माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। यमुना से बाढ़ का खतरा बरकरार है। हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी की मात्रा कम हुई है लेकिन लगातार बारिश के कारण स्थिति सामान्य नहीं हो रही। बुधवार को हथिनीकुंड बैराज से 1.65 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह दर्ज किया गया। हालांकि यमुना के पानी ने नए इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है। नदी का पानी हरियाणा और उत्तर प्रदेश में करीब दस किलोमीटर के दायरे में फैल चुका है।
करनाल जिले के कुंजपुरा, घरौंडा और इंद्री के करीब 34 गांवों के खेतों में यमुना का पानी घुस चुका है। इससे दस हजार एकड़ से ज्यादा में फसल खराब हो रही हैं। ज्यादातर सब्जियों को नुकसान हुआ है। गन्ने की फसल गलने के बाद पीली पड़ने लगी है। फिलहाल नुकसान का आकलन मुश्किल है। प्रशासन और पटवारियों के सर्वे से नुकसान की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
खंड के डबकौली खुर्द, नलवी आदि गांव पूरी तरह कट चुके हैं। हरियाणा को उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाला शेरगढ़ टापू का पुल डूब चुका है। यहां 20 साल पहले नया पुल बनाने के लिए पिलर तो लगाए गए थे लेकिन पुल का निर्माण नहीं हो सका। पुल से वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद है। लोगों को दूसरे गांव जाने के लिए तैरकर, ट्रैक्टर पर या ट्यूब का सहारा लेना पड़ रहा है। डबकौली खुर्द बाढ़ के पानी से चारों ओर से घिर चुका है। गांव के चारों ओर चार से छह फीट तक पानी भरा है।
लगातार बारिश से भी नुकसान हो रहा है। इंद्री के कलसौरा गांव में बुधवार को दो घरों की छत गिर गई। हादसे में एक महिला घायल हो गई। बलड़ी गांव में भी एक घर की छत गिरी है। हालांकि इसमें किसी को जान माल की हानि नहीं हुई है। इंद्री के ही रंदौली गांव में बारिश का पानी भर गया है। इससे करीब 15 घर जलमग्न हो चुके हैं।
इन गांवों के खेतों में भरा यमुना का पानी:
यमुना के समीपवर्ती इंद्री, कुंजपुरा और घरौंडा खंड के गांव चोरा, चोरपुरा, डबकौली, डबकोली कलां और खुर्द, घीर खालसा, वाणी खेड़ा, सिंकदरपर, शेरगढ़ टापू, नबीपुर, ढाकवाला, मंगलौरा, मंगलौरा कदीम, मोहनपुर, चंडीपुर पार, मुस्ताफाबाद, दबरकीपुर, चकभारी, नलवी पार, भारी, चुसाना, नसीरपुर, खराजपुर, जरौली, मोहद्दीनपुर, मोदीपुर, छपरा जापती, बिशनगढ़, तातारपुर, कमालपुर, गदरिया, हलवाना, नागल, सैदपुर के खेतों में पानी भर चुका है।
बाढ़ की वजह से फंसे लोग
बाढ़ की वजह से यमुना के समीपवर्ती गांव में उत्तर प्रदेश से काम करने आए लोग भी फंस गए हैं। बाढ़ ने उनका वापसी का रास्ता रोक दिया है। ज्यादातर मजदूर खेती करने, कुछ ईंट भट्ठों पर काम करने तो कुछ मकान निर्माण के कार्य के लिए हरियाणा के गांवों में आए थे। गांव के लोगाें ने उनको ठहरने के लिए जगह दी है। उत्तर प्रदेश के रंदौली के श्रीराम और बिट्टू राणा ने बताया कि पिछले चार दिन से वे डबकौली कलां में रह रहे हैं। जब पानी कम होगा तब वापसी होगी।
प्रशासन की तैयारी नहीं
शेरगढ़ टापू के पुल पर पुलिस और प्रशासन के कर्मचारी मौजूद मिले। ये पुल हरियाणा को उत्तर प्रदेश से जोड़ता है। लेकिन बाढ़ की चपेट में आए चोरा, चोरपुरा, डबकौली जैसे इलाके में न कोई पुलिसकर्मी तैनात था न ही प्रशासन का अधिकारी। डबकौली कलां और डबकौली खुर्द को जोड़ने वाले पुल के ऊपर से यमुना का पानी जा रहा है। लेकिन यहां कोई कश्ती तक नहीं पहुंचाई गई है। लोगों को जोखिम उठाकर यमुना का पानी पार करना पड़ रहा था। कुछ लोग इसे तैर कर पार कर रहे थे तो कुछ ट्रैक्टर इत्यादि पर सवार होकर आवागमन कर रहे थे।
10.... ....... गांव डबकोली कलां के पुल के ऊपर भरे पानी के बीच ट्रेक्टर लेकर अपने खेत से वापिस आ
10.... ....... गांव डबकोली कलां के पुल के ऊपर भरे पानी के बीच ट्रेक्टर लेकर अपने खेत से वापिस आ
10.... ....... गांव डबकोली कलां के पुल के ऊपर भरे पानी के बीच ट्रेक्टर लेकर अपने खेत से वापिस आ
10.... ....... गांव डबकोली कलां के पुल के ऊपर भरे पानी के बीच ट्रेक्टर लेकर अपने खेत से वापिस आ