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बोर्ड परीक्षा के परिणाम सुधार पर डीसी ने किया मंथन

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कैसे सुधरे बोर्ड परीक्षा का परिणाम..? विषय पर डीसी ने शिक्षा अधिकारियों और 174 स्कूल मुखिया हमें ऐसे गुरु जी की जरूरत नहीं, जो अपना काम ईमानदारी से ना करें। ऐसे शिक्षकों और स्कूल मुखिया को फोर्सली रिटायरमेंट देना चाहिए। सुविधाओं और व्यवस्थाओं के बाद भी अगर हम बेहतर परिणाम नहीं ला पा रहे हैं, तो हमें सरकार से सैलरी पाने का भी हक नहीं है। ये शब्द डीसी निशांत यादव ने कहे। दरअसल, सोमवार को डीसी डा. मंगलसैन आडिटोरियम में जिलेभर के सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों व शिक्षा अधिकारियों की बैठक ले रहे थे।
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सरकारी स्कूलों का बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम कैसे सुधरे..? इसको लेकर डीसी निशांत यादव ने जिला शिक्षा अधिकारियों और 174 हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के प्रिंसिपलों की बैठक ली। बैठक में जब खंडवार स्थिति की रिपोर्ट देने के लिए बीईओ को कहा गया तो उन्होंने जहां अपनी पिछली बार की गलतियों को बताया, वहीं इस बार के लिए भी प्रिंसिपलों द्वारा तय की योजनाओं को गिनवाया। उन्होंने कहा कि सभी प्रिंसिपल लक्ष्य प्राप्ति के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन वे ये भूल गए कि बेहतर परीक्षा परिणाम के लिए डीईओ, डीईईओ, डिप्टी डीईओ और डीपीसी भी स्कूलों में विजिट कर हालात जान रहे हैं। बीईओ की रिपोर्ट के बाद डीईईओ राजपाल ने सभी बीईओ द्वारा बताई गई योजनाओं का हवाला देते हुए वास्तविक हालात सामने रख दिए। उन्होंने कहा कि योजनाएं तो बनी हैं, लेकिन इनके अनुसार काम नहीं हो रहा। ऐसे में स्कूल प्रिंसिपलों को खुद सोचना चाहिए कि वे कहां खड़े हैं? इस पर डीसी ने सख्त लहजे में ऐसे अधिकारियों को चेतावनी दी। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा निदेशालय की सहायक निदेशक शशी बधवार, डीपीसी सपना जैन, डिप्टी डीईओ परमजीत चहल, सीएमजीजीए अपूर्वा शैल्के, डायट प्रिंसिपल रोहताश शर्मा व सभी खंड शिक्षा अधिकारी मौजूद रहे।
ये रहे इस बार के टारगेट
इस बार जिले को 10वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम 65 और 12वीं का परिणाम 85 प्रतिशत लाने का टारगेट दिया गया है। जबकि वर्ष 2018-19 में 10वीं का 44 और 12वीं का 74 प्रतिशत परिणाम रहा था।
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जानिए.. कितना प्रतिशत का अंतर है लक्ष्य प्राप्ति में-
कक्षा 2019-20 का लक्ष्य 2018-19 अंतर
10वीं 65 44 21
12वीं 85 74 11
खराब रिजल्ट वाले स्कूलों के प्रिंसिपलों से डीसी ने पूछा कारण.. तो दिए अटपटे जवाब
सर.. हम बच्चों को मोटिवेट कर रहे
सबसे पहले उपलानी स्कूल के हेड से डीसी ने कारण पूछा तो उन्होंने जवाब दिया कि हमारा रिजल्ट स्क्रीन पर कम दिखाया गया है। रिजल्ट 25 प्रतिशत है। इस पर डीसी बोले ये ज्यादा कैसे? तो उन्होंने कहा कि हम बच्चों को मोटिवेट कर रहे हैं।
अरे.. तुक्का मत मारो, बच्चे पास करवा दो
जबाला स्कूल मुखिया से जब कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि तीन माह पहले ही उन्होंने ये स्कूल ज्वाइन किया है। हमारे स्कूल का रिजल्ट 7 प्रतिशत नहीं था। डीसी ने पूछा कितना? तो बोले करीब 65 प्रतिशत। इस पर डीसी ने कहा कि तुक्का मत मारो। बच्चों को पास करवा दो। ये ही काफी है।
यहां तो मैं अब आया.. मेरा पिछला स्कूल टॉप था
पंगाला स्कूल के हेड से जब डीसी ने कारण पूछा तो छूटते ही बोले। सर, मैं यहां तो 22 अगस्त को आया था। इसका पता नहीं, मेरे पिछले स्कूल का रिजल्ट ठीक था। 18 बच्चे हैं अब मेरे स्कूल में। सभी पास हो जाएंगे।
मेरे पास मैथ टीचर नहीं, तभी रिजल्ट खराब
डाकवाला स्कूल के हेड ने कहा कि सर मेरे पास पिछले साल मैथ टीचर नहीं था। तभी रिजल्ट खराब रहा। इस बार टीचर मिल गया है। अब हम पीछे नहीं रहेंगे।
