करनाल शहर का कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर शुरू से ही चर्चा में रहा है। सोमवार को नीलोखेड़ी से रेफर होकर ट्रामा सेंटर में इलाज के लिए आए एक डेंगू के मरीज को ट्रामा सेंटर में कार्यरत एक डॉक्टर ने एडमिट करने से मना कर दिया। डॉक्टर ने मरीज को दवाई देकर घर जाने की बात कही। पाला राम वासी शामगढ़ ने आरोप लगाया कि उसका भतीजा सतीश डेंगू से पीड़ित है।
नीलोखेड़ी के सरकारी अस्पताल से डॉक्टरों ने उसे ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। जब वह उसे दोपहर एक बजे कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के ट्रामा सेंटर में लेकर आए तो ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने सतीश को एडमिट करने से साफ मना कर दिया। डॉक्टर ने कहा कि मरीज को घर ले जाओ। इसके बाद परिजनों ने रोष जताया और चंडीगढ़ से किसी डॉक्टर का फोन करवाया तो उसके बाद ही उक्त डॉक्टर ने मरीज को दाखिल किया। इसी तरह अन्य मरीजों के साथ भी डॉक्टर ने ठीक बर्ताव नहीं किया। इससे ट्रामा सेंटर में आने वाली काफी मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यहां तक कि कई मरीजों ने डॉक्टर पर धक्के मारकर बाहर निकालने का आरोप भी लगाया।
वर्जन
मेरे संज्ञान में अभी यह मामला नहीं आया है। अगर मरीजों को डॉक्टर के कारण किसी भी प्रकार की परेशानी आई है तो इस मामले की जांच की जाएगी।
- डॉ. योगेश शर्मा, उप चिकित्सा अधिकारी कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, करनाल