माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पिछले दिनों लघु सचिवालय स्थित ई-दिशा केंद्र में 25 लाख रुपये की चोरी होने के बाद अब परिवहन विभाग भी अलर्ट हो गया है। आरटीए कार्यालय में भुगतान की व्यवस्था को ऑनलाइन किया जा रहा है। टैक्स, चालान का जुर्माना या पासिंग सहित अन्य सेवाओं का शुल्क अब यहां डेबिट-क्रेडिट कार्ड से ही जमा किया जाएगा। इसके लिए विभाग के निरीक्षकों को पीओएस (प्वॉइंट ऑफ सेल) मशीन चलाने का प्रशिक्षण दिया गया है। ऐसे में अब जिस विंडो की लोग सेवा लेंगे, वहीं पर ही फीस का भुगतान होगा। सेवा शुल्क जमा कराने के लिए लोगों को कैश विंडो पर जाने की जरूरत नहीं होगी।
आरटीए कार्यालय में दी जाने वाली सेवाओं में नकद लेन-देन को कम करने के लिए ही अधिकारियों की ओर से यह नई व्यवस्था की जा रही है। वर्तमान में पासिंग, टैक्स, आरसी, परमिट और ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य कार्यों के लिए अलग-अलग विंडो है। जहां पर लोग अपनी फाइल जमा कराते हैं। फाइल अप्रूव होने के बाद फीस जमा कराने के लिए लोगों को कैशियर के पास जाना पड़ता है। जहां सभी सेवाओं की एक लाइन होने के कारण लोगों को काफी देर तक इंतजार भी करना पड़ता है। इससे जहां उनके कार्यों में देरी होती है, वहीं लाभार्थी को भी लंबी प्रक्रिया से जूझना पड़ता है। इसके अलावा सभी सेवाओं का कैश भी एक ही कर्मचारी के पास जमा होता है। लेकिन अब नई व्यवस्था के लागू होने के बाद संबंधित विंडो पर ही पीओएस मशीन के जरिये फीस का भुगतान किया जा सकेगा। ऐसे में लोगों का समय भी बचेगा और कार्यालय में कैश संभालने का बोझ भी कर्मचारियों पर कम होगा। आरटीए कार्यालय में कुल 12 सेवाओं के लिए पूरे दिन में 500 से ज्यादा लोग पहुंचते हैं। ब्यूरो
दो मार्च को हुई थी 25 लाख की चोरी
दो मार्च को लघु सचिवालय के ई-दिशा केंद्र के लॉकर से 25 लाख रुपये चोरी हुए थे। आज तक पुलिस के हाथ खाली हैं और मामले का खुलासा नहीं कर पाई। वारदात को अंजाम देते हुए चोरों ने सरल केंद्र के कमरे का ताला तोड़ने के बाद लॉकर में रखी नकदी पर हाथ साफ किया था। इस वारदात को अंजाम देने वाले पकड़े न जाएं, इसलिए वे यहां लगे सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर को भी अपने साथ ले गए थे।
तीन पीओएस मशीनें मंगवाई हैं। इसी सप्ताह से ऑनलाइन फीस व जुर्माना भुगतान शुरू हो जाएगा। निरीक्षकों व स्टाफ को इसका प्रशिक्षण दिया जा चुका है। लोगों को नकदी लाने में परेशानी न हो व कार्यालय में भी नकदी कम रहे, इसलिए इस व्यवस्था को लागू कर रहे हैं। इससे दलालों से भी मुक्ति मिलेगी। क्योंकि जिस व्यक्ति की फाइल होगी, उसी के डेबिट-क्रेडिट कार्ड से ही भुगतान किया जाएगा। - विजय देसवाल, डीटीओ करनाल।