समर्पण, निष्ठा एवं भक्ति का अनूठा संगम
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जैन तीर्थस्थान महाप्रभावी श्री घण्टाकर्ण महावीर देवस्थान पर विशेष कृपा दिवस कृष्ण चौदस के उपलक्ष्य में समर्पण, निष्ठा एवं भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। सूर्योदय से श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हुआ और यह क्रम देर शाम तक चलता रहा। दैवी कृपा का मनोरथ संजोए स्थानीय एवं बाहर के स्थानों से श्रद्धालु आशीष से अपनी झोलियां भरने के लिए उपस्थित रहे।
सर्वप्रथम श्री घण्टाकर्ण बीजमंत्र का सामूहिक जाप हुआ। साध्वी जागृति, निशा जैन, जयपाल सिंह, नीलू जैन, सुनीता जैन, मेघा जैन आदि ने भक्ति-गीतों से सभी को भाव विभोर कर दिया। यह पावन भूमि यहां बार-बार आना, मेहरां वालिया दादा रक्खी चरणां दे कोल, मेरे घर के आगे दादा तेरा मंदिर बन जाए, आदि भजनों ने भक्तों को झूमने के लिए विवश किया।
महा साध्वी प्रमिला ने कहा कि श्री घण्टाकर्ण देवता जैन एवं हिंदू परंपरा के प्रभावशाली देव हैं जिनके आशीर्वाद से भक्तों के सारे मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं। भक्ति में अनूठी शक्ति होती है जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव मंदिर में नियमित रूप से आने वाले भक्तजन महसूस कर सकते हैं। भक्ति में भाग्य की लकीरों को बदलने तथा दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने की असीम क्षमता है। दैवी शक्तियां चढ़ावे, पूजा, आरती, प्रक्षालन, विधि विधानों से प्रसन्न नहीं होती बल्कि भावपूर्ण समर्पण से उनका कृपा प्रसाद मिलता है। प्रीतिभोज तथा आरती का लाभ निशा जैन, अंबाला छावनी ने लिया। श्री घण्टाकर्ण देवता के जयकारों के साथ समागम संपन्न हुआ।