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नगर निगम कार्यालय पर दो माह के लिए धरना प्रदर्शन और सभा पर लगा प्रतिबंध

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जिलाधीश निशांत कुमार यादव ने नगर निगम आयुक्त के पत्र का संज्ञान लेते हुए नगर निगम कार्यालय में अलग-अलग संगठनों द्वारा धरना-प्रदर्शन आदि को देखते हुए धारा 144 लागू कर दी है। साथ ही निगम कार्यालय के 500 मीटर के दायरे में धरना देने व प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस आदेश से विभिन्न कर्मचारी संगठनों में जहां खलबली मच गई है वहीं सख्त नाराजगी भी जाहिर की है।
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हाल में नपा कर्मचारी संघ की राज्य स्तरीय बैठक करनाल नगर निगम के यूनियन कार्यालय पर आयोजित की गई थी। जिसमें 30 जुलाई से अगस्त महीने की विभिन्न तारीखों में आंदोलन करने की बात कही गई थी। नपा कर्मचारी संघ के प्रस्तावित आंदोलन के मद्देनजर निगमायुक्त डा. मनोज कुमार ने जिलाधीश निशांत कुमार यादव को पत्र लिखा था। जिसमें अलग-अलग व्यक्तियों, संगठनों द्वारा प्रदर्शन से किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना रोकने, सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और आम नागरिकों की सुविधा को देखते हुए धरना प्रदर्शन पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था।
ड्यूटी में रहने वालों पर नहीं होगा लागू
निगमायुक्त के पत्र का संज्ञान लेते हुए जिलाधीश निशांत कुमार यादव ने आईपीसी 1973 की धारा 144 के तहत पूर्णत: प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए हैं। जिससे नगर निगम कार्यालय के 500 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के धरने, प्रदर्शन या जनसभा करने पर पूर्ण प्रतिबंध लग गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और अगले दो माह तक लागू रहेगा। ड्यूटी पर तैनात पुलिस, अधिकारियों व कर्मचारियों पर यह आदेश लागू नहीं होगा। आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए पुलिस अधीक्षक व आयुक्त नगरनिगम को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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उपायुक्त ने यह आदेश शायद नपा कर्मचारी संघ के प्रदेशव्यापी आंदोलन को देखते हुए दिया है। प्रांतीय नेतृत्व ने आंदोलन की रूपरेखा तय कर दी है। अब प्रतिबंध लगे या न लगे, प्रांतीय नेतृत्व का जो फैसला है, उसके आधार पर कर्मचारी अपना आंदोलन करेंगे। जिला प्रशासन को जो कार्रवाई करनी है, वह करें।
-वीरभान बिड़लान जिला प्रधान नपा कर्मचारी संघ करनाल।
-हमारा आंदोलन तो शांतिपूर्ण ही होता है। फिर भी जिला प्रशासन अपना कार्य करे। 31 जुलाई को पानीपत में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक है, उसमें जो भी निर्णय लिया जाएगा। उसके अनुसार कोरोना की हिदायतों के पालन के साथ शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन किया जाएगा। जिलाधीश द्वारा लगाए गए प्रतिबंध पर भी प्रांतीय बैठक में चर्चा की जाएगी।
-विजय शर्मा, जिला प्रधान अग्निशमन नपा कर्मचारी संघ करनाल
नगर निगम में डेपुटेशन पर रखे कर्मचारियों को वापस उनके विभागों में भेजने की मांग को लेकर दो दिन पहले पीडब्ल्यूडी मेकेनिकल वर्कर्स यूनियन का प्रतिनिधिमंडल नगर निगम कमिश्नर से मिला था। 120 कर्मचारी नगर निगम से वापस विभागों में भेज दिए हैं लेकिन 11 कर्मचारी अभी भी निगम में कार्यरत हैं। यूनियन ने सात दिन के अंदर इन कर्मचारियों को वापस नहीं भेजने पर आंदोलन की चेतावनी दी थी। इसी वजह से धारा 144 लगाई है।
-कृष्ण शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, पीडब्ल्यूडी मेकेनिकल वर्कर्स यूनियन
कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए। प्रशासन ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए कर्मचारियों के आंदोलन को दबाने की कोशिश की है। वे इसकी निंदा करते हैं। यह कर्मचारियों की मांग को दबाने का प्रयास है। मांग उठाना कर्मचारियों का संवैधानिक अधिकार है। इसे दबाने की कोशिश न की जाए।
-मलकीत सिंह, जिला प्रधान, सर्व कर्मचारी संघ
किसी विभाग में तैनात कर्मचारी अपनी समस्या उठाते हैं तो उनके धरने-प्रदर्शन पर धारा लगाना गलत है। यह कर्मचारी की आवाज को दबाने की कोशिश की गई है। सरकार का यह रास्ता गलत है। कर्मचारियों की बात सुनी जानी चाहिए कि वह किस वजह से धरना-प्रदर्शन करते हैं। उन्हें बातचीत के लिए बुलाया जाए। ऐसे कर्मचारी अपनी समस्या नहीं उठा सकते। यह लोकतंत्र में तानाशाही है।
-सुरेश लाठर, प्रदेश चेयरमैन, हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ
यह जनता के मौलिक अधिकार का हनन है। कोई भी कर्मचारी संगठन अपनी आवाज उठाने के लिए धरना-प्रदर्शन कर सकता है। इस तरह प्रशासन दूसरे विभागों में भी प्रतिबंध लगा सकता है। यह एक प्रकार से अघोषित एमरजेंसी है। कर्मचारियों को शोषण व उत्पीड़न के खिलाफ अपनी आवाज उठाने का हक है। उसे दबाना नहीं चाहिए।
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-ऊधम सिंह राठी, पूर्व राज्य कोषाध्यक्ष, हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ
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