माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) करनाल में वीरवार को तीन दिवसीय राष्ट्रीय डेयरी मेला एवं एग्री एक्सपो 2025 की शुरुआत हो गई। जिसका उद्घाटन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के उपमहानिदेशक (कृषि प्रस्तार) डॉ. राजबीर सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि एनडीआरआई की तकनीकों ने डेयरी सेक्टर को नया आसमान दिया है। राष्ट्रीय डेयरी मेला तो सुबह से ही सज गया था, बड़ी संख्या में किसान देशभर से पशु लेकर पहुंचे थे।
आईसीएआर के विभिन्न संस्थानों, स्टार्टअप और नए उद्यमियों ने प्रदर्शनी में अपने स्टाॅल लगाए। कई संस्थानों ने अपनी नई तकनीकों, प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित कर किसानों को जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने किसानों से सीधे संवाद करके कृषि, डेयरी और पशुपालन विषय पर जानकारी दी। उनके सवालों के जवाब भी दिए। हालांकि मौसम खराब होने के कारण स्थानीय किसानों की संख्या कुछ कम रही।
शाम को मुख्य अतिथि डॉ. राजबीर सिंह के पहुंचने पर संस्थान के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने स्वागत किया। मुख्य अतिथि ने मुख्य समारोह में अन्य वैज्ञानिकों के साथ डेयरी स्मारिका का विमोचन किया। डाॅ. राजबीर सिंह ने कहा कि एनडीआरआई द्वारा क्लोन तकनीक को और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। पशुओं के लिए मिनरल मिक्सचर और गुणवत्ता वाले सीमेन उपलब्ध करा एनडीआरआई ने महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने किसानों को रोल मॉडल बनने व मौसम में आ रहे बदलाव को ध्यान में रखकर कार्य करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
निदेशक एवं कुलपति डॉ. धीर सिंह ने कहा कि आज किसानों को और अधिक समृद्ध एवं आत्मनिर्भर बनने के लिए अमूल के तर्ज पर सहकारी समिति बनाने की आवश्यकता है। एनडीआरआई किसानों एवं पशुपालकों के लिए हमेशा प्रयासरत रहा है जिसका परिणाम है कि शीघ्र यह संस्थान क्लोनिंग तकनीक के पशुओं को किसानों के लिए उपलब्ध कराएगा, जिनसे एक वर्ष में गुणवत्ता वाले 10 से 12 पशु तक प्राप्त हो सकते हैं।
इसमें ओवम पिकअप (ओपीयू) तकनीक के तहत अल्ट्रासाउंड तकनीक की मदद से गाय से अंडे निकाल कर क्लोनिंग से भ्रूण में बदल देते हैं, इसके बाद भ्रूण को दूसरी कम दूध देने वाली गायों में भी हस्तांतरित करके एक साल में कई गुणवत्ता वाले पशु प्राप्त किए जा सकते हैं। इन पशुओं पर मौसम के परिवर्तन का भी असर लगभग नहीं के बराबर होगा।
किसानों को वैज्ञानिकों और विज्ञान पर भरोसा करने की आवश्यकता है तथा साथ ही अपने दूध एवं दुग्ध उत्पादों में गुणवत्ता बनाए रखने के साथ भरोसा और पारदर्शिता भी बनानी चाहिए। मौके पर संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डा. राजन शर्मा, प्रबंध मंडल के सदस्य तेग सिंह, गोपाल रतन पुरस्कार प्राप्त किसान राम सिंह, आयोजन सचिव एवं प्रभागाध्यक्ष डाॅ. गोपाल सांखला ने विचार रखे।
मौके पर संयुक्त निदेशक (प्रशासन) बीडी फंसल आदि कई वैज्ञानिक मौजूद रहे। संचालन प्रधान वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) डॉ. बीएस मीणा ने किया। मेले में 28 फरवरी को उद्यमियों, किसानों के बीच विचार मंथन, किसान-वैज्ञानिक संगोष्ठी, पशुओं की प्रतियोगिताएं होगी। एक मार्च को प्रतियोगिताओं का परिणाम घोषित किया जाएगा। दोपहर बाद पुरस्कार वितरण समारोह होगा।