डीएपी की रैक आने के बाद रेलवे स्टेशन पर जुटी किसानों की भीड़, कलायत और राजौंद के क्षेत्र में गेहूं की बिजाई होना है बाकी
कैथल की सोसायटी को लाइसेंस नहीं मिलने से डीएपी बांटने में हो रही परेशानी वर्ष 2022 में हुआ था समाप्त
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में इन दिनों गेहूं की बिजाई से पहले डीएपी खाद नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। वहीं, वीरवार को डीएपी की रैक आने के बाद रेलवे स्टेशन पर ही किसानों की भीड़ जुट गई। ऐसे यहां मौके पर मौजूद कर्मियों ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने और कुछ कट्टे यहां से बांटने पड़े। इस तरह जींद रोड स्थित सरकारी केंद्रों पर पहुंचने से पहले ही डीएपी खाद बंट गया था। जबकि इस समय कलायत और राजौंद के क्षेत्र में गेहूं की बिजाई होना बाकी है। वहीं कैथल की सोसायटी को डीएपी खाद बांटने का लाइसेंस अभी तक नहीं मिल पाया है। यह लाइसेंस वर्ष 2022 में समाप्त हुआ था। करीब साढ़े 12 हजार की फीस भरने के बावजूद यह नहीं मिल पा रहा है। लाइसेंस न मिलने के चलते डीएपी खाद नहीं बांटी जा सकी है।
वीरवार को रैक के माध्यम से डीएपी के 27 हजार 973 बैग आएं हैं, जो 13 हजार 70 मीट्रिक टन है। इसमें 10 हजार 520 बैग हैफेड को दिए गए हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित पैक्स में भेज दिए हैं। गौरतलब है कि एक बैग 40 किलो का होता है। बता दें कि जिले में एक लाख 60 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बिजाई होनी है। अब तक 45 हजार हेक्टेयर के करीब बिजाई गेहूं की हो चुकी है। वहीं, गेहूं के बीज को लेकर भी किसान परेशान हैं। कई किस्मों का बीज किसानों को नहीं मिल रहा है। बीज न मिलने के कारण किसानों को प्राइवेट केंद्रों पर खरीदना पड़ रहा है, जो 300 से 400 रुपये प्रति बैग महंगा मिल रहा है।
यह बोले किसान-
27 हजार 400 बैग पहुंचे है | 10 हजार 520 बैग सोसाइटी में जा रहे है। 16 हजार 900 बैग प्राइवेट डिस्ट्रीब्यूटर रिटेलेरो के पास जा रहे हैं। किसान आधार कार्ड दिखाकर अब डीएपी खाद प्राप्त कर सकते है। जिले में 80 प्रतिशत खाद की आपूर्ति हो चुकी है। 20 प्रतिशत अगले कुछ दिनों में आ जाएगा।
- तिलक, कर्मी।
खाद लेने के लिए किसान को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सब बड़े बड़े डीलर स्टॉक करने लग रहे हैं। डीएपी का इंतजार करते करते खेत सुख गये है। कई जगह किसानों की ओर से बिना डीएपी बुआई की जा रही है।
रणधीर बुढाखेडा, किसान
प्राइवेट केंद्र वालों ने लूट मचा रखी है। कोई 1600 रुपये का कट्टा दे रहा है कोई 1700 रुपये का। लुका छिपी का खेल चल रहा है। रैक का पता लगा था तो खाद के लिए आए थे। अब बता रहे हैं कि इसमें से आधा प्राइवेट संचालकों को दिया जाएगा। हमें तो जब मिल जाएगा, तभी तसल्ली होगी।
मंदीप कोयल, किसान