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Karnal News: कृषि में डेयरी का 10 लाख करोड़ का योगदान

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) में रविवार को विश्व दुग्ध दिवस मनाया गया। जिसका विषय रहा आइए डेयरी की शक्ति का जश्न मनाएं। इस मौके पर निदेशक निदेशक और कुलपति डॉ. धीर सिंह ने कहा कि कृषि में डेयरी क्षेत्र का योगदान 24 प्रतिशत है, जिसका मूल्य लगभग 10 लाख करोड़ रुपये है और यह दुनिया में सबसे अधिक है।
डॉ. धीर सिंह ने कहा कि देश के लगभग 450 मिलियन छोटे और सीमांत किसान जुड़े हैं। एनडीआरआई ने गुणवत्ता वाले जर्म प्लाज्म, उत्कृष्ट नस्लों, कुशल जनशक्ति और बहुमूल्य अंतर्दृष्टि और समय पर इनपुट का उत्पादन करके राष्ट्र की श्वेत क्रांति का समर्थन किया है।
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इन सामूहिक प्रयासों से ही भारत 1998 से ही दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। भारत में दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता विश्व की औसत प्रति व्यक्ति उपलब्धता से अधिक है। बढ़ती आबादी के परिणामस्वरूप, दूध और दूध उत्पादों की मांग भी लगातार बढ़ रही है। एक अनुमान के अनुसार, देश की दूध और दूध उत्पादों की मांग को पूरा करने के लिए भारत को 2033 तक प्रति वर्ष 330 एमएमटी दूध का उत्पादन करने की आवश्यकता है। हाल के दशक में, दूध उत्पादन में वृद्धि औसतन 6.6 प्रतिशत थी, लेकिन लक्षित 330 एमएमटी को प्राप्त करने के लिए, हमें कम से कम 14 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर हासिल करने की आवश्यकता है। इसमें चारे की बढ़ती लागत, घटती कृषि भूमि, उभरती हुई बीमारियां जैसी बाधाएं लक्ष्य को प्राप्त करने में बाधा बन रही हैं। उत्पादन लागत और मीथेन उत्पादन को कम करने के लिए स्वदेशी दुधारू नस्लों की उत्पादकता बढ़ाने पर गंभीरता से ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
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निदेशक ने कहा कि वर्तमान में भारत का दूध निर्यात लगभग 2269 करोड़ रुपये का है, जो दुनिया के दूध उत्पाद निर्यात का केवल 2.6 प्रतिशत है। फिर भी, हमें अपने दूध उत्पादों की निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए और अधिक काम करने की आवश्यकता है, जो किसानों को उनकी आजीविका बढ़ाने के लिए अच्छा रिटर्न दिलाने के लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय दूध निर्यात के लिए नए रास्ते तलाशने की आवश्यकता है।
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