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महिलाओं में अकेलापन बढ़ा रहा अवसाद

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सोनाली शर्मा
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करनाल। तीस साल की उम्र पार कर चुकी महिलाओं में अकेलापन गंभीर अवसाद और तनाव बढ़ा रहा है, इस कारण उन्हें आत्महत्या के ख्याल आ रहे हैं। यह बात नागरिक अस्पताल के मनोरोग विभाग में अवसाद और तनाव से परेशान होकर उपचार कराने आई महिलाओं की काउंसलिंग के दौरान सामने आई है। हर रोज दो से तीन ऐसे मामले नागरिक अस्पताल में आ रहे हैं। हर दस में दो महिलाएं इस समस्या से परेशान हैं। चिकित्सकों के अनुसार अवसाद और तनाव को जल्द खत्म नहीं किया गया तो सिजोफ्रेनिया बीमारी हो सकती है। इस बीमारी में खुद से बातें करना, बड़बड़ाना, किसी की आवाजें बेवजह सुनाई देना, अंधविश्वास और किसी के आसपास होने का आभास होता है। गंभीर तनाव और घबराहट की वजह से ही महिलाओं को हाथ काटकर, छत से कूदकर, जलकर, नहर में कूद कर या जहर खाकर आत्महत्या करने जैसे ख्याल आते हैं। चिकित्सक ने बताया कि इन महिलाओं का इलाज चल रहा है और अब उनकी तबियत ठीक हो रही है। संवाद
केस 1
38 वर्षीय महिला को एक साल से भ्रम था कि कोई उससे बातें करता है। महिला का पति उसे जांच के लिए डॉक्टर के पास लाया। काउंसलिंग के बाद उसने बताया कि वह रात में किसी से बातें करती है और वह उसे छत से कूदने के लिए कहता है। इससे वह सारे दुखों से मुक्त हो जाएगी। डॉक्टर ने काउंसलिंग और दवाई से महिला का इलाज किया और अब वह ठीक है।
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केस 2
बहन द्वारा इलाज के लिए लाई गई 32 वर्षीय महिला ने बताया कि वह अकेले रहकर तंग हो गई है। पति को शराब पीने की आदत है, और कोई उसकी सुनने वाला नहीं है। उसके मन में नहर में कूदकर आत्महत्या करने के ख्याल आते हैं। डॉक्टर ने महिला को अपने पड़ोसियों और मां-बहन से मन की बात करने की सलाह दी और इलाज भी किया। अब महिला पहले से ठीक है।
केस 3
44 वर्षीय महिला को उसका पति डॉक्टर के पास ले गया। महिला रात में अकेले ही खुद से बातें करती थी। पति ने बताया कि वह नहर में कूद कर अपने बच्चों के साथ जाने की बात करती है। डॉक्टर ने बताया कि ऐसा तनाव के कारण हुआ है। एक माह के इलाज के बाद महिला की हालत सामान्य हुई।
सिजोफ्रेनिया के लक्षण
सिजोफ्रेनिया एक मानसिक विकार है जिसमें तनाव के कारण किसी दूसरे का अपने नजदीक होने का आभास होता है, आवाजें सुनाई देती हैं, भूत-प्रेत में विश्वास होने लगता है, अकेले में बड़बड़ाना और आत्महत्या जैसे ख्याल आते हैं। गंभीर अवसाद, तनाव और घबराहट के कारण ऐसा होता है।
तनावग्रस्त होने के लक्षण
मनोरोग चिकित्सक डॉ मनन गुप्ता के अनुसार जब कोई व्यक्ति तनाव में होता है तो उसका चेहरा मुर्झाया होता है। कम बोलना, खोया-खोया रहना, चिड़चिड़ापन, बेचैनी, तेज बोलना, नींद न आना, कम खाना, शारीरिक रूप से कमजोर होना और सबसे दूर रहना अवसाद और तनाव ग्रस्त होने के लक्षण हैं।
बातचीत से हलका करें मन
बातचीत ही तनाव का एकमात्र इलाज है। सबसे पहले समस्या को जानें फिर दूसरों से शेयर करें। महिलाओं को अपने मन की बात दोस्त, मां, बहन, पति आदि को बतानी चाहिए ताकि मन का बोझ कम हो। तनाव अगर मस्तिष्क को प्रभावित कर रहा हो तो समय रहते डॉक्टरों से सलाह लेनी चाहिए।
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कई लोग डॉक्टरों से इलाज करवाने से कतराते हैं जबकि इसमें छिपाने वाली कोई बात नहीं है। जब अवसाद और तनाव की सीमा पार हो जाती है तो मानसिक विकार पनपते हैं। इसलिए किसी को भी ऐसी समस्या हो तो तुरंत जांच करवानी चाहिए।
-डॉ मनन गुप्ता, मनोरोग चिकित्सक, नागरिक अस्पताल
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