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नगद पैसे नहीं देने पर रोका शव, चेक मिलने पर सौंपा

Tue, 15 Nov 2016 12:41 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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अस्पताल में सफाई ठेके के सुपरवाइजर ने इस साजिश को अंजाम दिया। - फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी से निजी अस्पतालों में इलाज में भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। अब नए नोट के बिना अस्पताल डेडबाडी तक नहीं दे रहे हैं। रविवार की रात को ऐसा ही एक मामला सामने आया। मामले के अनुसार, गांव जड़ौली निवासी प्रदीप (35) को शहर के अमृतधारा अस्पताल में दाखिल कराया गया। तीन दिन पहले उसे सांस में दिक्कत थी और इंफेक्शन भी था। रविवार को करीब पौने आठ बजे अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि प्रदीप की मौत हो गई है। अस्पताल ने परिजनों को 22 हजार रुपये का बिल थमा दिया। परिजन पहले 7 हजार रुपये जमा करा चुके थे।
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उस समय परिजनों के पास नगद 22 हजार रुपये नहीं थे। रिश्तेदारों और जानकारों को फोन कर जैसे-तैसे पैसे एकत्र किए, लेकिन प्रबंधन ने पुराने नोट लेने से इनकार कर दिया। परिजन अस्पताल प्रबंधन के सामने खूब गिड़गिड़ाया, लेकिन अस्पताल की तरफ से साफ कहा गया कि जब तक पूरे पैसे नहीं दोगे तो वे डेड बॉडी नहीं देंगे। खास बात यह भी कि 1000 और 500 के नोट नहीं होने चाहिए। जब तीन घंटे तक अस्पताल ने डेड बॉडी को अपने कब्जे से नहीं छोड़ा तो परिजनों ने एक दूसरे निजी अस्पताल के डॉक्टर का फोन कराया तो चेक लेने पर सहमति बनी।

रात को ही प्रदीप के परिजन 25 किलोमीटर गांव गए और वहां पर रखी चेकबुक से मंगलवार की तारीख भरके चेक अस्पताल को दिया। रात करीब साढ़े दस बजे अस्पताल ने चेक लेने के बाद ही डेड बॉडी दी। प्रदीप के पिता हुसन सिंह का कहना है कि शव लेने के लिए वे तीन घंटे तक गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। नए और पुराने नोटों के फेर में बेटे की मौत के बाद भी बेकद्री हो गई।
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साहब जी डेड बॉडी दे दो, बाद में पैसे दे देंगे
पिता हुसन सिंह तीन घंटे तक अस्पताल के बाहर गिड़गिड़ाता रहा। वह कहता रहा साहब जी हमारे पास पैसे हैं, लेकिन वे बैंक में हैं। उन्हें हम अब नहीं निकाल सकते। दो चार दिन में किसी से लेकर पैसे दे देंगे, लेकिन अस्पताल ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। हुसन ने कहा कि वह अनपढ़ है। कार्ड और एटीएम के बारे में जानकारी नहीं है। बेटे का शव तो दे दो। कम से कम बेटे को देखकर ही तसल्ली हो जाएगी। लेकिन, अस्पताल के डॉक्टरों ने पिता के दर्द को नहीं समझा।
बता दें कि प्रदीप प्लंबर का काम करता था। उसके पीछे उसकी दो बेटियां और एक बेटा है।

हमारे लिए कोई आदेश नहीं हैं : गुुप्ता
अमृतधारा अस्पताल के संचालक डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि 1000 और 500 रुपये के पुराने नोट लेने के लिए हमारे पास कोई आदेश नहीं हैं। यह केवल सरकारी अस्पतालों के ही आदेश हैं। वैसे हम किसी का चेक नहीं लेते, लेकिन मृतक के परिजनों ने किसी जानकार डॉक्टर का फोन कराया था, इसलिए चेक लिया गया। गुप्ता ने यह भी दावा किया कि मृतक के परिजनों के पास न तो पुराने नोट थे और न ही नए नोट।
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