संवाद न्यूज एजेंसी
नीलोखेड़ी। श्री बजरंग सेवा दल बारात घर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास स्वामी हरिहर मुद्गल ने कहा कि दूसरे मनुष्य की सहायता करना एवं अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभाना ही धर्म है। ईश्वर से प्रेम करना परमधर्म है। मनुष्य को धर्म और परमधर्म दोनों का पालन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ने कलियुग को रहने के लिए चार मुख्य स्थान शराब, जुआ, हिंसा और व्यभिचार दिए थे। जो व्यक्ति इन चारों कामों में से कोई एक भी करता है, तो उसके ऊपर कलियुग अपना प्रभाव डालता ही है। कलियुग हमारे विवेक और बुद्धि का हरण कर लेता है। सही और गलत का निर्णय हम नहीं कर पाते हैं। समाज में बढ़ रहे पाप और कपट का कारण भी यही कलियुग का प्रभाव है। लोग गलत करते है पर उनको नहीं लगता कि उन्होंने कुछ गलत किया है, यही कलियुग है।
सभा के वेद प्रकाश कटारिया, लछमन दास अरोड़ा, रविन्द्र कत्याल, तिलक चावला, प्रवीन मेहता, बलवन्त सिंह, मनोहर धवन, सतपाल गांधी, विजय अरोड़ा, ललित शर्मा, सतीश जोशी और प्रवीण वधवा आदि मौजूद रहे।