संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। शादियों का सीजन शुरू होते ही बाजार में हलचल तेज हो गई है, लेकिन शादी के कार्ड के कारोबार में इस बार रफ्तार कुछ बदली-बदली सी नजर आ रही है। डिजिटल दौर ने इस पारंपरिक व्यवसाय की चमक को कम कर दिया है। शहरों में लोग अब भारी संख्या में डिजिटल कार्ड और ई-इनवाइट कार्ड भेजने लगे हैं, जिससे कार्ड छपवाने वाले कारोबारियों पर सीधा असर पड़ रहा है।
शहर के कार्ड कारोबारियों के मुताबिक, डिजिटलाइजेशन ने उनके ग्राहकों का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा खींच लिया है। पहले जहां बड़े पैमाने पर कार्ड का ऑर्डर मिलता था, वहीं अब सिर्फ गिने-चुने लोग ही कार्ड छपवाते हैं। बाकी सभी निमंत्रण व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और ईमेल के जरिए भेजे जा रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि डिजिटल कार्ड सस्ता, तेजी से बनकर तैयार होने वाला और सोशल मीडिया पर तुरंत भेजा जाने वाला विकल्प बन गया है। यही वजह है कि शहरों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही हैं।
कारोबारी सोनू ने बताया कि आज के दौर में लोगों के पास समय कम है। डिजिटल कार्ड मिनटों में तैयार हो जाते हैं और हजारों लोगों तक तुरंत पहुंच जाते हैं, इसलिए शहर के लोग अब इसी को अधिक चुन रहे हैं। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में अभी भी पारंपरिक कार्ड की पकड़ मजबूत बनी हुई है। वहां के लोग पुरानी परंपरा के अनुसार छपे हुए कार्ड को ही प्राथमिकता देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से पहले की तरह ही ऑर्डर मिल रहे हैं, जिससे कारोबार में ज्यादा गिरावट नहीं आई। शहर में इस समय 100 से ज्यादा कारोबारी शादी का कार्ड तैयार करने के काम से जुड़े हुए हैं, जिनमें से लगभग 70 प्रतिशत कारोबारी प्रिंटिंग मशीन रखते हैं। कार्ड की कीमत की बात करें तो एक साधारण कार्ड 5 से 7 रुपये तक बन जाता है, जबकि मध्यम वर्गीय परिवार आमतौर पर 20 से 40 रुपये तक के कार्ड छपवाते हैं।