जिला मलेरिया व डेंगू अधिकारी डिप्टी सीएमओ सरोज बाला को डेंगू ने अपनी
चपेट में ले लिया है। मजेदार बात यह है कि उन्हें भी अपने बचाव के लिए
प्राइवेट अस्पताल की शरण लेनी पड़ी। हर बार की तरह स्वास्थ्य विभाग उन्हें
भी डेंगू पीड़ित घोषित नहीं कर रहा है। चूंकि उनके डेंगू की पुष्टि भी पेपर
कार्ड से हुई है। टेस्ट में उनके 14 हजार प्लेटलेट्स काउंट किए गए थे।
बहरहाल अब स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
इस समय जिला मलेरिया व डेंगू अधिकारी खतरे से बाहर हैं और अब उनका घर पर ही
इलाज चल रहा है। दरअसल डिप्टी सीएमओ सरोज बाला को करीब 4 दिन पहले बुखार
आया था।
इसके बाद उनका सिविल अस्पताल में ही इलाज चला, लेकिन बुधवार को
उनकी हालत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें करनाल के ही एक निजी अस्पताल
में भर्ती कराया गया, जहां उनका ए-फोरेसिस से इलाज किया गया। इससे
प्लेटलेट्स की संख्या दोगुनी हो जाती है। यहां इलाज मिलने के बाद ही उनकी
हालत में सुधार लाया जा सका। ध्यान रहे कि अब तक प्रदेश के किसी भी सरकारी
अस्पताल में ए-फोरेसिस की व्यवस्था नहीं है। इसे पंचकूला के सरकारी अस्पताल
में लगाया जा रहा है। हालांकि, सपरेटर मशीन जिससे प्लेटलेट्स बनते हैं यह
करनाल के सरकारी अस्पताल में मौजूद है।
अब ठंड से ही प्रशासन को राहत की आस
इस
समय जिले में 85 डेंगू के पॉजिटिव केस हो चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग की
टीम ने 295 मरीजों के रक्त के नमूने लिए हैं। इनमें से 15 केस पेंडिंग हैं।
जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम अब तक डेंगू के मामले में 295 लोगों को नोटिस
तो थमा चुकी है, लेकिन एक भी व्यक्ति का चालान नहीं काटा है। इसलिए नोटिस
देने के बाद भी लोग ध्यान नहीं दे रहे हैं। हाल यह हैं कि हुडा के सेक्टर-7
में ट्यूबवेल नंबर 3 पर चार बार डेंगू का लार्वा मिल चुका है। टीम नोटिस
भी थमा चुकी है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। टीम अब तक 73 हजार
घरों में जाकर लोगों को जागरूक कर चुकी है, लेकिन खुद डेंगू अधिकारी को
डेंगू होने ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
ध्यान रहे कि अब ठंड शुरू हो गई है। ऐसे में अब डेंगू का मच्छर खुद ही
समाप्त हो जाएगा। डेंगू का मच्छर कम तापमान में नहीं पनप पाता।
रात को आठ बजे ही मरीज को मिल पाते हैं प्लेटलेट्स
सिविल
अस्पताल में बेशक सपरेटर मशीन है, लेकिन मरीजों को रात आठ बजे तक
प्लेटलेटस नहीं मिल पाते। चूंकि प्लेटलेट्स के लिए रक्त की जरूरत पड़ती है।
मरीज आने के बाद उसके परिजनों से खून मांगा जाता है। शाम 5 बजे तक रक्त
एकत्रित किया जाता है और उसके बाद उस रक्त से प्लेटलेट्स बनाए जाते हैं। इस
कार्रवाई में 3 घंटे लग जाते हैं। इसके बाद ही रात को 8 बजे प्लेटलेटस
चढ़ाए जाते हैं। यही कारण रहा कि डिप्टी सिविल सर्जन सरोज बाला को भी
प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
कोट
डिप्टी सिविल
सर्जन को क्यों प्राइवेट अस्पताल में जाना पड़ा, यह तो मुझे नहीं पता है।
यह उनका व्यक्तिगत मामला है। हमारे पास सपरेटर मशीन है, लेकिन ए फोरेसिस की
नहीं है। सरोज बाला को बुखार हुआ था। उनका डेंगू का टेस्ट पेपर कार्ड से
हुआ है। वैसे पुष्टि नहीं हुई है।
डॉक्टर, एसएल वर्मा, सीएमओ, करनाल।
कोट
अब
वह ठीक हैं। उन्हें डेंगू हो गया था। उनके प्लेटलेट्स ज्यादा घट गए थे,
इसलिए उन्हें प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्लेटलेट्स 14 हजार तक
चले गए थे।
डॉ. राजेंद्र, डिप्टी सिविल सर्जन
जुंडला में नहीं डेंगू से बचाव की कोई व्यवस्था
जुंडला
के निजी अस्पताल डेंगू और मलेरिया के मरीजों से अंटे पड़े हैं। करीब दो
दर्जन लोग डेंगू व मलेरिया की चपेट में आ चूके हैं। इस मामले के समाधान को
लेकर जुंडला में पूर्व ग्राम पंचायत सदस्य श्रवण सलूजा की अगुवाई में बैठक
का आयोजन किया गया। बैठक में स्वास्थ्य विभाग से तुरंत फॉगिंग कराए जाने की
मांग की है। श्रवण सलूजा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग लापरवाह बना है।
उन्होंने कहा कि अगर स्वास्थ्य विभाग ने जल्द फॉगिंग नहीं करवाई गई तो इस
मामले को उपायुक्त के समक्ष उठाया जाएगा। सलूजा ने बताया कि कई मरीज तो
करनाल सहित आसपास के सरकारी व निजी अस्पतालों में इलाज करवाने के लिए भर्ती
हैं। डेंगू के फैलने से कस्बे के लोगों में भय का माहौल बना है। इस मौके
पर माता बाला सुंदरी मंदिर कमेटी प्रधान रामपाल रोड़, अजमेर मलिक, बाबा
राधेश्याम गुप्ता, इंद्र सेहरा, देवी दयाल गुप्ता, वेद शर्मा, मदन सरदाना,
इंद्र सिंगला, बिट्टू शर्मा, कुलदीप शर्मा सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।