एसीआर में दर्ज होगी रिजल्ट की रिपोर्ट : डीसी
डॉ. मंगलसैन सभागार में हुई बैठक में डीसी ने प्रिंसिपलों को लक्ष्य प्राप्ति के लिए टिप्स देने के साथ-साथ चेतावनी भी दी कि, मई में घोषित होने वाले बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम में जिस विद्यालय का परिणाम खराब होगा, उसके शिक्षक के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। शिक्षक की एसीआर में भी शून्य रिपोर्ट भेजी जाएगी। यदि किसी बीईओ ने गलत रिपोर्ट दी तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। वहीं, अच्छा कार्य करने वाले शिक्षको को भी गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित किया जाएगा।
प्री बोर्ड का रिजल्ट पोर्टल पर करे अपलोड
डीईओ रविन्द्र चौधरी ने कहा कि बोर्ड परीक्षाओं को मात्र 20 दिन बचे हैं, ऐसे में सभी तैयारी में जुटे। पूरे प्रदेश के लिए जो रणनीति बनाई गई है, उसे फॉलो करें। उन्होंने कहा कि प्री बोर्ड परीक्षाओं के संपन्न होने के बाद 14 फरवरी तक सभी स्कूल, विभाग के पोर्टल पर छात्रों के अंक अपलोड करेंगे। ताकि स्कूल वाइज स्थिति पता चले।
17 फरवरी को स्कूलों में मेगा पीटीएम
डीसी ने कहा कि 17 फरवरी को सभी स्कूलों में होने वाली मेगा पेरेंट्स टीचर मीटिंग में कमजोर बच्चों के माता पिता को कहें कि बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दें, पीटीएम में सरपंच जैसे जन प्रतिनिधियों को भी शामिल करें। जिन बच्चों की हाजिरी स्कूल में कम रही, उन पर ज्यादा ध्यान दें। ऐसे बच्चे भी रिजल्ट खराब करते हैं।
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स्कूल मुखिया और विद्यार्थियों को डीसी ने दिए टिप्स-
-विद्यार्थियों को क्लास में कोर यानि महत्वपूर्ण सवालों के जवाब करवाए जाएं।
-पिछले पांच सालों के प्रश्न पत्र और मॉडल टेस्ट पेपर का अभ्यास कराएं, जोकि बोर्ड की साइट पर हैं।
-अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाएं।
-पाठयक्रम पूरा हो जाने के बाद अब उसका रिविजन करवाया जाए। कमजोर बच्चों पर ज्यादा ध्यान दें।
-लिखने की प्रैक्टिस पर जोर देकर पूरा चैप्टर लिखवा दें।
-पहले उन सवालों की तैयारी करवाएं जो आसान हैं, मुश्किल बाद में लें, ताकि विद्यार्थिों के दिमाग पर जोर ना पड़े।
-ऐसे सवालों को करवाया जाए, जो बार-बार परीक्षा में आते हैं।
जानिए.. पिछले दो सालों में किस खंड का कितना रहा परिणाम
खंड : करनाल
कक्षा 2017-18 2018-19
10वीं 38.1 48.6
12वीं आर्ट्स 64.30 93.38
12वीं कॉमर्स 67.45 93.93
12वीं साइंस 65.85 89.05
खंड : घरौंडा
कक्षा 2017-18 2018-19
10वीं 43.02 48.95
12वीं आर्ट्स 59.19 83.41
12वीं कॉमर्स 61.40 76.81
12वीं साइंस 72.72 82.19
खंड : इंद्री
कक्षा 2017-18 2018-19
10वीं 45.7 40.97
12वीं 66.85 74.11
खंड : निसिंग
कक्षा 2017-18 2018-19
10वीं 53.07 44.53
12वीं 76.88 80.53
खंड : नीलोखेड़ी
कक्षा 2017-18 2018-19
10वीं 35.16 50.78
12वीं 50.27 72
खंड : असंध
कक्षा 2017-18 2018-19
10वीं 45 28.74
12वीं 59 63.18
2019 के परीक्षा परिणाम में इन स्कूलों की रही कमजोर परफोर्मेंस-
-निसिंग खंड का जीएचएस बालू का शून्य प्रतिशत।
-करनाल का जीएसएसएस डाकवाला गुजरान का 17 प्रतिशत।
-घरौंडा खंड का जीएसएसएस मूनक का 17 प्रतिशत।
-असंध खंड का जीएचएस पंगाला का 18 प्रतिशत।
-असंध खंड का जीएचएस शेखुपूरा मंचूरी का 19 प्रतिशत।
-असंध खंड का जीएचएस चोरकारसा का 20 प्रतिशत।
-घरौंडा खंड का जीएचएस बसताड़ा का 21 प्रतिशत।
-घरौंडा खंड का जीएसएसएस कुताना का 22 प्रतिशत।
-असंध जीएचएस मूंड का 23 प्रतिशत।
-निसिंग खंड का जीएसएसएस ब्रास का 23 प्रतिशत।
-करनाल का जीएसएसएस उचाना का 23 प्रतिशत।
-नीलोखेड़ी खंड का जीएचएस तखाना का 23 प्रतिशत।
-करनाल का जीएचएस नलवीपुर का 23 प्रतिशत।
-इंद्री खंड का जीएसएसएस इंद्री का 24 प्रतिशत।
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