करनाल। जमीन की पूरी रकम लेने के बाद भी कब्जा न देने का मामला सामने आया है। 15 वर्ष तक परेशानी झेलने के बाद जमीन मालिक दंपती के खिलाफ पीड़ित ने पुलिस को शिकायत दी है। सेक्टर-32 थाना पुलिस ने शिकायत पर केस दर्ज कर लिया है।
पुलिस को दी शिकायत में सेक्टर-8 निवासी राजकुमार ने बताया कि मार्च, 2007 को उनका बलविंद्र सिंह और उनकी पत्नी सर्वजीत कौर के साथ 4.91 करोड़ रुपये में 4005 वर्ग गज जमीन लेने का इकरारनामा हुआ था। संपत्ति की रजिस्ट्री अप्रैल, 2008 में होनी थी, लेकिन किसी कारण से हो नहीं पाई। इसके बाद आपसी सहमति से 31 दिसंबर, 2010 को रजिस्ट्री कराना तय हुआ। बयाने के तौर पर उन्होंने 90 लाख रुपये भी दिए। 4005 वर्ग संपत्ति में 733 वर्ग गज का पेट्रोल पंप, 600 वर्ग गज का मकान, 453 वर्ग गज, 1624 वर्ग गज, 250 वर्ग गज और 343 वर्ग गज का प्लॉट था। सभी में मालिकाना हक बलविंद्र सिंह और सर्वजीत कौर के पास थे। टावर का किराया और एचपीसीएल की लीज मनी भी उन्हीं के पास जाती थी। बाद में 343 गज के प्लाट पर असहमति होने के कारण शेष बची 3662 वर्ग गज जमीन का सौदा घटकर 4.39 करोड़ रुपये हो गया।
सितंबर 2010 से उन्हें पेट्रोल पंप का कब्जा मिला और लिखित में तय हुआ कि आगे का नफा-नुकसान उनका होगा। मई, 2011 को दोनों पक्षों में समझौता हुआ कि 31 लाख रुपये पेट्रोल पंप ट्रांसफर परमिशन के बाद देने होंगे। इसके अलावा किसी और राशि की देनदारी प्रार्थी की ओर से नहीं थी। 18 मार्च, 2015 और 10 जून, 2016 को 453 और 1624 वर्ग गज की रजिस्ट्री उनके रिश्तेदारों के नाम करवाई गई। लेकिन 733 और 850 वर्ग गज का हिस्सा, जो एचपीसीएल लीज और डिग्री के तहत था, अब तक उनके नाम नहीं हुआ।
फरवरी 2022 में राजकुमार ने अपनी उम्र ज्यादा होने पर शेष बची 1583 वर्ग गज जमीन की रजिस्ट्री उनके बच्चों के नाम कराने की बात कही तो बलविंद्र सिंह ने उन्हें धोखे से इकरारनामा और एमओयू रद्द करवाने के लिए शपथ पत्र लिखवाया। उनका कहना है कि 4.98 रुपये देने के बाद भी उन्हें जमीन का पूरा कब्जा नहीं मिला, अब उन्हें धमकियां दी जा रही हैं। पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।
एक करोड़ रुपये का ईंधन उधार लेने का आरोप
राजकुमार का कहना है कि 2010 से 2020 तक उनके बेटे तरुण कुमार ने पंप चलाया। इस दौरान बलविंद्र सिंह और उसके साथियों ने लगभग एक करोड़ रुपये का फ्यूल उधार लिया। मार्च 2020 में पंप बलविंद्र सिंह को दो लाख रुपये मासिक किराए पर दे दिया गया। वहीं पंजाब नेशनल बैंक की 60 लाख रुपये की लिमिट भी चली आ रही थी, जिसमें राजकुमार और उनकी पार्टनर त्रिप्ता शर्मा की संपत्तियां गिरवी रखी गई थीं। इस लिमिट को चुकाने के लिए 60 लाख रुपये दिए गए थे लेकिन बलविंद्र सिंह ने सिर्फ 20 लाख रुपये बैंक में जमा किए और 40 लाख रुपये हड़प लिए।