन उन्हें नहीं मिला है। इसके अलावा, अगस्त 2013 से लेकर दिसंबर 2016 तक करीब 28 महीने का 80 करोड़ रुपये सरकार पर बकाया है। वर्ष 2015 से आज तक गेहूं वितरण का एक भी पैसा नहीं मिला है।
अच्छी छवि नहीं, बजी तालियां
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एसीएस एसएस प्रसाद ने अपने संबोधन के दौरान जब मंच से कहा कि, डिपो होल्डर्स भाइयो बुरा मत मानना, लेकिन मैं कहना चाहता हूूं कि डिपो होल्डर्स को अच्छा नहीं माना जाता, मतलब छवि अच्छी नहीं है.. तो डिपो होल्डर्स ने जमकर तालियां बजाईं। एसएस प्रसाद ने सभी डिपो होल्डर्स का आह्वान किया कि वे ईमानदारी के साथ काम करें।
डिपो होल्डर्स बोले, मंथली बंद हो
डिपो होल्डर्स ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे ईमानदारी के साथ काम करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें ईमानदार नहीं रहने दिया जाता है। इसलिए जरूरी है कि उन पर बेगार न डाली जाए और मंथली न ली जाए। अकेले डिपो होल्डर्स को ईमानदारी का पाठ पढ़ाने की बजाय अधिकारियों को भी यह सीख देनी चाहिए कि वे ईमानदारी के साथ ड्यूटी करें। एक अन्य डिपो होल्डर ने दावा कि ऐसा कोई डिपो नहीं है, जो अधिकारियों की बेगार न झेलता हो, लेकिन वे बोल नहीं पाते हैं, क्योकि चेकिंग विभाग के हाथों में है।
ये हैं डिपो एसो. की मांगें
1 हर तीन साल में नया सर्वे होना चाहिए, अपात्र लोगों के नाम काटे जाएं
2. पिछले 12 वर्षों से राशन कार्ड नहीं बने हैं, दोबारा से कार्ड बनाए जाएं।
3. राशन कार्ड को बुकलेट की तर्ज पर बनाया जाए।
4. पिछले दस साल से बीपीएल का सर्वे नहीं हुआ, दोबारा से सर्वे हो।
5. डिपो खोलने के दिनों व समय में कटौती की जाए।
6. दाल-चीनी व मिट्टी के तेल पर कमीशन दो रुपये किया जाए।
7. शहरी डिपो धारकों को पांच हजार और ग्रामीण को तीन हजार महीना दिया जाए।
8. बायोमेट्रिक मशीन की कीमत डिपो होल्डर्स से नहीं ली जाए।
9. सरकारी योजनाओं के प्रचार के लिए डिपो होल्डर्स की मदद ली जाए।