जिले की सभी पंचायतें खुले में शौचमुक्त होने पर उपायुक्त बराड़ को मिला सम्मान
- फोटो : Amar Ujala
जिले की सभी 382 पंचायतें खुले में शौचमुक्त घोषित हो चुकी हैं। जिला को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए डीसी मंदीप सिंह बराड़ के मार्गदर्शन और निर्देशन में समाज सेवी संस्थाओं और प्रशासनिक अमले का विशेष सहयोग रहा। तभी जिला करनाल खुले में शौच मुक्त हो पाया। इस उपलब्धि के लिए बुधवार को गुरुग्राम में आयोजित एक कार्यक्रम में करनाल के डीसी मंदीप सिंह बराड़ को केन्द्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ द्वारा सम्मानित किया गया। उपायुक्त ने बताया कि खुले में शौचमुक्त अभियान की सफलता के लिए जो सम्मान मिला है वह पूरे जिले के लिए हर्ष और गर्व की बात है।
उन्होंने बताया कि गत वर्ष जून माह के अंत में इस अभियान की शुरूआत की गई थी। सबसे पहले स्थानीय कृष्णा मंदिर में ट्रेनर अजय सिन्हा की ओर से जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों, प्रेरकों, खंड समन्वयकों को पांच दिवसीय कार्यशाला के दौरान ट्रेनिंग दी गई थी। प्रशिक्षण में 133 प्रेरकों को अभियान को सफल बनाने के लिए प्रेरित किया गया। इसके बाद से एक के बाद एक गांवों को खुले में शौचमुक्त करने का अभियान आगे बढ़ता गया। उपायुक्त ने कि 133 प्रेरकों और सभी अधिकारियों, पार्षदों, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों, प्रत्येक गांव की निगरानी कमेटियों तथा समाज सेवी संस्थाओं के सहयोग से लोगों की सोच में परिवर्तन लाते हुए लगभग 7 महीनों में जिले को खुले में शौचमुक्त का लक्ष्य प्राप्त किया गया है, जिले की सभी 382 पंचायतें खुले में शौचमुक्त हो चुकी हैं इसके फलस्वरूप ही करनाल को यह सम्मान मिला है।
उन्होंने बताया कि किसी गांव को खुले में शौचमुक्त घोषित करने में किसी प्रकार की कोई जल्दबाजी नहीं की गई। प्रयास रहा है कि लोगों की सोच में परिवर्तन लाया जाए और इसमें सफलता भी मिली। उन्होंने बताया कि हर गांव में लोगों ने भी गांव को खुले में शौचमुक्त बनाने में बढ़चढ़ कर सहयोग दिया हैं। अभियान से जुड़ी कई सफलतम कहानियां भी जिला को खुले में शौच मुक्त करने में सहायक सिद्ध हुई हैं।