नेशनल हाईवे-44 पर इन दिनों धुंध के मौसम में संभलकर ही निकलें, क्योंकि हाईवे खतरे से खाली नहीं है। हर ढाई किलोमीटर बाद एक ऐसी जगह है, जो हादसों में लोगों की जान ले रही है। ये हम नहीं सरकारी आंकड़े बता रहे हैं। एनएच पर पानीपत सीमा से कुरुक्षेत्र सीमा तक 45 किलोमीटर के सफर में 17 ब्लैक स्पॉट हैं यानी हर ढाई किलोमीटर बाद एक। जहां तीन साल में 206 हादसों में 157 मौत और 140 लोग घायल हुए। लेकिन ये खतरनाक आंकड़ा लोकेशन के साथ सामने आने के बाद भी कुछ नहीं हुआ। एनएचएआई टोल वसूलने और जिला प्रशासन केवल ब्लैक स्पॉट पर मरने वालों की लिस्ट तैयार करने तक सीमित है। रोड सेफ्टी विशेषज्ञों का कहना है कि इन ब्लैक स्पॉट की दशा सुधारने की बजाय यहां हालात ये पैदा हो गए हैं कि जिला प्रशासन रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक भी बंद कमरे में गुपचुप करने लगा है ताकि कोई सवाल ना कर पाए।
10 साल में खामियां बनीं ब्लैक स्पॉट
नेशनल हाईवे को सिक्स लेन करने का काम 2009 में शुरू हुआ था, लेकिन 10 साल में हाईवे
के खामियां दूर नहीं हुई। बल्कि करनाल रेंज में ही 17 ब्लैक स्पॉट पैदा हो गए। रोड सेफ्टी विशेषज्ञ तेजपाल का कहना है कि होना तो यह चाहिए था कि सिक्स लेन होने के बाद हाईवे पूरी तरह से हादसा मुक्त बनता, लेकिन यहां तो स्थिति विपरीत ही नजर आ रही है। हाईवे को चौड़ा करने का मकसद ही हादसों के ग्राफ को कम करना था।
1700 करोड़ रुपये टोल कहां गया?
291 किलोमीटर लंबे नेशनल हाईवे-44 पर सिक्सलेन का काम शुरू होने के बाद तीन टोल प्लाजा लगे थे। बाद में टोल प्लाजा की संख्या भी बढ़ गई। लेकिन सुविधाएं टोल के अनुरूप नहीं मिल रही। आरटीआई से मिले आंकड़े के अनुसार, हर माह औसतन एक टोल पर 20 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू है। वहीं अकेले बसताड़ा टोल प्लाजा पर भी अब तक 1700 करोड़ रुपये टोल के रूप में वसूले जा चुके हैं। सड़क सुरक्षा पर काम कर रहे एडवोकेट राजकुमार का कहना है कि सुविधाएं नहीं दी, हाईवे हादसा और खामियां मुक्त नहीं हुए, तो 1700 करोड़ रुपये का रेवेन्यू कहां गया?
सबसे ज्यादा कर्णलेक पुल खतरनाक
प्रशासन की ओर से तैयार की गई ब्लैक स्पॉट रिपोर्ट में 17 लोकेशन सामने आई हैं। जहां जनवरी 2016 से दिसंबर 2018 तक के हादसों का डाटा लिया गया है। इनमें 24 हादसों में 21 मौत और 18 लोगों के घायल होने के साथ कर्णलेक पुल फर्स्ट ऑर्डर ब्लैक स्पॉट है। इसके बाद दूसरे नंबर पर कोहंड और तीसरे नंबर पर पक्का पुल मधुबन की लोकेशन है। यहां 18 हादसों में 14 मौत और 13 लोग घायल हुए हैं।
जहां सुविधाओं के नाम पर टोल ले रहे वहीं 7 मरे
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह भी है कि ब्लैक स्पॉट की लिस्ट बसताड़ा टोल प्लाजा का भी नाम है। यानी जिस जगह सुविधाओं के नाम पर टोल वसूला जाता है। वहां ही तीन साल में 11 हादसों में 7 लोग मरे। रोड सेफ्टी विशेषज्ञ एडवोकेट संदीप राणा का कहना है कि इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या होगी?
सभी 17 लोकेशन पर ये हैं खामियां
-कर्णलेक और पक्का पुल की चौड़ाई कम।
-ज्यादातर जगह से रेलिंग गायब।
-तीव्र मोड़
-खराब सड़क
-रिफ्लेक्टर टेप, लाइट व साइन बोर्ड आदि का ना होना।
यहां हैं ब्लैक स्पॉट
लोकेशन हादसे मौत घायल
कर्णलेक पुल 24 21 18
कोहंड 18 16 09
पक्का पुल 18 14 13
बलड़ी बाईपास 16 12 14
नमस्ते चौक 15 11 09
मनक माजरा 12 10 09
कंबोपुरा 13 10 09
अर्पणा अस्पताल 12 09 06
टोल प्लाजा बसताड़ा 11 07 14
पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस घरौंडा 12 08 06
चौटाला पेट्रोल पंप सराई कोहंड 07 07 04
राजिन्द्र वैष्णों ढाबा गढ़ी मुल्तान 09 06 06
लिबर्टी घरौंडा 11 05 07
शामगढ़ 08 06 04
शनि मंदिर कोहंड 08 05 05
रंबा मोड़ 06 05 04
गुरुद्वारा तखाना 06 05 03
कुल 206 157 140
एडीसी से नहीं मिला जवाब
रोड सेफ्टी कमेटी में ब्लैक स्पॉट पर क्या निर्देश एनएचएआई को दिये गए। कब तक का उन्हें ब्लैक स्पॉट सुधारने का समय दिया है। ये जानने के लिए जब एडीसी अनीश यादव को फोन किया, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया।
हमें जो लोकेशन प्रशासन की ओर से दी गई थी। साथ ही जो निर्देश मिले थे, उनका हमने पालन किया है। साइन बोर्ड लगा दिये हैं और रोड मार्किंग कर दी है। हमें जो निर्देश थे, हमने उन्हें सुधार दिया। -सन्नी शर्मा, मैनेजर, एनएचएआई।