संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। अगर इरादे दृढ़ हों तो दिव्यांगता और गरीबी सफलता में बाधा नहीं बन सकती। इस बात को चरितार्थ कर दिखाया निसिंग के वार्ड 13 निवासी पवन कुमार ने। पवन ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में अपने हुनर का लोहा मनवाया। उसने बताया कि वह दाएं हाथ से दिव्यांग है। बचपन से ही वह क्रिकेटर बनना चाहता था। उसने गरीबी और दिव्यांगता को कभी खुद पर हावी नहीं होने दिया और जिला स्तर पर खेलने के बाद राज्य स्तर पर उम्दा प्रदर्शन कर भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम में जगह बनाई। वह लेग स्पिनर के रूप में टीम में खेलता है और क्रिकेट के माध्यम से देश का नाम विश्व में चमकाना चाहता है। हाल में चेन्नई में हुई सीरीज में भी वह मैन ऑफ द सीरीज रहा जिसमें उन्होंने 10 विकेट लिए।
10 विकेट लेकर नॉर्थ जोन में बनाई थी जगह
2016 में हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच ट्राई सीरीज आयोजित हुई। जिसमें तीन मैचों में 10 विकेट लिए और उसका चयन नॉर्थ जॉन में हो गया। ईस्ट जॉन के खिलाफ खेलते हुए चार मैचों में 15 विकेट लिए जिसमें एक मैच में लिए गए 5 विकेट भी शामिल हैं जिसके लिए उसे मैन ऑफ द मैच चुना गया। पवन ने बताया कि अच्छे प्रदर्शन की वजह से उसका चयन राष्ट्रीय टीम में हुआ। 2018 में अफगानिस्तान की टीम भारत खेलने आई। मुंबई में आयोजित सीरीज में पहले ही मैच में तीन विकेट लेकर जीत में अहम भूमिका निभाई और सीरीज में कुल 10 विकेट चटकाए। जिसकी बदौलत भारत ने सीरीज अपने नाम की।
देश के लिए वर्ल्ड कप जीतना सपना
पवन ने बताया कि 2020 में हुए विश्व कप को लेकर वह भारत के लिए चयनित टीम का हिस्सा थे लेकिन एक दुर्घटना की वजह से वह नहीं खेल पाए। देश के लिए वर्ल्ड कप जीतना उनका सपना है जिसको लेकर वह मेहनत कर रहे हैं।